प्रिय योग-शिक्षकों, योग को और मुश्किल न बनाएँ – 1 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु योग-शिक्षकों को-और सामान्य रूप से सभी शिक्षकों को-बता रहे हैं कि चीजों को कठिन नहीं बल्कि आसान बनाएँ। यह उनके लिए, उनके छात्रों के लिए और उनके आसपास के लोगों के लिए भी मददगार साबित होगा।

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मैं समझता हूँ कि विदेशी लोगों के लिए विभिन्न योग-मुद्राओं के संस्कृत नामों की आवश्यकता नहीं है! क्यों? 30 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि योग सिखाते समय वे और उनके परिवार के सदस्य विदेशी लोगों के लिए विभिन्न योग-मुद्राओं के लिए सामान्यतया संस्कृत शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते। यहाँ पढ़िए कि क्यों।

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क्या योग सीखने वाले छात्रों की मुद्राएँ ठीक करना आवश्यक है? 29 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु इस प्रश्न पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या योग शिक्षकों को छात्रों को बोलकर या पकड़कर सिखाना चाहिए। यहाँ पढ़िए कि वे सामान्यतः दोनों ही विकल्पों को क्यों खारिज करते हैं।

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स्कूलों को बच्चों के लिए रोचक बनाना – हमारे शिक्षकों के लिए कार्यशाला – 27 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपने स्कूल के शिक्षक और शिक्षिकाओं के लिए आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के बारे में बता रहे हैं। वहाँ उन्होंने सीखा कि कैसे कक्षा में पढ़ाए जाने वाले पाठों के साथ कहानियों को समेकित किया जा सकता है।

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