मेरी प्रिय, पश्चिम की महिलाओं: भारतीय पुरुषों से ऑनलाइन प्रेम संबंध बनाते समय सतर्क रहें – 15 जून 2015

आज से मैं एक ऐसे विषय पर लिखने की शुरुआत करना चाहता हूँ, जो मेरे मुताबिक़ अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मैं इसलिए जानता हूँ कि हमारे आश्रम में अक्सर विदेशी महिलाएँ आती रहती हैं या बहुत सी महिलाएँ इस मामले में लिखकर भी पूछती हैं: वे इंटरनेट पर चैटिंग करते हुए एक भारतीय पुरुष के साथ प्रेम करने लगीं और अब उससे मिलने भारत आना चाहती हैं। कई बार वे बेहद निराश होकर अपने देश वापस लौटती हैं।

शुरू करने से पहले मैं आपके सामने यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि जो मैं आज लिखूँगा और शायद अगले कुछ दिनों तक लिखता रहूँगा, वह मेरे अनुभवों और मेरी राय के आधार पर व्यक्त किए गए मेरे विचार होंगे। निश्चय ही इसके बिल्कुल विपरीत रूप से घटित प्रकरण भी बहुत से मौजूद होंगे और स्पष्ट है कि यह उस व्यक्ति, उसके रवैये और उसके व्यवहार पर निर्भर होता है कि अंततः किसी को क्या हासिल हुआ।

लेकिन 35 से 50 साल उम्र वाली पश्चिमी महिलाओं के प्रकरण सामान्यतया ज़्यादा देखने में आते हैं और वैसी ही एक महिला के बारे में मैं आपको बताने जा रहा हूँ। इंटरनेट पर चैट-रूम में और सोशल मीडिया के ज़रिए इस महिला का परिचय एक भारतीय पुरुष से हो गया और जैसा कि अक्सर होता है, उससे कम उम्र के पुरुष से। काफी समय एक-दूसरे से बातचीत करने के बाद उसे महसूस हुआ कि वे आपस में सिर्फ सामान्य परिचित या मित्र से आगे कुछ आगे बढ़कर अधिक घनिष्ट हो सकते हैं। लगता था, उनके बीच गहरे तार जुड़ गए हैं और युवक भी उसे बार-बार भारत आने का निमंत्रित देता रहता था तो उसने सोचा, क्यों न एक बार हो आए, देखे, भरोसा करे और इस संबंध में कुछ गहरा उतरे?

ऐसी स्थिति में पड़ी हर महिला से मैं एक बात कहना चाहूँगा: सतर्क रहें और तुरंत इस मामले में अपने दिल को पूरी तरह न झोंक दें! आप सोच रही हैं कि इससे कुछ गंभीर बात निकलकर आएगी और यह कि शायद आपके पास जीवन-साथी प्राप्त करने का जीवन में सिर्फ एक बार मिलने वाला मौका हाथ आ गया है। सपने देखना मत छोड़िए-लेकिन यथार्थ का दामन भी कभी मत छोड़िए और इस बात को समझिए कि हो सकता है कि यह व्यक्ति उतना गंभीर न हो जितना आप हैं!

इसके विपरीत कई बार हमने देखा है कि महिलाएँ भारत आती हैं और उस व्यक्ति से रूबरू मिल भी नहीं पातीं। पहली बात तो यह कि आप नहीं जानते कि जिस आदमी से आप इतने दिन चैट करती रहीं वह यथार्थ में कोई व्यक्ति है भी या नहीं। इंटरनेट पर कोई भी बेधड़क झूठ बोल सकता है और निडर होकर कि कोई सच्चाई जान लेगा, झूठे चित्र अपलोड कर सकता है!

तो अब जबकि आपने भारत आने का टिकिट भी बुक कर लिया है, यह सुनिश्चित करें कि आपके पास पहले से कोई न कोई वैकल्पिक योजना (बॅकअप प्लान) हो! पहले से होटल वगैरह की छानबीन करके और होटल से बात करके आपको लेने आने वाली टॅक्सी आदि की व्यवस्था कर लें, जिससे आपको पता हो कि आपको कौन लेने आ रहा है। इस बात पर ही भरोसा मत कीजिए कि यह आदमी आपको लेने आ ही जाएगा-और इस विदेशी धरती और पूरी तरह अलग देश में हवाई जहाज से उतरते ही क्या आप पहली ही रात इस आदमी के साथ रहना पसंद करेंगी? न सिर्फ आप इस बिल्कुल अपरिचित संस्कृति, अलग टाइम ज़ोन, और बिल्कुल अलग मौसम द्वारा अभिभूत कर ली जाएँगी बल्कि वे भावनाएँ भी इसमें अपनी भूमिका अदा करेंगी, जिनमें आप इस समय मुब्तिला है।

आप उनसे रूबरू मिलने की जगह तय कर सकती हैं लेकिन तब भी आपको हर वक़्त सतर्क रहना होगा। इस बात की पहले से योजना बना लें कि अगर वह तय समय पर, तय जगह पर न आए, अगर उसने कोई पता नहीं दिया है कि आप वहाँ जाकर उससे मुलाक़ात कर लें या अचानक उसका वह फोन, जिस पर आप हमेशा उससे बात करती थीं, स्विच ऑफ मिले।

मैं बताना चाहता हूँ कि यह सब मैंने होते हुए देखा है। महिलाएँ भारत आती रही हैं, मिलने की जगह भी तय होती है, उनके पास एक पता और फोन नंबर होता है, सैकड़ों किलोमीटर रेल और कार का सफर करने के बाद वे पाती हैं कि एक अनजान कस्बे या शहर के अजनबी चौराहे पर वे बिल्कुल तनहा खड़ी हैं। पता गलत था, फोन लग नहीं रहा। कोई लेने नहीं आया। फेसबुक और ईमेल संदेशों का कोई जवाब नहीं या अगर उस आदमी के अंदर थोड़ी भी मनुष्यता, थोड़ा सा भी अपराधबोध हुआ तो जवाब के रूप में कोई न कोई बहाना-सॉरी, अचानक ट्रांसफर हो गया या देश के दूसरे कोने में रहने वाले किसी रिश्तेदार की मृत्यु हो गई और उसे तुरंत वहाँ के लिए निकलना पड़ा।

अन्य कई महिलाओं के किस्से कुछ अलग होते हैं। जिस आदमी से वे इतने दिनों से बात कर रही थी, वह उन्हें मिल जाता है। फिर वे यहाँ खूब बढ़िया छुट्टियाँ मनाते हुए देश भर में घूमते-फिरते हैं और स्वाभाविक ही, सारा यात्रा खर्च, होटल का किराया और दूसरी खरीदारियों के खर्चे ये महिलाएँ ही उठाती हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि जीवन भर के उनके संग-साथ का यह पहला महीना है लेकिन आखिर जब वे गंभीरता से भविष्य के बारे में बात करते हैं तो उसे गोलमोल वादे, झूठे बहाने सुनने को मिलते हैं और अंततः उन्हें पता चलता है कि सिर्फ मौज मस्ती करने के इरादे से उसने इतना नाटक किया था!

ऐसे निराशाजनक अनुभवों को झेलने के बाद कभी-कभार ये महिलाएँ हमारे आश्रम पहुँच जाती हैं। कई बार वे इतनी समझदार और सतर्क होती हैं कि अपने रोमांच की ओर निकलने से पहले हमारे पास आ जाती हैं और सुनिश्चित कर लेती हैं कि ऐसी किसी अनहोनी के बाद आश्रय के लिए उनके पास कोई विकल्प मौजूद हो। कुछ तो उस आदमी की खोज में हमारी कार तक ले जाती हैं। हमें ख़ुशी होती है कि चलो, इतना परेशान होने के बाद कुछ समय वे हमारे आश्रम में शारीरिक और मानसिक विश्रांति प्राप्त कर सकेंगी और शांत मन से विचार कर सकेंगी कि उनके साथ ठीक-ठीक क्या हुआ था, उनसे क्या गलती हो गई थी और उससे उपजी निराशा से किस तरह उबरा जाए, और जब वे भारत से बिदा हों तो निराशा के साथ कुछ अच्छे अनुभव भी साथ लेती जाएँ!

कल मैं इन परिस्थितियों के भावनात्मक पहलुओं पर कुछ और विस्तार से लिखूँगा।

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