जब महिलाएँ अपने पति के विवाहेतर संबंधों को स्वीकार कर लेती है – 7 दिसंबर 2015

जब मैं जर्मनी में था, कुछ मित्र अपने मित्रों की कहानियाँ सुना रहे थे। उनमें से एक कहानी ने मुझे वैसी ही स्थितियों का सामना करने को मजबूर बहुत सी भारतीय महिलाओं के विषय में सोचने को विवश कर दिया। मैंने सोचा, आखिर दोनों में कोई ज़्यादा अंतर नहीं है: वैवाहिक संबंधों में कुछ महिलाएँ अपने पतियों के विवाहेतर संबंधों को बड़ी सहजता के साथ स्वीकार कर लेती हैं-सुविधाजनक होने के कारण या फिर डर के मारे!

एक दोस्त ने मुझे बताया, एक महिला, जिसे वह बीस साल से भी ज़्यादा समय से जानता है, अपने पति के साथ काफी समय से अत्यंत असामान्य परिस्थितियों में रह रही है: उसका पति हफ्ते में लगभग एक बार उससे मिलने घर आता है। बाकी समय वह अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रहता है। जब वह घर आता है तो सब कुछ ऐसा होता है जैसे वे दोनों सामान्य विवाहित पति-पत्नी हों: वह अपने गंदे कपड़े लेकर आता है और वह उन्हें धोती है, उस रोज़ वह एक अतिरिक्त व्यक्ति के लिए खाना बनाती है और इस तरह वह एक सामान्य काम पर से घर लौटा हुआ पति होता है!

लेकिन वे एक साथ नहीं सोते-और कहानी के इसी बिंदु पर मुझे पूछना ही पड़ा: क्या पहले शुरू हुआ, अलग-अलग बिस्तरों पर सोना या गर्लफ्रेंड के साथ रहना? अलग-अलग बिस्तरों सोना पहले शुरू हुआ था! एक बार महिला ने अपने पति से कहा था कि वह भविष्य में उसके साथ यौन संबंध नहीं रखना चाहती। वह उसके साथ सोना नहीं चाहती थी और उसने पति के सामने यह विकल्प भी रखा कि यदि वह चाहे तो कहीं और जाकर अपनी यौन ज़रूरतें पूरी कर सकता है।

बहुत से कारण थे कि वे अलग नहीं हुए और मुख्य रूप से सिर्फ इसलिए कि यह बहुत आसान और सुविधाजनक था: वे अपने टैक्स और बैंक खाते एक रखे हुए थे, जिस तरह वह हमेशा से रहती आई थी, अब भी रह सकती थी और पति को उसकी स्वतंत्रता भी उपलब्ध हो गई। उनके संबंध अच्छे हैं, यानी बाकी सब कुछ ठीक है।

मेरे मन में तुरंत उन परिवारों का खयाल आया, जिनसे मिलने रमोना अक्सर उनके घर जाती रहती है-हमारे स्कूली बच्चों के घर, जहाँ अक्सर महिलाएँ ढोंग करती हैं, जैसे वे एक सामान्य, सुखी दाम्पत्य संबंध में बंधी हुई हैं जबकि वास्तव में उनके पति ज़ोर-शोर से विवाहेतर संबधों में मुब्तिला होते हैं। एक नज़र में ही यह स्पष्ट हो जाता है कि पति और पत्नी के बीच बेगानापन व्याप्त है और उनके बीच आन्तरिक संबंधो का लोप हो चुका है-लेकिन वे विवाह का भ्रम बनाए रखती हैं। दंपति के रूप में साथ जीवन बिताने का ढोंग, क्योंकि संबंध विच्छेद की तुलना में यह आसान और सुविधाजनक है और एक ऐसे समाज में जहाँ एकाकी महिला पर लोगों का कहर टूट पड़ता हो, निश्चित ही तलाकशुदा कहलाने से बहुत बेहतर!

मुझे समानताएँ नज़र आती हैं। मुझे लगता है, कुल मिलाकर दोनों स्थानों पर स्थिति एक जैसी है। इसी तरह चलाना अधिक सुविधाजनक है। साथ ही मैं यह फैसला नहीं दे रहा हूँ कि यह ठीक है या गलत है या कि यह एक देश के संदर्भ में सही और दूसरे की परिस्थितियों में गलत है! मैं सिर्फ यह कह रहा हूँ कि मैंने दोनों में ये समानताएँ पाईं और उन्हें आपके सामने रख रहा हूँ।

भरोसा करना अच्छी बात है – मगर अपने शक पर भी भरोसा करें – 16 नवंबर 2015

अक्सर मैं लोगों से कहता हूँ कि उन्हें दूसरों पर भरोसा करने की क्षमता बढ़ानी चाहिए। लोगों से मिलते समय शुरू से उनके प्रति नकारात्मक रवैया रखना ठीक नहीं। लेकिन कुछ परिस्थितियों में समुचित जाँच किए बगैर कि सामने वाला झूठा इंसान या फ्रॉड तो नहीं, भरोसा नहीं करना चाहिए। अधिकतर मामलों में ऐसी स्थिति पैसों के संबंध में पेश आती है। अगर आपके सामने ऐसी परिस्थितियाँ आती रहती हैं, जहाँ आपको सामने वाले पर शक होता है कि वह भला व्यक्ति है या चालबाज़ (फ्रॉड) तो आज का ब्लॉग पढ़ना आपके लिए उपयोगी होगा।

सर्वप्रथम, इस बात का ध्यान रखें कि सामने वाले के पहनावे, चाल-ढाल और रहन-सहन से कतई प्रभावित न हों। हो सकता है कि वह बड़ी सी कार में घूमता-फिरता हो, डिज़ाइनर कपड़े पहनता हो और नवीनतम आईफोन लेकर चलता हो-लेकिन ये बातें उसे ईमानदार या भला व्यक्ति सिद्ध नहीं करतीं! कोई व्यक्ति जितना बड़ा चालबाज़ (फ्रॉड) होगा उतना ही उसका पहनावा, एक्सेसरीज़ और रहन-सहन भड़कीला होगा। पहुँचे हुए चालबाज़, छलछद्मी और धोखेबाज़ लोग प्रभावित करने वाले हर तरह के औज़ारों से लैस होते हैं और अक्सर यह सिद्ध करने में कामयाब हो जाते हैं कि वे वास्तव में बड़े भले और सत्यनिष्ठ व्यक्ति हैं।

दूसरा बिंदु है: झूठे और बेईमान लोग लगभग हमेशा ज़्यादा बोलते हैं। और इसी एक बात से आप अक्सर समझ सकते हैं कि वे और कुछ भी हो सकते हैं मगर ईमानदार नहीं! सिर्फ उस व्यक्ति की बातें ध्यान से सुनें: अगर झूठा इंसान होगा तो वह दो मिनट पहले कही अपनी ही बात भूल चुका होगा। बस वह लगातार बात करता रहेगा और अपनी ही पिछली बात का खंडन करती हुई बात कहेगा-ज़ाहिर है, बार-बार आपसे कोई न कोई झूठी बात कह रहा होगा। आदतन झूठ बोलने वालों को इस बात का एहसास ही नहीं होता कि अभी-अभी वे क्या कह चुके हैं क्योंकि वे इतना अधिक झूठ बोलते हैं कि वे अपने सारे झूठे वचनों को याद ही नहीं रख सकते। इसलिए अगर आप कुछ देर शान्त बैठे रहें तो उसी वक़्त आपको पता चल जाएगा कि वह झूठ बोल रहा है।

अंत में, इन बातों का यह अर्थ नहीं है कि आप जिस मामले में चर्चा कर रहे हैं, अनिवार्य रूप से उस मामले में भी वह चालबाज़ी कर रहा हो। लेकिन अब हम उस बिंदु पर बात करते हैं, जहाँ मामला पैसे से संबंधित होता है: उस व्यक्ति पर कतई भरोसा न करें, जो कहे- 'तुम मुझ पर भरोसा कर सकते हो, मुझे पैसे दे दो'। उसके बाद अगर आप साफ़ शब्दों में यह कह दें कि आप उसे नहीं जानते और इसलिए उस पर भरोसा नहीं कर सकते तो जवाब में वह कह सकता है, 'अगर आप मुझ पर भरोसा नहीं कर सकते तो हम साथ में काम नहीं कर सकते!' बस, इसी बिंदु पर वह धोखेबाज़ रफूचक्कर हो जाएगा।

इससे हमें यह शिक्षा मिलती है: कभी-कभी शक सही निकलते हैं। अगर आपके मन में किसी व्यक्ति के प्रति किसी प्रकार का शकोशुबहा है तो उसे व्यक्त करने में कतई संकोच न करें! अगर वह गंभीर है, ईमानदार है तो हर तरह के प्रयास करके अपनी नेकनीयती सिद्ध करेगा और अंततः आपका विश्वास हासिल कर लेगा। सिर्फ चालबाज़ और मक्कार ही भाग जाएँगे!

पूरी ईमानदारी के साथ बेईमानी – भारत में टूर-गाइडों का कमीशन व्यापार – 21 जुलाई 2015

कल मैंने आपको हमारे यहाँ से काम पाने की आशा से आए एक सरकारी मान्यता प्राप्त टूर गाइड के साक्षात्कार के बारे में बताया था। उसका कहना था कि लोग उसे जबरदस्ती पैसे दे देते हैं तो मजबूरी में लेना पड़ता है। मैंने आपसे कहा था कि आम तौर पर टूर गाइड, सीधे तौर पर या घुमा-फिराकर पैसों की उम्मीद रखते ही हैं। आज मैं जो उदाहरण आपके सामने रखूँगा, उससे आपके सम्मुख स्पष्ट हो जाएगा कि कैसे यह आदमी भी कोई अलग बात नहीं कह रहा था- बल्कि उसे लग रहा था कि वह हम पर कोई एहसान कर रहा है।

‘टिप’ (बख्शीष) पर उस आदमी के इस रवैये से मैं यह जान गया कि यह आदमी हम लोगों के लिए किसी काम का नहीं है। उसने आगे जो कहा, उससे मेरा यह शक सही सिद्ध हो गया:

‘फिक्र न करें, आप ब्राह्मण हैं, मैं ब्राह्मण हूँ, इसलिए मैं आपके साथ काम करने के लिए तैयार हूँ। मैं इन लोगों को बाज़ार की सैर कराऊँगा और कमीशन का हिस्सा नियमित रूप से लाकर आपको देता रहूँगा। हम लोग ब्राह्मण हैं, मै ईमानदारी से कमीशन का आपका हिस्सा आप तक पहुँचाता रहूँगा!”

अरे भाई, मुझे पता है कि भ्रष्टाचार के सभी कार्य पूरी ईमानदारी से किए जाते हैं! उसी तरह यह आदमी भी ईमानदारों का सरताज नज़र आ रहा था! वह पूरी ईमानदारी के साथ हमारे मेहमानों को ताजमहल के बिल्कुल आसपास स्थित अत्यधिक महँगी दुकानों पर ले कर जाएगा, उनको विश्वास दिलाएगा कि इन दुकानों द्वारा बेची जा रही घटिया वस्तुएँ सबसे अच्छी हैं, वैसी यादगार-निशानियाँ आगरा में कहीं और नहीं मिल सकतीं और उनसे उन दुकानदारों को दस गुना कीमत दिलवाएगा! पूरी ईमानदारी से वह दुकानदार से अपना कमीशन लेगा, हमारा हिस्सा अलग निकालकर बाकी अपनी जेब के हवाले करेगा!

इस प्रकार बहुत से लोग इन परिस्थितियों का लाभ उठाते हुए काफी पैसा कमा लेते हैं, लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। हम ऐसे आदमी के साथ अपने मेहमानों को कैसे भेज सकते हैं?

बिदा लेने से पहले उस आदमी ने कहा: “यह अच्छा होगा कि एक ब्राह्मण दूसरे ब्राह्मण की मदद करे। मैं आपकी मदद करूँ, आप मेरी!”

मेरा मित्र इस आदमी को हमसे मिलवाने लाया था और मेरी बगल में बैठा था। सिर्फ यही कारण था कि मैंने अपने आपको यह कहने से रोक लिया: “आपको गलत जानकारी प्राप्त हुई है, मैं तो अछूत या निम्न जाति से हूँ! और अब आपने मेरे घर में पानी भी पी लिया है और चाय भी।”

मैं अपने मित्र को किसी असुविधाजनक स्थिति से दूर रखना चाहता था इसलिए मैंने इस तरह की कोई बात नहीं की। लेकिन मैंने फोन पर उससे साफ कह दिया कि ऐसे व्यक्ति की हमें ज़रूरत नहीं है। इसलिए जब तक हमें कोई ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिल जाता, जिस पर हम वाकई पूरा भरोसा कर सकें, तब तक हमारे मेहमानों की सभी यात्राओं में यशेंदु या पूर्णेन्दु ही साथ जाते रहेंगे!

क्या आध्यात्मिकता (धार्मिकता) का अर्थ यह है कि आप दगाबाजी करें फिर अपने आप को माफ़ भी कर दें? 15 जुलाई 2015

कुछ सप्ताह पहले यहाँ आश्रम के एक मेहमान के साथ मैंने एक व्यक्तिगत सलाह सत्र किया था। वह शारीरिक विश्रांति और मानसिक स्पष्टता हेतु भारत आया था और इसलिए उसने हमारे आयुर्वेद योग अवकाश कार्यक्रम की बुकिंग की थी। कार्यक्रम के अंतर्गत वह योग कक्षाओं में शामिल हुआ और आयुर्वेदिक मालिश और चिकित्सा प्राप्त की। इससे बढ़कर, उसने मुझसे बात करने की इच्छा भी प्रकट की। वास्तव में वह महज अपनी निजी गुप्त बातों और उनके चलते उसके मस्तिष्क में व्याप्त जटिलताओं को सुलझाने के उद्देश्य से सारी बातचीत करना चाहता था।

उस व्यक्ति ने अपने संबंध के बारे में मुझे बताया। वह आठ साल से एक महिला के साथ संबंध रखे हुए थे। वे एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे और एक दूसरे की भावनाओं का खयाल रखते थे लेकिन कभी विवाह करने का विचार उनके मन में नहीं आया। वे जिस तरह रहा करते थे, उसी में खुश थे और उन्हें एक दूसरे के होने के बारे में किसी आधिकारिक प्रमाणपत्र की ज़रूरत नहीं थी। पिछले तीन साल से वे एक साथ, एक छत के नीचे रह भी रहे थे।

बोलते-बोलते इसी क्षण वह थोड़ा हिचकिचाया फिर कहा, "लेकिन मैं कभी भी उसके प्रति वफ़ादार नहीं रहा था।" वह काफी समय से अपने साथी के साथ धोखेबाज़ी कर रहा था और कई दूसरी महिलाओं के साथ यौन संबंध रखे हुआ था। ये सभी संबंध उन महिलाओं से होते थे, जिनसे वह कुछ समय पहले ही मिला होता था, फिर उनके बीच एक रात का संबंध बन जाया करता था और बाद में कभी उनकी मुलाक़ात नहीं होती थी। संयोग से, एक महिला ऐसी भी थी जो दोनों की साझा मित्र थी।

अपने सलाह सत्रों में अब तक मैं बहुत से लोगों से बातचीत कर चुका हूँ और यह विषय मेरे लिए कतई नया नहीं था। इसलिए जब यह व्यक्ति चुप हुआ और उसने बड़ी आशा से मेरी तरफ आँख उठाकर देखा तो मैंने उसे वही सलाह दी, जो अक्सर इन मसलों पर देता आया हूँ: सच का दामन न छोड़ें! अगर आप किसी और से प्रेम करते हैं तो उसे अपने साथी से कहें। अगर आप यह बात छिपाते हैं तो यह भेद जहर बनकर धीरे-धीरे न सिर्फ आपके संबंधों को दूषित करेगा बल्कि आपके दिमाग को भी करेगा। समय आएगा, जब आप अपने आपको इतना बुरा समझने लगेंगे कि अपना भेद छिपा नहीं पाएँगे। अभी भी मौका है, अगर आप ईमानदारी से सारी बातें खुलकर उसे बता दें और माफी माँग लें तो संभव है, वह आपको क्षमा कर दे।

लेकिन मेरी सलाह पर उसकी प्रतिक्रिया पर मैं स्तब्ध रह गया: "ओह, मैं अपने आपको गुनहगार नहीं समझता! मैं उस तरह का आदमी नहीं हूँ। मैं अपने आपको माफ कर सकता हूँ! लेकिन मुझे डर है कि वह इतना घबरा जाएगी कि अवसादग्रस्त हो सकती है! जिस घर में हम रह रहे हैं, वह उसी का है- वह मुझे निकाल बाहर करेगी…पता नहीं, इस शहर में मैं अपना घर ले पाऊँगा या नहीं!"

चलिए, सच तो सामने आया: आध्यात्मिक रूप से यह आदमी इतना पहुँचा हुआ है कि एक महिला के साथ दगाबाज़ी करके खुद अपने आपको माफ कर सकता है और ऊपर से यह दावा भी कर सकता है कि वह उस महिला से प्रेम करता है! इससे ज़्यादा क्या स्पष्ट होना था! फिर, वह उस महिला के साथ उसके घर में रहने में अपना फायदा भी स्पष्ट देख रहा है… अब उसके दिमाग का एक भ्रम मुझे दूर करना था: अगर आप ऐसा कुछ करते हैं, जिससे आपके साथी को नुकसान पहुँचे और फिर उस बात को उससे छिपाते भी हैं तो स्पष्ट है कि आप उससे प्रेम नहीं करते बल्कि सिर्फ उसके प्रेम का लाभ उठाना चाहते हैं!

आईने की तरह साफ – क्या ख़याल है आपका?

जब पत्नी के साथ धोखेबाज़ी किसी परिवार को बेघर कर आर्थिक मुसीबतों में फँसा देती है – हमारे स्कूल के बच्चे – 17 अप्रैल 2015

आज मैं आपका परिचय हमारे आश्रम के एक भूतपूर्व कर्मचारी और उसकी बेटी से करवाना चाहता हूँ, जो शुरू से ही हमारे स्कूल में पढ़ रही है। वास्तव में इस परिवार के छह में से चार बच्चे हमारे स्कूल में ही पढ़ते थे और हम भी कई वर्षों तक इस परिवार की सहायता करते रहे थे। लड़की का नाम रुचि है और वह 17 साल की है।

उसकी माँ, ममता तब से हमारे घर की साफ-सफाई और माँ के कामों में मदद करती रही है जब हमारे माता-पिता वृन्दावन के अपने पुराने मकान में रह रहे थे। शायद वह 2003 से हमारे आश्रम में काम करने आ गई थी। वह परिवार सहित आश्रम में आकर रहने लगी और दस साल से यहाँ आने वाले हमारे बहुत से मेहमानों को उसका स्मरण होगा कि वह गाना गाते हुए आश्रम की साफ-सफाई किया करती थी। दुर्भाग्य से पिछले कुछ सालों से उसकी तबीयत खराब रहने लगी। उसके पैरों में सूजन हो जाती थी और शरीर के बहुत से हिस्सों में पानी भर जाता था। इसके अलावा उसका वज़न भी काफी बढ़ गया और साँस की तकलीफ भी रहने लगी। उसे और भी कई बीमारियाँ थीं और कुल मिलाकर यह कि उसके लिए आश्रम में काम करना संभव नहीं रह गया था। अंततः उसने काम छोड़ दिया, हालांकि बच्चों की देखभाल और पढ़ाई हमारे आश्रम में जारी रही।

लेकिन ममता से मिल चुके हमारे अधिकांश मेहमान यह नहीं जानते होंगे कि वह छह बच्चों की माँ और पाँच बच्चों की नानी है! उसकी सबसे बड़ी लड़की 25 साल की है और दूसरी 23 साल की। दोनों का विवाह हो चुका है और बच्चे भी हैं। उसके बाद एक 19 साल का लड़का है, जो कई साल हमारे आश्रम में रह चुका है और अब दिल्ली में बिजली का काम सीख रहा है। उसके बाद क्रमशः 14 और 15 साल के राहुल और अमन हैं, जो हमारे स्कूल में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद अब उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं।

और 17 साल की रुचि भी किसी से कम नहीं। आपको आश्चर्य होगा कि अपने भाइयों से बड़ी होने के बावजूद वह अब भी 6ठी कक्षा में ही क्यों है, जबकि उसके दोनों भाई 8वीं पास करके निकल चुके हैं। इसका कारण यह है कि शुरू में तीनों ने एक साथ पढ़ाई शुरू की थी मगर बाद में उनके माता-पिता लड़कों को तो स्कूल भेजते रहे मगर लड़की को स्कूल भेजने में कोताही बरतने लगे! इसलिए अक्सर रुचि कक्षा में अनुपस्थित रहने लगी और परीक्षा पास न कर पाने के कारण उसे कई बार एक ही कक्षा में पढ़ाई करनी पड़ी।

लेकिन अब रुचि ने फिर रफ्तार पकड़ ली है और खुद ही पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू कर दिया है, जिसके कारण अब उसके परीक्षा के नतीजे भी अच्छे आ रहे हैं! लेकिन उनके घर में संकट की स्थिति बनी हुई है।

कई सालों तक परिवार की सबसे बड़ी समस्या यह थी कि पिता जुआ खेलता था। स्वाभाविक ही, वह रोज़ पैसे हारकर घर आता था, सिर्फ अपनी कमाई के पैसे ही नहीं बल्कि पत्नी के भी और इसलिए परिवार के लिए घर चलाना मुश्किल हो जाता था! लेकिन अब समस्या और दुरूह हो गई थी!

पिता कई वर्षों से हमारे आश्रम के सामने वाले आश्रम में रसोइए का काम किया करता था। लेकिन अब नहीं-क्योंकि कई महिला कर्मचारियों और, यहाँ तक कि आश्रम के ग्राहकों से भी उसके सेक्स सम्बन्ध थे। बच्चों सहित उसकी पत्नी भी, पैसे लेकर नहीं बल्कि गुरु की सेवा के लिए, अक्सर आश्रम आती-जाती रहती थी। स्वाभाविक ही उसे अपने पति के सेक्स संबंधों की भनक लग गई-और उसकी इस धोखेबाज़ी पर वह बिफर उठी और आश्रम में अच्छा-ख़ासा हंगामा बरपा हो गया। उसने उससे आश्रम की नौकरी छोड़ने के लिए कहा और जवाब में पति ने उसकी पिटाई कर दी। अंततः उसके आश्रम मालिकों ने उसे नौकरी से निकाल बाहर किया और पत्नी को भी आश्रम से बाहर का रास्ता दिखाया।

वे आश्रम द्वारा प्रदत्त एक कमरे में रहा करते थे, जिसे, स्वाभाविक ही, उन्हें छोड़ना पड़ा। फिर उन्होंने पास ही दो कमरों का एक घर किराए पर लिया-लेकिन उसका किराया, 4000 रुपए यानी लगभग 65 डॉलर प्रति माह उन्हें अदा करना पड़ता है, जबकि अब परिवार की नियमित आय का कोई जरिया नहीं रह गया है! पिता, जहाँ भी खाना पकाने का कोई काम मिलता है, चला जाता है, जिससे उसे कुछ पैसे मिल जाते हैं। परन्तु वो इतना बेहया है कि कहता है कि वो जहाँ भी जायेगा उसे औरतों की कोई कमी नहीं!

परिवार के लिए यह बहुत मुश्किल समय है और उसके परिवार वाले चाहते होंगे कि वह स्कूल छोड़कर कोई काम पकड़ ले मगर हम चाहते हैं कि रुचि की पढ़ाई न छूटे। हम परिवार के साथ संपर्क बनाए रखेंगे और जब तक वह पढ़ना चाहे, उसकी पढ़ाई में हर सम्भव मदद करते रहेंगे।

अगर आप रुचि जैसे बच्चों की मदद करना चाहें तो हम आपके आर्थिक सहयोग का स्वागत करेंगे-किसी एक बच्चे या बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करके भी आप हमारे इस सेवाकार्य में सहभागी बन सकते हैं!

किशोरवय उम्र में पैसे की खातिर सेक्स? कृपया अपने आसपास के माहौल पर नज़र डालिए! 9 अप्रैल 2015

मैं पिछले दिनों से अपने जोड़ीदारों के साथ धोखा करने वालों पर लिखता रहा हूँ और कई सत्य कथाएं भी सुनाई हैं। मैंने ज़िक्र किया था कि भारत की अरेंज्ड मैरेज (प्रायोजित विवाहों) की परंपरा में क्या-क्या होता है और यहाँ सेक्स को लेकर समाज में व्याप्त वर्जनाओं पर भी बात की थी। स्वाभाविक ही, इन्हीं कारणों से ये कहानियाँ इतनी मज़ेदार लगती हैं-लेकिन उसका सारा हास्य तब समाप्त हो जाता है जब इस दमन का एक अन्य नतीजा भी सामने आता है: जब किशोर लड़कियाँ यौन संबंध बनाना शुरू कर देती हैं, क्योंकि उन्हें पैसा कमाने का यह आसान जरिया नज़र आता है।

दुर्भाग्य से ऐसा वास्तव में होता है और जब कि हम इस विषय में अक्सर सुनते रहते हैं, इस तथ्य को खुलेआम स्वीकार करने वाला कोई नहीं होता। लोग हमेशा किसी अनुपस्थित व्यक्ति के बारे में बात करते हैं लेकिन सीधी बात हमेशा सिर हिलाने तक ही पहुँच पाती है। निश्चय ही यह एक प्रकार की वेश्यावृत्ति ही है और सभी जानते और मानते हैं कि यह उचित नहीं है। फिर भी यह होता रहता है और महज अपवाद स्वरूप नहीं बल्कि व्यापक रूप से हो रहा है।

ये लड़कियाँ उन घरों से आती हैं, जिनके यहाँ पैसे की तंगी तो होती है लेकिन जो वास्तव में बहुत गरीब भी नहीं होते। उदाहरण के लिए, वे समाज के निम्न-मध्यवर्ग से आती हैं या उच्च-निम्नवर्ग से। मैं समाज के उस वर्ग की बात नहीं कर रहा हूँ, जिन्हें पेट भरने के लिए कैसे भी, कहीं से भी पैसे कमाने की मजबूरी होती है। नहीं, मैं उन लड़कियों की बात कर रहा हूँ, जो खुद यह तय करती हैं कि वे किसके साथ पैसे लेकर यौन संबंध कायम करेंगी, इसलिए नहीं कि इसके सिवा उनके पास कोई चारा नहीं है बल्कि सिर्फ इसलिए कि ऐसा करने पर उनके पास सामान्य से अधिक पैसा होगा!

अगर आप मुझसे पूछेंगे कि ये लड़कियाँ इस रास्ते पर कैसे पड़ जाती हैं, इस तरह की वेश्यावृत्ति का कारण क्या है तो मैं पूरे विश्वास के साथ सिर्फ एक बात कहूँगा: घर का माहौल! मेरे विचार में बच्चों की परवरिश और उनकी शिक्षा-दीक्षा वह सबसे महत्वपूर्ण चरण हैं, जो तय करते हैं कि किशोरावस्था और वयस्क जीवन में बच्चे कौन सी राह पकड़ेंगे।

मुझे यह भी लगता है कि बच्चे वही करते हैं जो वे देखते हैं और जब उनकी जानकारी में यह आता है कि उनके माता-पिता के भी कई सेक्स पार्टनर्स हैं तो वे सोचते हैं कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है! वे पुरुषों या स्त्रियॉं को आता-जाता देखते हैं। अगर वे यह देखें कि उनके माता-पिता परस्पर प्रेम में आबद्ध हैं तो वे भी अपने लिए वैसा ही पसंद करेंगे!

और अगर घर में पहले ही एक या दोनों अपने यौन संबंधों को छिपा रहे हैं तो तीसरे के लिए वही कर पाना कठिन नहीं है! जिस दंपति के बारे में मैंने आपको पहले बताया था, उनकी बेटी का प्रकरण इसी श्रेणी में आता है।

इसके अलावा माहौल और आसपास के लोग भी इस तरह के व्यवहार को प्रोत्साहित करने वाले ही होते हैं! एक तेरह साल की लड़की पैसे की कीमत जानती है और दुर्भाग्य से दिमाग भी ऐसा होता है कि आसानी से बरगलाया जा सके। उसके पास अधिक पैसे नहीं होते और स्वाभाविक ही, अगर मिल जाएँ तो उसे खुशी ही होगी-तो फिर जैसा उसकी माँ और उसके पिता करते हैं, वैसा ही वह भी क्यों न करे? इससे वह खुद भी कुछ कमा-धमा लेगी!

फिर हर प्रकार की यौन बातों के प्रति किशोर बच्चों का स्वाभाविक आकर्षण तो होता ही है! उनके शरीर का विकास हो रहा होता है, उनकी भावनाएँ, हसरतें और तमन्नाएँ परवान चढ़ रही होती हैं! यह प्राकृतिक है और इसके लिए आप उन्हें दोषी नहीं ठहरा सकते! कोई उन्हें इस विषय में कुछ बताए-समझाए, इसके पहले ही आसपास का माहौल उन्हें भ्रमित कर देता है क्योंकि इस समाज में जहाँ एक तरफ सेक्स पर बात करना भी वर्जित है, वहीं दूसरी तरफ वे देखते हैं कि हाथ में पैसे लिए बहुत से पुरुष उसके सामने कतार लगाए खड़े हैं!

अभिभावकों की चौकसी और देखरेख में कमी का ही मिला-जुला परिणाम हम अक्सर देखते हैं: कम उम्र लडकियाँ जिनके पास न जाने कहाँ से पैसे आ जाते हैं और समय-समय पर वे हर उम्र के लोगों के साथ दिखाई देती हैं।

तो प्रिय अभिभावकों, कृपा करके इस बारे में सोचिए कि आप क्या कर रहे हैं! न सिर्फ आप अपने और अपने साथी के साथ गलत कर रहे हैं बल्कि अपनी अगली नस्लों के साथ भी कर रहे हैं!

आश्रम में सेक्स और धोखा – 7 अप्रैल 2015

थॉमस, आयरिस और मैं कल यानी 6 अप्रैल के ब्लॉग के बारे में बातें कर रहे थे, जिसमें महिलाओं और पुरुषों द्वारा अपने जीवनसाथी के साथ धोखा किए जाने का ज़िक्र था। बातों-बातों में हमें अपने दो भूतपूर्व कर्मचारियों और धोखेबाज़ी के उनके किस्से का स्मरण हो आया-उस समय का जब वे यहाँ आश्रम में नौकरी कर रहे थे!

किसी की अनुशंसा पर हमने आश्रम में एक रसोइये को काम पर रखा था और जब यह घटना घटी थी तब उसे हमारे यहाँ काम करते हुए सिर्फ तीन या चार हफ्ते ही हुए थे। रसोई में काम करने वाले कुल जमा चार लोग थे: एक रसोइया और तीन उसके सहायक। सहायकों में एक महिला भी थी, जो पहले अपने पति के साथ हमारे यहाँ काम किया करती थी। उस बार उन्हें हमारी नौकरी छोड़नी पड़ी थी क्योंकि पति बहुत ईर्ष्यालु और शक्की था और सोचता था कि हमारे सारे कर्मचारी उसकी पत्नी के साथ यौन संबंध स्थापित करना चाहते हैं। एक बार वह हमारे ड्राइवर के साथ हाथापाई भी कर चुका था! एक साल बाद जब वह महिला हमारे पास काम मांगने आई तो हमने उसे इस शर्त पर रख लिया था कि वह अपने पति को आश्रम आने नहीं देगी-क्योंकि हम आश्रम में लड़ाई- झगड़ा नहीं चाहते थे!

जो हमारी नज़रों से ओझल रह गया, वह था हमारी ही रसोई में परवान चढ़ता एक अनैतिक संबंध! दूसरे कर्मचारियों के बीच उन दोनों को लेकर फुसफुसाहटें और कानाफूसियाँ शुरू हो गईं: वह रसोइया और उसकी सहायक! खैर, हमने सोचा, यहाँ सभी वयस्क हैं और दो वयस्कों के व्यक्तिगत मामले में हम कौन होते हैं दखल देने वाले! फिर यह किसे पता कि जो बातें हवा में तैर रही हैं, उनमें कोई तथ्य भी है या नहीं? तो, उन सुनी-सुनाई बातों पर हमने ज़्यादा कान देना उचित नहीं समझा।

फिर एक दिन एक कर्मचारी पूर्णेन्दु के पास दौड़ती हुई आई! वह बहुत उत्तेजित थी और उसने पूर्णेन्दु को साथ आने के लिए कहा! पूर्णेन्दु ने सोचा, कोई दुर्घटना हो गई है और वह उसके साथ चल दिया। कर्मचारियों के लिए बने वाशरूम का दरवाज़ा बाहर से बंद था! महिला कर्मचारी ने अब फुसफुसाते हुए कहा कि प्रेमी जोड़ा अंदर बंद हैं!

यह बड़ी हास्यास्पद स्थिति थी! पूर्णेन्दु ने सीधे कुंडी खोलने का निर्णय लिया। दरवाज़ा खुलते ही दोनों बाहर निकल आए, स्वाभाविक ही, पूरे वस्त्रों में, क्योंकि उन्हें सोचने का समय मिल गया था कि कुछ न कुछ गड़बड़ है! पूर्णेन्दु के यह पूछने पर कि वे लोग भीतर क्या कर रहे थे, उन्होंने जवाब दिया, 'बस सिर्फ गपशप कर रहे थे!'

हमें बाद में पता चला कि वास्तव में रसोइया भी शादीशुदा था और यह बात पहले उसने हमसे छिपाई थी। हमने अविश्वास के साथ एक-दूसरे की ओर देखा और फिर हँसे बिना न रह सके। स्वाभाविक ही, आश्रम का अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से हमने उन दोनों को बाहर का रास्ता दिखाया। बाकी के कर्मचारी खुश थे- जैसे उन्हें लाइव टीवी सीरियल में अभिनय करने का मौका मिल गया हो!

लेकिन फिर हमें आश्चर्य भी हुआ कि दो शादीशुदा लोगों को किसी बाहरी व्यक्ति के साथ सेक्स संबंध बनाने की इतनी तीव्र लालसा हो सकती है! यह इशारा था कि उनके विवाह के साथ कोई न कोई परेशानी अवश्य है-और यह भी कि उनका विवाह बस 'किसी से भी' करवा दिया गया है। फिर क्या यह बहुत स्वाभाविक नहीं था कि वे किसी 'और' के प्रति आकृष्ट हो जाते?

अंत में यही कहना चाहता हूँ कि इस तरह का धोखा तभी प्रमाणित होता है जब आप किसी को रंगे हाथ पकड़ते हैं। और यह एक बहुत कठिन प्रश्न है: क्या दोनों का बाथरूम में बंद होना रंगे हाथ पकड़ा जाना माना जाए? या वे बातचीत करने के लिए किसी शांत जगह की खोज में वहाँ पहुँच गए थे? 🙂

तलाक विकल्प नहीं है, तब भी नहीं जब पति और पत्नी सिर्फ पराई स्त्री या पराए मर्द के साथ सेक्स सम्बन्ध रखते हों! 6 अप्रैल 2015

पिछले सप्ताह सेक्स पर लिखते हुए मैं लगातार बताता रहा हूँ कि सेक्स को लेकर दम्पतियों के बीच ज़्यादा से ज़्यादा खुलापन होना चाहिए। दुर्भाग्य से पिछले हफ्ते ही एक उदाहरण मेरे सामने आया कि कैसे लोग सेक्स को लेकर कुछ ज़्यादा ही खुले होते हैं: वे आपस में एक दूसरे को ही धोखा दे रहे हैं! यहाँ आकर पुनः हमारा सामना भारत की जटिल मगर चिरपरिचित समस्या, अरेंज्ड मैरेज (प्रायोजित विवाह) से होता है।

आजकल मैं देखता हूँ कि बड़ी संख्या में पुरुष अपनी पत्नियों के साथ और महिलाएँ अपने पतियों के साथ धोखा करते हैं! यह एक तथ्य है। हमारे आसपास ही इतने सारे मामले देखने में आते हैं कि मुझे इसके उदाहरण ढूँढ़ने कहीं दूर जाने की ज़रूरत नहीं है। पिछले हफ्ते हमें ऐसे ही एक दंपति के बारे में पता चला है।

पुरुष और महिला, दोनों ही हमारे आश्रम के कर्मचारी रहे हैं और अब किसी और आश्रम में काम करते हैं। यह पुरुष लंबे समय से अपनी पत्नी के साथ धोखा करता आया था। पहले भी हमने सुना था और हम जानते थे कि घर में इसी कारण वे आपस में लड़ते-झगड़ते रहते हैं लेकिन इस विषय में हमने उनसे पूछताछ नहीं की थी क्योंकि कोई भी 'सामान्यतया' दूसरों के साथ ऐसी बातें करना पसंद नहीं करता-लेकिन सिर्फ 'सामान्यतया'।

इस शब्द पर मैं ज़ोर दे रहा हूँ क्योंकि अब यह बात छिपाना संभव नहीं रह गया है। जिस आश्रम में वे काम कर रहे थे, उस आश्रम और उसका झगड़ा अब सड़क पर आ गया है क्योंकि वह आश्रम के कुछ धनाढ्य मेहमानों के साथ भी सेक्स करने लगा था। जैसी कि आप कल्पना कर रहे होंगे यह बात किसी को भी नागवार गुज़रेगी और निश्चित ही अब वे वहाँ के रोजगार से हाथ धो बैठेंगे।

स्वाभाविक ही इस विवाद से उनके घर में भी कोहराम मच गया, बीबी यह कहकर लड़ने-झगड़ने लगी कि क्यों वह अपने जननांग को काबू में नहीं रख पाता। वह उस आश्रम का काम छोड़ने की ज़िद कर रही है क्योंकि वहाँ पति को सुहुलियत है कि वहां वह दूसरी औरतों के साथ यौन संबंध रख सके!

लेकिन उसकी बात सुनकर वह बेशर्मी से हँसने लगा। यह उसके लिए कोई धमकी नहीं थी, जैसा कि उसने पत्नी से कहा भी। जो भी उसे समझाने जाता या इस विषय में बात करता उसे भी वह हँसकर टाल देता! वह बेधड़क कहता, हम कहीं भी चले जाएँ, मेरे लिए औरतों की कोई कमी नहीं है!

यहाँ मैं एक मज़ेदार खुलासा करना चाहता हूँ: सिर्फ वही अपनी पत्नी को धोखा नहीं दे रहा है! पत्नी भी उसे धोखा दे रही है!

उनके यहाँ और भी कई समस्याएँ हैं, जिनमें पत्नी के साथ घरेलू हिंसा से लेकर पति का जुआ खेलना और खासा रुपया उसमें बरबाद करना भी शामिल है। लेकिन आज मैं उनकी व्यक्तिगत समस्याओं पर लिखना नहीं चाहता- मैं आपका ध्यान सेक्स के कारण होने वाली तबाही की ओर खींचना चाहता हूँ: दरअसल वे आपस में प्यार ही नहीं करते। उनके आपस में यौन संबंध नहीं हैं। साथ रहकर वे कतई खुश नहीं हैं। वे साथ रहते हैं तो सिर्फ एक कारण से: क्योंकि वे शादीशुदा हैं। वे शादीशुदा क्यों हैं? क्योंकि उनके अभिभावकों ने आपस में उनकी शादी करवा दी।

और अब उन्हें इस शादी को ज़िंदगी भर ढोना है-लड़ते-झगड़ते, आपस में मार-पीट करते, एक-दूसरे के साथ बेईमानी करते हुए। इसके कारण वे नौकरी छोड़ने की बात करते हैं, कहीं और जाकर रहने की बात करते हैं लेकिन एक बार भी अलग होने की, तलाक लेने की बात नहीं करते, बल्कि सोचते तक नहीं! क्योंकि बाहरी व्यक्ति के लिए सबकुछ ठीकठाक दिखना चाहिए!

इस मामले में बाहरी व्यक्ति कोई भी वह व्यक्ति हो सकता है, जिससे वे कभी मिले तक न हों क्योंकि उन्हें जानने वाले तो अब सभी जानते कि उनके घर की क्या हालत है, उनके आपसी संबंध कैसे हैं!

मैं एक बार और दोहराना चाहता हूँ: यह बहुत असाधारण या अनोखी परिस्थिति नहीं है! ऐसे न जाने कितने मामले सामने आते रहते हैं और मैं समझता हूँ कि इस समस्या की जड़ में अरेंज्ड मैरेज यानी प्रायोजित विवाह और सेक्स को लेकर भारतीय समाज में व्याप्त कई तरह की वर्जनाएँ हैं।

क्या किया जाए जब आप शादीशुदा हों और अपने जीवन साथी को धोखा देने का विचार कर रहे हों? 13 अक्टूबर 2014

एक महिला ने एक बहुत निजी और व्यक्तिगत प्रश्न पर चर्चा हेतु मुझसे संपर्क किया: वह विवाहित थी और उसके अनुसार अपने विवाह से खुश भी थी। फिर भी, जब वह कुछ दिन पहले एक पुरुष से मिली और उसे कुछ बेहतर तरीके से जाना तो उस पर इतना मोहित हो गई कि उसने अपने पति के साथ धोखा तक करने का मन बना लिया। तब तक उसने धोखा किया नहीं था मगर मुझसे पूछ रही थी कि इस मामले में क्या करे। आज के ब्लॉग में मैं इस परिस्थिति पर चर्चा करना चाहूँगा।

पहली बात तो यह कि मैं किसी भी स्थिति में धोखा देने के खिलाफ हूँ। यह कभी मत कीजिए। जब आपको इस बात का एहसास हो गया है तो अब खुद को काबू में रखिए और यह कदम किसी भी हालत में मत उठाइए क्योंकि न सिर्फ वह आपके साथी को चोट पहुँचाएगा बल्कि आपके संबंधों पर भी कुठाराघात करेगा और साथ ही आपकी विश्वसनीयता भी हमेशा हमेशा के लिए खतरे में पड़ जाएगी!

इसके अलावा, मैंने बहुत से लोगों को कहते सुना है कि 'मैं अपने साथी से प्रेम करता हूँ' और 'हमारे संबंध अच्छे हैं, हमारे बीच कोई समस्या नहीं है' लेकिन अगले ही वाक्य में वे कहते हैं कि वे अपने साथी के साथ धोखा करते रहे हैं या यह कि वे दूसरों के प्रति आकर्षण महसूस करते हैं और यहाँ तक कि यह भी कि वे किसी दूसरे पुरुष या महिला से प्रेम करते हैं। इसके जो स्पष्टीकरण वे देते हैं वे कुछ इस प्रकार होते हैं: 'प्रेम रहस्यमय तरीके से काम करता है' और 'प्रेम कब और कैसे हो जाता है कहा नहीं जा सकता, क्यों हो जाता है, समझना मुश्किल है; बस, वह हो जाता है!' आदि। इनमें से किसी भी स्पष्टीकरण से मैं सहमत नहीं हूँ।

मैं इस बात पर कतई विश्वास नहीं करता कि अपने साथी के साथ, आपके एकमात्र आत्मीय जीवन-साथी, आपकी पत्नी या पति के साथ आपके प्रेमपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और सुखद सम्बन्ध हैं- और उसके पश्चात आप किसी दूसरे व्यक्ति के प्रति वैसा ही आकर्षण महसूस करते हैं, उस सीमा तक भी कि आप उसके साथ यौन सम्बन्ध भी स्थापित कर सकते हैं! जी नहीं, मैं जानता हूँ कि मामला कुछ दूसरा होता है: आपके संबंधों में या आपके विवाह में कुछ कमी रह गई है, वह अपूर्ण है! कोई ऐसी चीज़ है, जिसकी आप कमी महसूस करते हैं और उसे बाहर तलाश करने की कोशिश करते हैं!

इन अनचाही भावनाओं से निपटने की दिशा में पहला कदम यह होगा कि एक तथ्य के रूप में उसे स्वीकार करें: आपके और आपके साथी के बीच कोई न कोई समस्या है। आपको उस कारण की तह तक जाना होगा, जिसके चलते आपके मन में वे विचार और भावनाएँ पैदा हुईं।

इसकी दो संभावनाएँ हो सकती हैं: या तो अभी-अभी कोई बात हुई है या फिर समस्या आपके संबंधों की शुरुआत से ही मौजूद थी।

हो सकता है कि आपके साथी का व्यवहार पिछले कुछ माह में बदला हो और आप उस व्यक्ति को मिस कर रहे हों, जिसके साथ आपने विवाह किया है या जिसके साथ आप रहते हैं। या फिर आपमें कोई परिवर्तन हुआ हो या आपके बीच कोई ऐसी बात हुई हो, जिसने आपको या अपने साथी के बारे में आपके नज़रिए को बदल दिया हो। कोई ऐसी नई ज़रुरत अवश्य पेश हुई है, जो अब पूरी नहीं हो पा रही है।

या फिर/और यह अधिक जटिल कारण है- आपका साथी तो हमेशा से ऐसा ही रहा हो और उसके कुछ रवैयों और आदतों को आपने कभी स्वीकार ही न किया हो। आपके दिलोदिमाग में शुरू से यह संदेह रहा हो, यह विचार कि आप अपने प्रेम की शक्ति से उसे बदल देंगे और यह सोचकर आधे मन से आप इस सम्बन्ध को जारी रखे हुए हों।

आपके मन में पैदा हो रहीं इन भावनाओं के पैदा होने का कारण एक बार पता चल जाने के बाद आपके लिए यह जानना ज़रूरी है कि उनका कोई इलाज संभव है या नहीं। यदि आप समझते हैं कि इलाज संभव है तो अपने साथी के साथ उस विषय पर खुलकर बात कीजिए। सारी बातों को विस्तार के साथ सामने रखिए, बताइए कि इस समस्या के चलते आप कैसा महसूस कर रहे हैं, यह भी कि उसके कारण आप किसी और के प्रति आकर्षण का अनुभव करने लगे हैं। धमकियाँ मत दीजिए या सामने वाले पर किसी प्रकार का दबाव मत डालिए- सिर्फ शान्ति के साथ अपनी बात रखिए!

लेकिन अगर आपको लगता है कि समस्या का कोई इलाज नहीं है और आप उसमें सुधार के लिए कई असफल प्रयास कर चुके हैं तो आसान रास्ता जानकर धोखा भर मत देते रहिए। जी नहीं! कुछ भी हो, हर हाल में नतीजों की परवाह किए बगैर बात कीजिए। अपने सम्बन्ध को तिलांजलि दे दीजिए और नया सम्बन्ध शुरू करने से पहले पिछले सम्बन्ध से आज़ाद और पाक-साफ़ हो लीजिए!

आपके लिए जो भी रास्ता उचित हो, मेरी नज़र में खुद को और दूसरों को धोखा देना उचित नहीं है और यह आपको किसी भी परिस्थिति में नहीं करना चाहिए। मुझे आशा है कि आप इस समस्या का समाधान कर लेंगे और अपने वास्तविक प्रेम-सम्बन्ध को प्राप्त करने में अवश्य सफल होंगे!

धोखेबाज़ी का नियम: आप दूसरों को धोखा दे सकते हैं, दूसरे आपको नहीं! 07 जुलाई 2014

हाल ही में आयोजित अपने व्यक्तिगत-सलाह-सत्रों के बारे में मैं आपको बताता रहा हूँ क्योंकि मेरे खयाल से उनमें आपकी भी दिलचस्पी हो सकती है कि खुदा न खास्ता आप भी वैसी ही किसी उलझन में पड़ जाएँ और तब ये कहानियाँ आपके किसी काम आ सकें। आशा करता हूँ कि आज मैं जिस समस्या का ज़िक्र कर रहा हूँ उसमें आप नहीं फँसेंगे और अगर फँस भी गए तो उस महिला की तरह परेशान नहीं होंगे जो मेरे एक ऐसे ही सत्र में आई थी। विशेष रूप से इसलिए कि मैं आपको सलाह दुँगा कि अपने साथी से धोखेबाज़ी कभी न करें! लेकिन मैं शुरुआत से बताता हूँ कि क्या हुआ।

अपने रिश्ते में आई खटास की समस्या लेकर एक महिला मेरे पास आई। आते ही सबसे पहले उसने मुझे आगाह किया कि उसकी समस्या कुछ जटिल है और पूरी बात समझाने में कुछ वक़्त लगेगा। अतीत में उसके बहुत से पुरुषों के साथ सम्बन्ध रहे हैं और ऐसे एक लम्बे चले रिश्ते से उसका बच्चा भी है। गनीमत यह कि वर्तमान साथी के साथ पिछले चार साल से उसके सम्बन्ध स्थिर और पर्याप्त कामयाब हैं-लेकिन समस्या यह है कि वह शादीशुदा है! अर्थात यह भी उसका कोई स्थाई सम्बन्ध नहीं है-सिर्फ कामचलाऊ सम्बन्ध ही है।

उसके प्रेमी ने-क्योंकि आप उसे ‘साथी’ तो कह नहीं सकते- उससे शुरू में ही कह दिया था कि वह अपनी पत्नी को किसी भी सूरत में नहीं छोड़ेगा। उसकी तरफ से यह स्पष्ट सन्देश था कि: हम हमबिस्तर होकर मज़े तो लूटेंगे, मैं अपनी पत्नी के साथ धोखा करते हुए तुम्हारे साथ अलग से भी सम्बन्ध रखता रहूँगा लेकिन तुम मुझसे यह अपेक्षा मत करना कि अपनी पत्नी को छोड़कर और दूसरी चीज़ें छोड़कर मैं तुम्हारे साथ रहने चला आऊँगा! यह मैं नहीं चाहता और न ही ऐसा करूँगा! और वह इस बात पर सहमत भी हो गई थी।

मैंने अपने ब्लॉगों में कई बार कहा है कि आप बहुत समय तक किसी के बहुत करीब रहें, उसके साथ कई बार हमबिस्तर हों, प्यार करें (‘मेक लव’, जैसा कि अंग्रेजी में सुन्दर शब्दों में कहा जाता है) और उसके बाद कहें कि अपने प्रेमी के साथ आपका कोई लगाव नहीं है तो यह संभव ही नहीं है। तो उस महिला ने कहा कि उसके अन्दर प्रेम जैसा कुछ पैदा हो गया था और जिस तरह समय गुज़र रहा था, उससे वह खुश भी थी। मगर फिर जो उसे पता चला उसने सब कुछ तहस-नहस कर दिया: उसके प्रेमी ने किसी दूसरी औरत से सम्बन्ध स्थापित कर लिए!

यह अजीबोगरीब लगता है मगर स्पष्ट ही अब उसके मन में यह भावना घर कर गई है कि उसके साथ धोखा हुआ है! जी हाँ! यह आदमी उसके साथ सम्बन्ध रखकर अपनी पत्नी के साथ धोखा कर रहा था, वह खुद उसके साथ मिलकर उसकी पत्नी के साथ धोखा कर रही थी लेकिन वह नहीं चाहती कि किसी दूसरी महिला के साथ मिलकर वह अपनी पत्नी और उसके साथ धोखा करे! उसे ईर्ष्या हो रही थी, वह उस दूसरी महिला से नाराज़ थी, जल-भुन रही थी और सबसे बड़ी बात, दुखी थी, जैसे अब उसका यह सम्बन्ध टूट चुका हो। वास्तव में था भी ऐसा ही, हालाँकि इस सम्बन्ध का, वैसे भी कोई भविष्य नही था।

यह किसी फिल्म की कहानी लगती है लेकिन इस फिल्म में जो सबसे अधिक लाभान्वित हुआ वह था वह आदमी जिसने अपनी प्रेमिकाओं को शुरू में ही स्पष्ट कर दिया था कि वह उनसे ज़िन्दगी भर के लिए जुड़े रहने का वादा नहीं कर सकता! इस तरह वह मज़े में उन तीन महिलाओं से सेक्स सम्बन्ध रखे हुए था और इसमें आज तक कोई समस्या भी पेश नहीं आई थी।

मैंने उससे कहा कि उसके लिए उस आदमी के प्रति, जिसके साथ उसने जीवन के चार कीमती साल बर्बाद किए, अपने क्रोध को निकालना बहुत आवश्यक है। यह स्पष्ट था कि वह उससे प्रेम नहीं करता था और वह भी शुरू से यह जानती थी कि इस सम्बन्ध से उसे कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है। मैंने उससे साफ शब्दों में कहा: अब तुम्हें इस क्रोध के साथ कुछ समय गुज़ारना ही होगा और उसके बाद तुम इस व्यक्ति को अपने जीवन से निकाल बाहर करो और कोई ऐसा व्यक्ति ढूँढ़ो जो तुमसे प्यार करता हो!

दूसरे नजरिए से देखा जाए तो समझ में आता है कि मनुष्य अनजाने में अपने दिमाग का उपयोग किस तरह खुद अपने आप को ठगने में करता है! आप यह कैसे मान सकते हैं कि जब आप दूसरों के साथ धोखा करते हैं तो वह ठीक होता है जबकि कोई दूसरा आपके साथ यही करे तो आपको तकलीफ होती है?