क्या करें, जब आस्थाओं और रुचियों की विभिन्नता के चलते आपकी मित्रता में अपेक्षित अंतरंगता नहीं हो पाती? 17 दिसंबर 2013

स्वामी बालेंदु समझा रहे हैं कि कैसे रुचि और विचार भिन्न होने के बावजूद और बात करने के लिए कोई विषय न हो तब भी आप मित्रता कायम रख सकते हैं।

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जब आपकी आस्थाएं और विचार बदलते हैं तो दोस्त भी बदले-बदले से नज़र आते हैं- 16 दिसंबर 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे आपके भीतर हुए परिवर्तन लोगों के साथ आपकी मित्रता को भी उथला (छिछला) और दिखावटी बना देते हैं।

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