आपके विवाह के बाद जब आपकी सास आपकी माहवारी का हिसाब रखने लगती है – 11 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु भारतीय समाज, भारतीय परिवार और सास-ससुर द्वारा डाले जाने वाले दबाव के बारे में लिख रहे हैं, जो वे नव विवाहित जोड़ों पर और ख़ास कर नई नवेली बहू पर डालते हैं: जितना जल्दी हो सके बच्चा पैदा करो!

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जी नहीं, घर की सफाई करना सिर्फ स्त्रियों का काम ही नहीं है! 9 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि किस प्रकार परंपरागत लैंगिक भूमिकाएँ आज भी सिर्फ भारत में ही नहीं, पश्चिम में भी समस्याएँ बनी हुई हैं। यहाँ पढिए, कौन से काम पुरुषोचित हैं और कौन से स्त्रियोचित, इस विषय में लोगों की प्रचलित धारणाओं के बारे में!

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भारतीय क्यों सोचते हैं कि बच्चों को अपने अभिभावकों से डरना चाहिए? 8 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे स्कूली किताबें डरा-धमकाकर बच्चों का लालन-पालन करने की भारतीय संस्कृति को प्रतिबिंबित करती हैं, विशेष रूप से पिता से डरकर रहने की संस्कृति को।

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चिल्लाएँ नहीं – बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करें! 10 नवम्बर 2015

स्वामी बालेंदु एक खूबसूरत शाम के बारे में बता रहे हैं, जो एक व्यक्ति द्वारा अपनी पुत्री पर की गयी टिप्पणी से खराब हो गयी। वे लोगों को सलाह देते हैं कि चिल्लाने से पहले बच्चों की भावना के बारे में सोचें!

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आस्था आपको पशुओं का मल-मूत्र भी खिला पिला सकती है – 8 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि किस तरह भारत में इस समय गोमूत्र, गोबर और उनसे तैयार सामानों की धूम मची हुई है।

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सेक्स, सेक्स और सेक्स – पश्चिम के विषय में भारत का विकृत नजरिया – 2 सितंबर 2015

बहुत से भारतीय पुरुष और महिलाएँ यह विश्वास करते हैं कि पश्चिम में जो कुछ भी है, सिर्फ सेक्स है! क्यों? स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि दूसरे कारणों के अलावा इसका एक कारण समाचार पत्रों में छपने वाली कहानियाँ भी हैं!

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कैसे सतत मार्गदर्शन बच्चों के विकास में बाधा पहुँचाता है – 11 अगस्त 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे बच्चों को बार-बार टोकना कि यह करो, वह मत करो और उन्हें पूरी तरह आज़ाद (छुट्टा) छोड़ देना, दोनों ही उचित नहीं है। बच्चों के लालन-पालन संबंधी प्रश्नों की विवेचना यहाँ पढ़िए।

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लोगों के जीवन पर धर्म और ईश्वर का प्रभाव – भारत और पश्चिमी देशों के बीच तुलना – 3 अगस्त 2015

स्वामी बालेन्दु ईश्वर और धर्म के प्रभाव के मामले में भारत और पश्चिमी देशों में हुए अपने अनुभवों के अंतर के बारे में विस्तार से लिख रहे हैं।

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सामान्य टूरिस्ट गाइडों से हम किस तरह अलग हैं? 22 जुलाई 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि वे अपना टूर गाइड व्यवसाय किस तरह चलाते हैं, कैसे यात्रियों के साथ हमारे व्यवहार में ईमानदारी, शराफत और सत्यनिष्ठा सर्वोपरि होते हैं और कैसे वे यात्री हमारे ग्राहक बनने के बाद मित्र भी बन जाते हैं।

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क्या भारत में टिप की अपेक्षा न रखने वाला पर्यटन-गाइड मिलना असंभव है? 20 जुलाई 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि उनके भाइयों के पास समय न होने पर मेहमानों के लिए बाहर से किसी पर्यटन-गाइड की तलाश बड़ा मुश्किल काम साबित हुआ। यह काम आसान क्यों नहीं है, यहाँ पढ़िए!

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