कामुकता – एक आनंदित करने वाली नैसर्गिक अनुभूति – उसे बीमारी समझने वाले स्वयं बीमार हैं – 1 जून 2015

स्वामी बालेंदु कामुकता को परिभाषित करते हुए बता रहे हैं कि क्यों उनकी नज़रों में वह महज एक सुंदर एहसास है, जो आनंदित करता है- और वास्तव में उसका दमन करना ही बीमारी का लक्षण है!

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मैं पुनः कभी दक्षिण अफ्रीका क्यों नहीं जाऊँगा? 19 अक्टूबर 2014

स्वामी बालेंदु दक्षिण अफ्रीका में हुए अपने अनुभवों का वर्णन कर रहे हैं और बता रहे हैं कि क्यों उस बार अपनी यात्रा में उन्हें बिलकुल मज़ा नहीं आया।

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यदि भारतीय पुरुष चाहते हैं कि उन्हें एक संभावित बलात्कारी न समझा जाए तो उन्हें क्या परिवर्तन लाने होंगे! 28 जनवरी 2014

स्वामी बालेंदु भारतीय पुरुषों को सलाह दे रहे हैं के वे अपने भीतर परिवर्तन लाएं। वे उन्हें यौन उत्पीड़न और बलात्कार आदि के विषय में पढ़ने का आग्रह करते हुए महिलाओं का सम्मान करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं!

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बलात्कारी पंच – पंचायतें जहां बलात्कार अपराध नहीं बल्कि प्रेम की सज़ा है – 27 जनवरी 2014

स्वामी बालेंदु सामूहिक बलात्कार के एक मामले के बारे में लिख रहे हैं, जिसमें पश्चिम बंगाल के एक गाँव की पंचायत ने एक महिला के विरुद्ध यह सज़ा सुनाई कि उस पर बलात्कार किया जाए क्योंकि उसने एक ऐसे पुरुष से संबंध स्थापित किए, जिसका अनुमोदन समाज नहीं करता था।

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महिलाओं के कपड़े बलात्कार या यौन उत्पीडन का कारण नहीं हैं! 22 जनवरी 2014

स्वामी बालेंदु उस टिप्पणी का जवाब दे रहे हैं जिसका आशय यह था कि उनकी पश्चिमी पत्नी और मित्रों द्वारा पहने जाने वाले कपड़ों के कारण भारतीय पुरुष उनकी तरफ घूरते हैं।

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सामान्य भारतीय महिला के जीवन में यौन प्रताड़ना दैनिक अनुभव है – 21 जनवरी 2014

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि जिस यौन प्रताड़ना से पश्चिमी महिलाएं इतना घबराती हैं वह भारतीय महिलाओं का रोज़ का अनुभव है।

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विदेशियों के मन में भारत की बद से बद्तर होती जा रही खराब छवि – 20 जनवरी 2014

स्वामी बालेंदु हाल में विदेशी महिला पर्यटकों के साथ हुए सेक्स उत्पीड़न और बलात्कारों के चलते भारत की दिनोदिन गिरती प्रतिष्ठा के संबंध में चर्चा कर रहे हैं।

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धार्मिक परम्पराएँ शिष्यों को गुरुओं के अपराधों पर पर्दा डालने पर मजबूर करती हैं-12 सितंबर 2013

स्वामी बालेंदु समझा रहे हैं की कैसे धर्म शिष्यों को आदेश देता है कि न सिर्फ वे उनकी आँखों के सामने किए जा रहे गुरुओं के अपराधों की अनदेखी करें बल्कि दूसरों को भी उसके खिलाफ बोलने की इजाज़त न दें!

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ईश्वर से डरकर आपको क्या मिलता है? अच्छे नैतिक विचार या दिमागी बीमारियाँ? – 18 जून 2013

स्वामी बालेंदु पूछ रहे हैं कि ईश्वर के डर से अच्छे नैतिक विचार प्राप्त होते हैं या उससे लोगों के दिमागों में नकारात्मक विचार पैदा होते हैं?

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भारत में जुआ, शराब और सेक्स जैसी समस्याओं के लिए पश्चिमी संस्कृति जिम्मेदार नहीं – 16 जनवरी 13

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि भारत में लोगों को शराब पीने, जुआ खेलने और यहां तक कि यौन अपराधों से होने वाली दिक्कतों के लिए पश्चिम पर आरोप लगाना क्यों न्यायसंगत नहीं है।

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