आश्रम आने के विषय में पूछताछ का एक उदाहरण, जिसे हमने अस्वीकार कर दिया – 5 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु आश्रम आने की इच्छुक एक महिला के साथ हुई ईमेल बातचीत की प्रतिलिपि प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने उसे मना कर दिया-क्योंकि वह धार्मिक माहौल की तलाश में थी।

Continue Readingआश्रम आने के विषय में पूछताछ का एक उदाहरण, जिसे हमने अस्वीकार कर दिया – 5 नवंबर 2015

आध्यत्मिक मूर्खता, जिसका दावा है कि सी-सेक्शन माँ और बच्चे के बीच के लगाव को बाधित करता है – 12 अगस्त 2015

स्वामी बालेन्दु आध्यात्मिक और रहस्यवादियों की ओर से आए प्राकृतिक प्रसव का प्रसार करने वाले एक वक्तव्य के बारे में बता रहे हैं, जिसके अनुसार सी-सेक्शन माँ और बच्चे के मध्य प्रेम को बाधा पहुँचाता है, जबकि उनका यह अतिवादी दावा अप्रिय स्थिति भी पैदा कर सकता है।

Continue Readingआध्यत्मिक मूर्खता, जिसका दावा है कि सी-सेक्शन माँ और बच्चे के बीच के लगाव को बाधित करता है – 12 अगस्त 2015

क्या आध्यात्मिकता (धार्मिकता) का अर्थ यह है कि आप दगाबाजी करें फिर अपने आप को माफ़ भी कर दें? 15 जुलाई 2015

स्वामी बालेन्दु अपने एक सलाह सत्र का ज़िक्र कर रहे हैं, जिसमें एक पुरुष ने स्वीकार किया कि वह अपनी गर्लफ्रेंड से दगाबाज़ी करता रहा है-लेकिन उसे अपनी करतूत पर ज़रा सा भी अफ़सोस नहीं था!

Continue Readingक्या आध्यात्मिकता (धार्मिकता) का अर्थ यह है कि आप दगाबाजी करें फिर अपने आप को माफ़ भी कर दें? 15 जुलाई 2015

3 तरह के लोग, जो हमारे आश्रम में रहना पसंद करते हैं – 12 फरवरी 2015

स्वामी बालेंदु तीन अलग-अलग तरह के लोगों के बारे में बता रहे हैं, जो आश्रम आने के बारे में पूछताछ करते हैं। पढ़िए और देखिए कि क्या आप इनमें से एक हैं और अगर हैं तो आइए, आपका स्वागत हैं!

Continue Reading3 तरह के लोग, जो हमारे आश्रम में रहना पसंद करते हैं – 12 फरवरी 2015

आध्यात्मिक होने की जगह मैं भौतिकवादी होना क्यों पसंद करूँगा – 29 जनवरी 2015

स्वामी बालेंदु इस प्रचलित धारणा के बारे में लिख रहे हैं, जिसके अनुसार माना जाता है कि जितना अधिक आप आध्यात्मिक होंगे उतना ही कम भौतिक वस्तुओं की आपको दरकार होगी। वे इस विचार से असहमत क्यों हैं, यहाँ पढ़िए।

Continue Readingआध्यात्मिक होने की जगह मैं भौतिकवादी होना क्यों पसंद करूँगा – 29 जनवरी 2015

संगीत, योग, नृत्य और सेक्स का अद्भुत समन्वय! 24 अगस्त 2014

स्वामी बालेंदु ऐंग्सबका में 2006 में सम्पन्न ‘नो माइंड फेस्टिवल’ के बारे में बता रहे हैं कि कैसे वहाँ लोग तरह-तरह की गतिविधियों के साथ आनंद मनाते रहे और हाँ, एक-दूसरे के साथ अंतरंग होकर भी।

Continue Readingसंगीत, योग, नृत्य और सेक्स का अद्भुत समन्वय! 24 अगस्त 2014

नशीले पदार्थों का सेवन करने के बाद होने वाला मतिभ्रम आध्यात्मिक अनुभव नहीं है – 27 अप्रैल 2014

स्वामी बालेंदु अपने एक अनुभव की चर्चा कर रहे हैं जिसमें कुछ लोगों ने उनकी वेषभूषा से यह समझ लिया कि वे नशीले पदार्थों का सेवन करते होंगे।

Continue Readingनशीले पदार्थों का सेवन करने के बाद होने वाला मतिभ्रम आध्यात्मिक अनुभव नहीं है – 27 अप्रैल 2014

क्यों आप खुद कठपुतली बनकर अपने जीवन को किसी गुरु के हवाले करना चाहते हैं?- 22 जुलाई 2013

स्वामी बालेंदु समझा रहे हैं कि क्यों वे समझते हैं कि गुरुवाद ताकत और भोले-भाले लोगों के शोषण को दावत देता है। अपने गुरु आप बनिए!

Continue Readingक्यों आप खुद कठपुतली बनकर अपने जीवन को किसी गुरु के हवाले करना चाहते हैं?- 22 जुलाई 2013

अतीत में धर्म क्रूर थे और आज भी वैसे ही हैं – 9 अप्रैल 2013

स्वामी बालेन्दु लिखते हैं कि आज भी दुनिया के कितने हिस्सों में धार्मिक क्रूरता विद्यमान है|

Continue Readingअतीत में धर्म क्रूर थे और आज भी वैसे ही हैं – 9 अप्रैल 2013

केल्टिक और अमरीका के मूल निवासियों की आध्यात्मिकता पर मुग्ध हैं? उनकी रक्तपिपासु क्रूरता पर भी गौर करें! – 8 अप्रैल 2013

स्वामी बालेन्दु उन लोगों के विषय में बात करते हैं जो प्राचीन धर्मों और सभ्यताओं की आध्यात्मिकता से प्रभावित दिखते हैं, परन्तु आपको उनकी क्रूरताएँ भी देखनी चाहिए|

Continue Readingकेल्टिक और अमरीका के मूल निवासियों की आध्यात्मिकता पर मुग्ध हैं? उनकी रक्तपिपासु क्रूरता पर भी गौर करें! – 8 अप्रैल 2013