भारतीय क्यों सोचते हैं कि बच्चों को अपने अभिभावकों से डरना चाहिए? 8 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे स्कूली किताबें डरा-धमकाकर बच्चों का लालन-पालन करने की भारतीय संस्कृति को प्रतिबिंबित करती हैं, विशेष रूप से पिता से डरकर रहने की संस्कृति को।

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संबंधों में आने वाली कठिनाइयों के समय मानसिक संतुलन न खोना – 27 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि आपसी संबंधों के बीच पैदा होने वाली समस्याओं, जैसे क्रोध, मानसिक पीड़ा और दूसरी समस्याओं का मुक़ाबला कैसे करें।

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समस्याओं के प्रति आपका रवैया-आप उनसे घबराते हैं या उनका डटकर मुकाबला करते हैं? 26 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि समस्याओं का सामना होने पर कैसे आपकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि उनके प्रति आपकी प्रतिक्रिया को प्रभावित करती है।

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खुद अपने आप पर भरोसा करें: आप परिवर्तन ला सकते हैं और उनसे लाभ भी उठा सकते हैं – 25 मार्च 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि बदलावों को स्वीकार करने के लिए अधिक विश्वास की जरूरत पड़ती है। अनजान रास्तों पर निकल पड़ने से न घबराएँ।

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अगर आप किसी भी क्षण मरने के लिए तैयार हैं तो फिर डरने की ज़रुरत नहीं! 31 अगस्त 2014

स्वामी बालेन्दु स्वीडन में एक छोटे हवाई जहाज़ में दिए गए अपने एक साक्षात्कार के बारे में बता रहे हैं-मृत्यु भय के बारे में भी!

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भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं के काल्पनिक डर से कैसे निपटें! 17 फरवरी 2014

स्वामी बालेंदु कुछ प्रकरणों का ज़िक्र कर रहे हैं, जिनमें लोग भविष्य में होने वाली काल्पनिक घटनाओं से आशंकित होकर उनके पास सलाह हेतु आए थे। वे बता रहे हैं कि इस व्याधि से निपटने के लिए क्या किया जा सकता है।

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एक कटु अनुभव अच्छे लोगों से मिलने के मौके मुझसे नहीं छीन सकता – 8 सितंबर 2013

स्वामी बालेंदु एक महिला के साथ हुई अपनी बातचीत का विवरण दे रहे हैं जो इस प्रश्न से संबन्धित है कि एक बुरे अनुभव के बाद क्या वे नई-नई जगहों में जाने से घबराएँगे।

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ईश्वर से डरकर आपको क्या मिलता है? अच्छे नैतिक विचार या दिमागी बीमारियाँ? – 18 जून 2013

स्वामी बालेंदु पूछ रहे हैं कि ईश्वर के डर से अच्छे नैतिक विचार प्राप्त होते हैं या उससे लोगों के दिमागों में नकारात्मक विचार पैदा होते हैं?

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अंधविश्वासियों की किस्में – 5: वैज्ञानिक, डॉक्टर या ऐसे ही अतिउच्चशिक्षित लोग – 15 मार्च 13

स्वामी बालेंदु उन अंधविश्वासियों की बात करते हैं जो उच्चशिक्षित हैं, वैज्ञानिक और डॉक्टर है और जिनसे यह अपेक्षा नहीं की जाती कि वे इन ढकोसलों में विश्वास करें।

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अंधविश्वासियों की किस्में – 4: भारत के लोकप्रिय क्रिकेटर और अन्य खिलाड़ी – 14 मार्च 13

स्वामी बालेंदु अंधविश्वासियों की एक और किस्म का वर्णन करते हैं। ये वो खिलाड़ी हैं जो जूते, दस्ताने या रुमाल को अपनी सफलता का रहस्य मानते हैं।

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