जी नहीं, घर की सफाई करना सिर्फ स्त्रियों का काम ही नहीं है! 9 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि किस प्रकार परंपरागत लैंगिक भूमिकाएँ आज भी सिर्फ भारत में ही नहीं, पश्चिम में भी समस्याएँ बनी हुई हैं। यहाँ पढिए, कौन से काम पुरुषोचित हैं और कौन से स्त्रियोचित, इस विषय में लोगों की प्रचलित धारणाओं के बारे में!

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भारतीय पुरुष को कभी-कभी अपनी पश्चिमी जीवन साथी की स्वतंत्रता क्यों भयभीत करती है – 24 जून 2015

स्वामी बालेन्दु उन समस्याओं की चर्चा कर रहे हैं, जिनका सामना भारतीय-पश्चिमी जोड़ों को अक्सर करना पड़ता है। उनके अनुसार इसका कारण दोनों देशों में परंपरागत रूप से लैंगिक भूमिका का अलग-अलग होना है।

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अगर आप अपनी पत्नी के साथ बलात्कार नहीं करते तो आप भारत के सिर्फ 25% लोगों में से एक हैं – 10 जून 2015

अपने मित्र के साथ बलात्कार पर और उससे जुड़े आँकड़ों पर हुई चर्चा का ज़िक्र करते हुए स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे वह मित्र इन आँकड़ों पर भी विश्वास करने को तैयार नहीं हुआ।

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आप बिकनी पहनना ठीक नहीं समझते? मेरी पत्नी उन्हें बीच पर पहनती हैं! क्या हम अब भी दोस्त बने रह सकते हैं? 9 जून 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों उन्हें उन लोगों के साथ घनिष्ठ होना कठिन लगता है, जो भारतीय संस्कृति से प्रभावित परंपरागत जीवन में विश्वास रखते हैं। यह उनके पारिवारिक जीवन के मूल्यों से मेल नहीं खाता!

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महिलाओं की यौन इच्छाओं से पुरुषों की सुरक्षा करना – लैंगिक समानता की दिशा में एक और तर्क – 7 मई 2015

स्वामी बालेन्दु लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध आवाज़ उठा रहे हैं: कोई यह क्यों नहीं पूछता कि वास्तव में पुरुष यौन सम्बन्ध स्थापित करना चाहता है या नहीं?

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आश्रम में होली – उन्मादी मगर हर तरह से सुरक्षित मौज-मस्ती – 8 मार्च 2015

स्वामी बालेंदु आश्रम में होने वाले होली समारोह का वर्णन कर रहे हैं, जहाँ भारतीय और विदेशी मिलकर सुरक्षित माहौल में होली खेलते हैं।

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पढ़े-लिखे उच्च वर्ग में भी लड़की के जन्म पर निराशा व्यक्त की जाती है! 14 जनवरी 2015

स्वामी बालेंदु भारत की एक बहुत बड़ी समस्या का वर्णन कर रहे हैं: बहुत सी महिलाएँ लड़के की जगह लड़की को जन्म देकर बहुत निराश हो जाती हैं!

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प्रबंधन के क्षेत्र में ज़्यादा से ज़्यादा महिलाएँ होनी चाहिए! 8 मई 2014

स्वामी बालेन्दु यह समझा रहे हैं कि यदि महिला प्रबंधकों की संख्या अधिक हो तो बहुत सी समस्याओं का अंत हो सकता है!

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जब हमने एक नाबालिग लड़की का विवाह रोकने में सफलता पाई – 10 अप्रैल 2014

स्वामी बालेंदु एक पंद्रह साल की लड़की, पूजा के बारे में बता रहे हैं, जो उनके स्कूल में पढ़ती है और जिसके अभिभावक इस साल उसका विवाह करना चाहते थे-मगर आखिर उन्हें विवाह न करने की समझाइश देकर रोक लिया गया!

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तब तक लड़कियां पैदा करते रहना जब तक एक लड़का नहीं हो जाता – 9 अप्रैल 2014

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि अपने स्कूली बच्चों के घरों के दौरों के दौरान उन्हें गलियों में लड़कों और पुरुषों की तुलना में ज़्यादातर लड़कियां और औरतें क्यों दिखाई देती हैं।

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