एक पोल डांसर की तांत्रिक जकड़ से छुटकारा- 1 सितंबर 2013

पिछले हफ्ते आपने पढ़ा कि कैसे मैंने अपनी आस्ट्रेलियन आयोजक का साथ छोडने का निर्णय लिया था क्योंकि वह मेरे काम को भी अपने काम की तरह विज्ञापित कर रही थी, जिसमें ‘तंत्र’ लेबल के अलावा पश्चिम में ‘तंत्र’ शब्द के साथ अनिवार्य रूप से जुड़ी यौन संबंधी बातें भी संयुक्त थीं। मैंने उसके साथ काम न करने का निर्णय तो कर लिया लेकिन इस बात ने मुझे भावनात्मक रूप से परेशान कर दिया। उस देश में, जहां मैं सिर्फ दूसरी बार आया हूँ और जहां मैं किसी को ठीक तरह से जानता भी नहीं, आखिर मैं कहाँ जाऊंगा?

उस शाम उसे किसी ग्राहक से बात करते हुए सुनकर मैं बहुत परेशान हो गया। मैंने रात को में भारत फोन लगाया कि अपने परिवार से पूरी स्थिति के बारे में चर्चा कर सकूँ। मुझे याद है कि अपनी हालत के बारे में सोचकर मैं रो पड़ा और अपने छोटे भाई से कहा कि मैं किसी भी हालत में जल्द से जल्द यहाँ से निकलना चाहता हूँ। मैं यहाँ काम नहीं कर सकता, यह मेरे लिए ठीक जगह नहीं हैं, मेरे आयोजक ठीक लोग नहीं हैं और ग्राहक ऐसे हैं जिनकी अपेक्षाएँ मैं किसी भी हालत में पूरी नहीं कर पाऊँगा!!

परिवार से बात करके मुझे कुछ अच्छा लगा और मेरे छोटे भाइयों ने मुझे कुछ विवेकपूर्ण सलाह भी दी: मेरे पास पहले ही गोल्ड कोस्ट के लिए विमान में आरक्षण था, जहां एक हफ्ते के भीतर मुझे अपना अगला कार्यक्रम प्रस्तुत करना था। मतलब, अगर मैं इस महिला के तंत्र-केंद्र को छोड़ भी दूँ तो भी मुझे अगले चार दिन यहीं बिताने थे। अगर मैं वहाँ किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं भी जानता था कि उसके यहाँ रह सकूँ तो इतने समय के लिए मैं किसी होटल में रह सकता था और यूं ही समय व्यतीत कर सकता था।

पिछली यात्रा के दौरान परिचित मेरा कोई मित्र उस इलाके में नहीं रहता था क्योंकि पिछली बार मैंने बिल्कुल अलग इलाके में अपने कार्यक्रम किए थे लेकिन एक महिला थी, जिससे मेरा नेट पर संदेशों के आदान-प्रदान भर का परिचय था और जो करीब ही कहीं रहती थी। तो मैंने उस महिला को, जिससे मेरा कुछ ईमेल संदेश का भर परिचय था, फोन लगाया और उससे कहा कि इस परेशानी में मेरी कुछ मदद करे। मैंने पूरा प्रकरण उसे नहीं बताया, सिर्फ इतना कहा कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है और यह जगह छोडना मेरे लिए बहुत ज़रूरी है और यह भी कि क्या वह यहाँ आकर मुझे ले जा सकती है जिससे मैं कुछ दिन उसके यहाँ व्यतीत कर सकूँ?

आप मेरी खुशी की कल्पना कर सकते हैं, जब उसने कहा, "जी हाँ, बिल्कुल! परेशान न हों, मैं डेढ़ घंटे की दूरी पर हूँ और कल मैं आऊँगी और आपको ले चलूँगी! मेरा घर छोटा सा है और मेरे दो बच्चे हैं लेकिन आप जब तक चाहें मेरे यहाँ रुक सकते हैं!" मैंने उसे दिल की गहराइयों से धन्यवाद कहा और बताया कि मुझे सिर्फ चार दिन ही रहना है।

यह इंतज़ाम करके मैं एक बार फिर कमरे से बाहर निकला तो देखा कि मेरी आयोजक अभी जग रही है। मैंने उसे बताया कि मैं आयोजित कार्यशाला और सत्र नहीं कर पाऊँगा और कल ही वहाँ से चला जाऊंगा।

मैंने उसे शांतिपूर्वक समझाने की कोशिश की कि हमारे आचार-विचार मेल नहीं खाते। मैं नहीं चाहता कि वह पूरे आस्ट्रेलिया के लिए मेरी आयोजक बने और उसके काम करने के तरीके से मैं कोई सामंजस्य नहीं बिठा पाऊँगा। इसके अलावा मैं ‘तांत्रिक’ कार्यशाला और व्यक्तिगत सत्र के साथ कोई भी संबंध नहीं रखना चाहता और इस तरह का काम करना मेरे लिए संभव नहीं है।

दूसरे दिन मेरी वह ईमेल फ्रेंड आई और मैंने अपनी आयोजक से गुड-बाई कहा और जाकर कार में बैठ गया। किसी जगह को छोड़ते हुए इतना अच्छा मुझे कभी नहीं लगा था! रास्ते में मैंने पूरी आपबीती उस महिला मित्र को सुनाई और बताया कि क्यों मुझे इतनी हड़बड़ी में उसकी मदद की ज़रूरत पड़ी।

जी हाँ, मैं इस भूतपूर्व पोल-डांसर को, जो चोला बदलकर ‘तांत्रिक योगी’ बन गई थी, जीवन में कभी भूल नहीं पाऊँगा। मैंने यह सीख पाई कि अपने आयोजकों का चुनाव करने से पहले मुझे उनके बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करनी चाहिए और कुछ अधिक सतर्क रहना चाहिए। उम्मीद है, भविष्य में ऐसी अप्रिय स्थितियों से मैं अपने आपको दूर रख सकूँगा!

तुम्हारी पेशकदमी को नज़रअंदाज़ करता हूँ, इसका मतलब यह नहीं कि मैं समलैंगिक हूँ! 25 अगस्त 2013

पिछले सप्ताह मैंने आपको बताया था कि 2005 में मेरे आस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान मेरी आयोजक ने मेरे लिए एक व्यक्तिगत नृत्य प्रदर्शन किया था। इस अश्लील नृत्य से मेरे अंदर उसके प्रति कोई रुचि तो जागृत नहीं हो पाई मगर मैं एक अजीबोगरीब स्थिति में फंस ज़रूर गया। वह जो काम कर रही थी उसे वह तंत्र कहती थी और कार्यशिविरों और मसाज-सत्रों का, जो, उसके अनुसार, यौन-तंत्र को उत्तेजित करते थे, आयोजन करती थी। पहले ही मैं उसके केंद्र में अपने कार्यक्रम के आयोजन को लेकर शंकित था और अब मैं यह भी जानता था कि मेरे इंकार पर वह मुझसे खफा भी है। यह कोई अच्छी स्थिति नहीं थी लेकिन रात में अपने बिस्तर पर यह सोचते हुए कि अब किया क्या जाए, मैंने तय किया कि इस स्थिति को ऐसा मोड़ दिया जाए कि कम से कम नुकसान हो। दुर्भाग्य से यह भी मेरी योजना के अनुरूप नहीं हो पाया!

मैंने अपने दिन की शुरुआत इस तरह की, जैसे रात में कुछ हुआ ही न हो। मुझे खुशी हुई, जब मैंने देखा कि वह भी अपनी निराशा से उबर चुकी है। उसने मुझसे हमारे कार्यक्रमों के बारे में बातचीत की और बताया कि शाम को सामूहिक योग-सत्र भी चलाया जाएगा। मैंने अपना काम शुरू कर दिया।

उस केंद्र में मेरी आयोजक का एक सहयोगी भी था जो सबेरे आया और जो लोग मुझसे मिलने आ रहे थे, उनके स्वागत के दौरान मेरी सहायता करता रहा और फिर समयानुसार कार्यक्रम के संचालन में भी लगा रहा। मेरे कुछ व्यक्तिगत-सत्र भी थे और स्वाभाविक ही, अपनी आयोजिका के साथ मेरी कुछ बातें भी हुईं। फिर दोपहर में, यह उत्सुक, खुशमिजाज़ सी दिखने वाली महिला फिर मेरे पास आई और साफ शब्दों में यह व्यक्तिगत प्रश्न पूछा- "मैंने सुना है आप महिलाओं से ज़्यादा पुरुषों में रुचि रखते हैं! क्या यह सच है?" मैं सन्न रह गया। पल भर रुककर मैंने उससे कहा कि मैं पुरुषों के प्रति बिल्कुल आकर्षित नहीं हूँ। लेकिन मैं समझ गया कि मेरी आयोजक क्यों इस तरह की अफवाहें फैला रही है। मैंने उसके स्पष्ट प्रलोभन को ठुकरा दिया था और उसकी नज़र में उसका तार्किक अर्थ यही था कि मैं समलैंगिक हूँ!

इस वार्तालाप ने मुझे एक ईमेल का पुनः स्मरण करा दिया, जो कुछ देर पहले ही मुझे मिला था: यह एक पुरुष का ईमेल था, जो, ईमेल के अनुसार, मेरे प्रति आकर्षण महसूस करता था; लेकिन उसकी स्वच्छंद भाषा ऐसी थी कि अगर उसे पुस्तकाकार में छपवा दिया जाए तो उसे पढ़ना किसी समलैंगिक अश्लील (पॉर्न) साहित्य को पढ़ने जैसा होगा। यह पता चलने के बाद कि मेरे बारे में किस तरह की अफवाहें फैली हुई हैं, मैं समझ गया कि यह ईमेल मेरे इनबॉक्स में कैसे पहुंचा!

मैं जिस स्थिति में फंस गया था वह दिलचस्प थी लेकिन मैंने सोचा कि यह बात कि मैं समलैंगिक हूँ, मुझे किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचा रही है और न ही इससे सीधे-सीधे मेरा कोई अपमान ही हो रहा है-लिहाजा, मैंने इसे भी तूल न देने का निश्चय किया।

लेकिन शाम को मेरा एक ऐसी बात से सामना हुआ, जो मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आई: जब लोग ध्यान के लिए आते हैं तो आयोजक मेरी फ्लायर-शीट्स और ब्रोशर्स एक टेबल पर प्रदर्शित कर देते हैं। मैंने देखा कि मेरे ब्रोशर्स पर संपर्क-सूत्र वाली जगह पर, जिसमें मेरी वैबसाइट, ईमेल, फोन नंबर आदि की जानकारियाँ होती हैं, उसे मिटाकर, एक दूसरा कागज़ स्टेपल कर दिया गया था और जिससे मेरे संपर्क की जानकारी कोई पढ़ नहीं सकता था। मैं इस बात से बहुत विचलित हुआ क्योंकि अब कोई भी सीधे मुझसे संपर्क नहीं कर सकता था, न ही मेरी वैबसाइट पर जा सकता था!

ध्यान से पहले हमारे पास ज़्यादा वक़्त नहीं था और जब मैंने अपनी आयोजक से इस बारे में पूछा तो उसने उड़ता सा जवाब दिया- "मैं आपके आस्ट्रेलियाई कार्यक्रमों के स्वत्वाधिकार (exclusive rights) प्राप्त करना चाहती हूँ! मैं सारे देश में आपकी बुकिंग आदि किया करूंगी-हम इस बारे में बाद में बात करते हैं…!" अब तो ये कुछ जादा ही हो गया था और यह मुझे किसी कदर मंजूर नहीं था, मगर मैं शांत और सामान्य बना रहा। मैंने अपना प्रवचन सत्र बहुत से लोगों के साथ, सुचारू रूप से सम्पन्न किया।

लोग उसके संपर्क-विवरण वाली मेरी फ्लायर-शीट्स ले गए थे और लोगों के वापस चले जाने के बाद भी बार-बार उसका फोन बज उठता था। लोग धड़ाधड़ बुकिंग किए जा रहे थे। मैं बैठा रहता था और फोन आने पर वह बाहर निकलकर बात करती थी। एक बार मैं ज़रा-सी झपकी ले रहा था कि मैंने बाहर उसकी आवाज़ सुनी। वह किसी से बात कर रही थी और इसी बात को सुनकर अंततः मैंने उससे संबंध विच्छेद करने का निर्णय किया।

फोन पर दूसरी तरफ कोई पुरुष था और स्वाभाविक ही, व्यक्तिगत सत्र का इच्छुक था। मेरी आयोजक उससे कह रही थी- "उनके साथ आपको यह सत्र अवश्य करना चाहिए। जो लोग उनके साथ ऐसे सत्रों में शामिल हुए हैं, उनसे मैंने सुना है कि वे हवा में तैरता महसूस कर रहे थे और उनमें अद्भुत तांत्रिक शक्ति का संचार हो गया था! उन्हें ऐसा अद्भुत और आनंददायक अनुभव जीवन में पहले कभी नहीं हुआ था! मैंने सुना है कि वे पुरुषों को तरजीह देते हैं, इसलिए उनके साथ खास तौर से आपका व्यक्तिगत-सत्र बहुत आनंददायक होगा!"

इस वक़्त तक मेरे सामने यह बात पूरी तरह स्पष्ट हो चुकी थी कि वह किस तरह का काम करती है और जब वह ये बातें कर ही रही थी, मैंने तय कर लिया कि अब किसी भी सूरत में इस महिला के साथ काम नहीं करना है! वह मेरे कार्य-शिविरों को यौन संबंधी तांत्रिक-शिविर की तरह बेचना चाहती थी, जब कि मैं सिर्फ ध्यान और योग के कार्यक्रम करता हूँ! इसके अलावा और भी बहुत सी ऊलजलूल बातें वह मेरे बारे में फैला सकती थी!

निर्णय तो ले लिया गया-मगर अब मैं करूँ क्या? इस बात को उसे कैसे समझाया जाए और अगर बात करने के बाद मैं वहाँ न रहना चाहूँ तो जाऊंगा कहाँ? मुझे परेशान करने वाले ये सवाल अंततः हल कैसे हुए, इसके बारे में मैं आपको अगले सप्ताह बताऊंगा!

जब आस्ट्रेलिया में एक पोल-डांसर ने सिर्फ मेरे लिए एक सेक्सी (अश्लील) डांस पेश किया- 18 अगस्त 13

मैंने आपको पिछले सप्ताह बताया था कि कैसे मैं आस्ट्रेलिया में एक आध्यात्मिक शिविर में पहुँच गया था, जहां मेरी आयोजक ने मुझे बताया कि जिस स्थान पर मुझे अगले हफ्ते अपनी कार्यशाला और व्यक्तिगत सत्र आयोजित करने हैं, वहाँ वह कई अश्लीलता से परिपूर्ण तंत्र-कार्यशालाएँ आयोजित करती रही है।

स्वाभाविक ही, जहां उसने मुझे अपने काम की विस्तृत जानकारी दी वहीं मुझसे यह भी पूछा कि सेक्स के प्रति मेरा रवैया और धारणा क्या है। मैं पहले ही समझ चुका था कि उसके मन में मेरे प्रति थोड़ी रुचि जाग्रत हो चुकी है। इस बात से मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ-तांत्रिक बातों में रुचि रखने वाले मेरे मित्रों ने मुझे बताया था कि बंधन-मुक्त यौन संबंध बनाने में तंत्र-ज्ञानी देर नहीं लगाते। मैं उसके बढ़ते कदमों पर विराम लगाना चाहता था, लिहाजा मैंने उससे कहा कि मैं सेक्स पसंद करता हूँ मगर वह हमेशा आपसी समझ और प्रेम पर आधारित होना चाहिए। लोगों की अपूरणीय अपेक्षाओं पर खरा न उतरने के अपने कटु अनुभवों के बारे में भी मैंने उसे बताया। मगर, तुरंत ही मुझे समझ में आ गया कि उसे अपने से दूर रखने के मेरे प्रयास बहुत सफल नहीं हुए हैं।

हमारी बातें जारी रहीं और फिर उसने अपनी जीवन-कथा सुनाना शुरू कर दिया। वह हमेशा से आस्ट्रेलिया में नहीं रहती है। उसने एक एलबम निकालकर दिखाया, जिसमें उसके 15 से 20 साल पहले के फोटो थे, जब वह यूरोप में रहा करती थी। फोटो से साफ ज़ाहिर होता था कि कौन सा काम करके वह पैसा कमाती थी: तब वह नाइट-क्लब में पोल-डांसर हुआ करती थी!

उसने अपने फोटो दिखाए, बताया कि यह उसका पेशा था और दूसरे पल ही वह कूदती-फाँदती, यह कहते हुए कमरे से बाहर निकल गई कि "मैं तुम्हें दिखाना चाहती हूँ!" मैं बुरी तरह भौंचक रह गया कि पता नहीं, इस घोषणा के बाद, आगे क्या होने वाला है।

दो मिनट बाद, वह कमरे में वापस आई, बहुत थोड़े से वस्त्र पहने हुए, जो चमकीले अंतःवस्त्रों जैसे लग रहे थे और सिर पर बड़ा-सा मुखौटा लगाए, जिसने उसके सिर का ऊपरी आधा हिस्सा छिपाया हुआ था। ये उसी तरह के वस्त्र थे, जो उसने उन चित्रों में पहन रखे थे और मैंने सोचा कि शायद उन्हें सेक्सी माना जाता है, लेकिन यहाँ सारा माहौल बडा बेतुका लग रहा था: मैं इस महिला से पहली बार मिल रहा था, ऐसे नृत्यों का मुझे कोई अनुभव भी नहीं था और उसने संगीत चला दिया था और उस बड़े-से हाल में मैं अकेला बैठा था, एक भूतपूर्व पोल-डांसर की व्यक्तिगत नृत्य-प्रस्तुति देखता हुआ, जब कि वह किसी भी लिहाज से मुझे यौनाकर्षक नहीं लग रही थी!

नाचने के लिए पोल उपलब्ध न होने के कारण एक कुर्सी और टेबल की सहायता लेते हुए उसने कुछ मिनट तक नृत्य किया। और इस बीच मैं यही सोचता रहा कि अब मुझे क्या करना चाहिए। स्वाभाविक ही, मुझे आकर्षित करने के उसके प्रयासों से मैं खुश नहीं हुआ तो वह बुरा मान जाएगी और उसके साथ मुझे पूरे हफ्ते कार्यक्रम का आयोजन करना है। दूसरी तरफ, मैं यह भी सोच रहा था कि अगर पता होता कि आम तौर पर वह किस तरह के कार्यक्रम आयोजित करती है तो मैं यहाँ आता ही नहीं! मैंने निर्णय किया कि शांत रहने की कोशिश करनी है और सावधानी के साथ, मित्र बने रहते हुए, इस स्थिति से बाहर निकलना है, भले ही हमारे कामों में कोई संगति नहीं है।

उसने अपनी नृत्य-प्रस्तुति पूरी की और मुझसे पूछा कि कैसा लगा। मैंने भरसक अवचनबद्ध मुस्कान के साथ छोटा-सा जवाब दिया कि, बढ़िया। फिर मैंने एक लंबी जंभाई ली और उससे कहा कि अब मुझे सोने जाना चाहिए क्योंकि कल के कार्यक्रम के लिए, जिसमें व्यक्तिगत-सत्रों के अलावा ध्यान-योग का कार्यक्रम भी है, मुझे तरोताजा बने रहना होगा।

मैं सोच रहा था कि मैंने परिस्थिति को और बिगड़ने से बचा लिया है। मैं कितना गलत सोच रहा था, इसके बारे में आप अगले सप्ताह, रविवार के दिन पढ़ सकेंगे।

आस्ट्रेलिया में जब मैं तंत्र के पश्चिमी अर्थ ‘सेक्स’ में उलझ गया – 11 अगस्त 2013

यूरोप की अपनी लंबी यात्राओं के बाद कुछ दिन घर में आराम करके 2005 के अंत में मैं एक और यात्रा पर निकल पड़ा। इस बार धरती के दूसरे छोर की तरफ, आस्ट्रेलिया। मज़ेदार बात यह हुई कि धरती के दूसरे हिस्से की अपनी पिछली यात्रा की तरह इस बार भी मुझे फिर वही अनुभव हुआ और मैंने फिर यौन भावनाओं को लेकर अपने आपको बहुत बुद्धू (अनुभवहीन) महसूस किया। …चलिये, मैं आपको पूरा किस्सा शुरू से सुनाता हूँ।

एक बार ईमेल द्वारा मुझे आस्ट्रेलिया आने का एक निमंत्रण प्राप्त हुआ। एक महिला ने मुझे बताया कि उसका एक केंद्र है जो आध्यात्मिक कार्यों के लिए समर्पित है और जहां वह चाहती है कि मैं भी योग की कुछ कार्यशालाएँ आयोजित करूँ। एक नया संपर्क होने की संभावना को देखते हुए मैं बड़ा खुश हुआ। यह भी मेरे लिए खुशी की बात थी कि इतने सारे गुरुओं की ऑनलाइन सेवाओं की भीड़ में उसकी नज़र मुझ पर पड़ गई थी और उसने मुझे बुलाया था। मैंने तुरंत उसका निमंत्रण स्वीकार कर लिया और साल के अंत की कुछ तारीखें पक्की कर लीं।

मैं सिडनी पहुंचा तो वह महिला मुझे लेने एयरपोर्ट आई और मुझे सीधे अपने ‘केंद्र’ ले गई। उसने बताया कि उसका केंद्र घर के रूप में विकसित नहीं किया गया है मगर किसी तरह उसने अपने रहने की व्यवस्था वहीं कर रखी है। वहाँ बाथरूम और संडास तो था, लेकिन कोई रसोईघर नहीं था। उसने मुझे यह कह कर समझाने की कोशिश की कि इंश्योरेंस की शर्तों के अनुसार यहाँ खाना बनाना संभव नहीं होगा और हमें बाहर ही कहीं खाने का इंतज़ाम करना होगा। यह सब मेरे लिए बहुत अनोखा था और मैं उसके व्यवहार और उस जगह को लेकर सोच में पड़ गया।

अपने जीवन में मैंने कई आश्चर्यजनक स्थानों की यात्राएं की हैं और मैंने अपने इस अनुभव को भी सहजता के साथ, एक और अनुभव की तरह, स्वीकार कर लिया और सोचा कि "आगे-आगे देखिए, होता है क्या"! उस महिला ने पूरे सप्ताह का कार्यक्रम तैयार कर रखा था, जो दूसरे दिन सबेरे से ही शुरू हो जाने वाला था। हमने वह दिन एक दूसरे को समझने में बिताया और जब मैंने अपने और अपने जीवन के अनुभवों के बारे में उसे बताया तो वह मुझे अपने बारे में और अपने केंद्र और अपने काम के बारे में बताने लगी और अचानक, तुरंत ही मुझे लगा कि यहाँ नहीं आना चाहिए था और यह जगह मेरे लिए ठीक नहीं है।

उसने बताया कि उसने पूर्वी भारत के किन्हीं तांत्रिक गुरु से यह विद्या सीखी है और यहाँ कुछ समय से "तंत्र विद्या" पर काम करती रही है। यूरोप के अनुभव से मुझे मालूम है कि जब कोई विदेशी ‘तंत्र’ कहता है तो आम तौर पर उसका मतलब यौन क्रियाओं से ही होता है। जब उसने पावर-पॉइंट प्रस्तुतीकरण की सहायता से अपने कार्यक्रमों के बारे में बताना शुरू किया तो मेरा वह अनुभव और पुष्ट हो गया। वह पूरी तरह यौन और लैंगिक सामाग्री से परिपूर्ण था। उसमें एक दूसरे को उत्तेजित करने के तरीकों को चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया था और साथ में इस विषय पर कई महीन जानकारियाँ और अधिक से अधिक आनंद प्राप्त करने के और चरम पर पहुँचने के तरीके बताए गए थे। और भी बहुत कुछ था और सब कुछ सेक्स पर ही केन्द्रित था। नए, आध्यात्मिक तरीके से, मगर पूरी तरह सेक्स पर केन्द्रित।

फिर उसने मुझे बताया कि अपने बड़े से हाल में वह इस विषय पर कार्यशालाएँ आयोजित करती है और कमरे किराये पर भी देती है जहां वह "तांत्रिक मालिश" और कई "विशेष मसाजों" की सुविधा प्रदान करती है जो "तांत्रिक ऊर्जा" का संचार करते हैं।

मैं आश्चर्य में पड़ गया। मुझे वहाँ आने का अफसोस हो रहा था मगर मैंने उसे प्रदर्शित नहीं होने दिया। अपने कमरे में आकर मैं सोचता रहा कि उसके न्योते पर जो भी मेरी कार्यशाला में आएगा या मेरे व्यक्तिगत सत्रों में शामिल होगा वह ऐसी अपेक्षा करेगा जिन्हें पूरा करना मेरे लिए संभव नहीं होगा। न ही उन्हें पूरा करने में मेरी कोई रुचि होगी!

आगे जो कुछ हुआ वह सब किसी विचित्र हास्य कथा की तरह है, मगर वह कहानी अगले रविवार को!