भारतीय पुरुष पश्चिमी महिला के मध्य का निर्णय: काम करे या घर संभाले? 23 जून 2015

मेरे विचार में प्रेम में पड़ना हमेशा बड़ी अच्छी बात होती है और जब दोनों ही उसके प्रति गंभीर हैं, तब तो फिर पूछना ही क्या! मेरा जीवन साथी भी एक बहुत ही भिन्न संस्कृति और परिवेश से संबद्ध है लेकिन मुझे यह स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं है कि इस मामले में हमारी स्थिति काफी बेहतर थी: मैं उससे मिलने से भी कई साल पहले से उसकी संस्कृति में रहा था और उस परिवेश से भली प्रकार परिचित था! मैं खुले मन का व्यक्ति रहा हूँ और इसलिए पहले से जानता था कि पश्चिमी महिलाएँ किस तरह भारतीय भारतीयों से अलग तरह से सोचती हैं। यहाँ मैं अपने उस ज्ञान को और हम दोनों को आपस में हुए कई सालों के अनुभवों को सबके साथ साझा करना चाहता हूँ, जिससे भारतीय पुरुष और पश्चिमी महिलाओं के संभावित जोड़े उनसे लाभान्वित हो सकें!

मैं चाहता हूँ कि आप कुछ ठोस उदाहरणों की सहायता से उन क्षेत्रों का परिचय प्राप्त करें, जहाँ आप सम्भवतः अलग ढंग से सोचते होंगे। सबसे प्रथम है, पुरुष और महिला के बीच संबंध और भारत और पश्चिमी संस्कृतियों में पुरुषों और महिलाओं के मध्य अंतर।

महिलाओं: भारतीय संस्कृति में पति भरण-पोषण के साधन जुटाता है और महिला घर और बच्चों की देखभाल करती है। पूरी संभावना होगी कि आपका साथी भी अपने घर में यही देखता हुआ बड़ा हुआ होगा। आजकल, विशेष रूप से बड़े शहरों में, ज़्यादा से ज़्यादा महिलाएँ अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रही हैं, बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में पढ़ रही हैं, नौकरी कर रही हैं और अपने मनपसंद क्षेत्रों में काम कर रही हैं। दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों में घूमते हुए आप बहुत सी महिलाओं को कार्यालयीन कपड़ों में चुस्त-दुरुस्त अपने कार्यालयों की ओर या कार्यालयों से घर लौटते हुए देख सकती हैं।

शहरों में भारत की बहुत थोड़ी आबादी ही रहती है और वहाँ भी बहुत सी युवतियाँ आज भी घर और बच्चों की देखभाल करने वाली गृहणियाँ और माँएँ बनने का निर्णय लेती हैं! वे ऐसा करती हैं क्योंकि वे सोचती हैं कि ऐसा करने पर ही उनका जीवन परिपूर्ण होगा और शायद इसलिए भी कि समाज उनसे यही अपेक्षा रखता है।

क्या आप इस दृश्य में फिट बैठती हैं? अगर आप भारत में बसने का निर्णय लेती हैं तो क्या आप अपने पति के साथ उसके संयुक्त परिवार में रहने की और घरेलू काम और बच्चों की देखभाल करते हुए जीवन बिताने की कल्पना भी कर सकती हैं? क्या यह आपको पूरी तरह संतुष्ट करने के लिए पर्याप्त है या आपको कुछ ज़्यादा की अपेक्षा है? आप इस विषय पर जो भी महसूस करती हैं, आपको उसे ज़ाहिर करना होगा! इसमें सही या गलत कुछ भी नहीं है, विशेष रूप से इसलिए कि आप एक संस्कृति से दूसरी, बिल्कुल भिन्न संस्कृति में कदम रख रही हैं, अपने जाने-पहचाने समाज को छोड़कर दूसरे, एकदम अजनबी समाज को अपनाने जा रही हैं तो सबसे पहले आपको जानना चाहिए कि आप क्या चाहती हैं और सामने वाला क्या चाहता है।

महानुभावों: ज़्यादातर पश्चिमी देशों में अभिभावक लड़कियों को पढ़ाना-लिखाना लड़कों के बराबर ही आवश्यक मानते हैं और चाहते हैं कि वे भी अपना कोई काम या नौकरी करके अपने पैरों पर खड़ी हों। नतीजतन महिलाएँ पुरुषों की तरह ही अच्छी-ख़ासी नौकरियाँ करती हैं और अपना खुद का पैसा कमाती हैं। वहाँ भी शादी काफी बड़ा समारोह समारोह होता है लेकिन उससे महिलाओं की सिर्फ निजी ज़िंदगी प्रभावित होती है- अपना काम करने की उनकी स्थिति में इससे कोई व्यवधान उपस्थित नहीं होता!

जब उनके बच्चे होते हैं तो माँएँ अपने काम से कुछ सालों का अवकाश ले लेती हैं लेकिन जब बच्चे डे केयर में जाने लायक हो जाते हैं तो वे अक्सर अपना काम फिर शुरू कर देती हैं। बहुत से पश्चिमी मुल्कों में यह आर्थिक दृष्टिकोण से आवश्यक भी होता है, जिससे परिवार बेहतर जीवन स्तर बनाए रख सके। वैसे भी महिलाएँ घर के बाहर की ज़िंदगी खुलकर जीना चाहती हैं। याद रखें, वहाँ संयुक्त परिवार जैसी कोई सामाजिक परंपरा नहीं है बल्कि अलग-अलग परिवारों वाले घर होते हैं, जहाँ अक्सर दिन में घर पर कोई नहीं होता क्योंकि पति-पत्नी काम पर चले जाते हैं और बच्चे डे केयर में दिन गुज़ारते हैं! यहाँ तक कि वे आपसे यह अपेक्षा भी कर सकती हैं कि आप अच्छे गृहस्थ पति की तरह 🙂 छुट्टी लेकर घर बैठें, बच्चों को संभालें, घर देखें, जब कि वे अपने काम पर जा सकें!

इस बारे में आपका रवैया क्या होगा? क्या आप इन बातों को बर्दाश्त कर पाएंगे? पत्नी का घर से बाहर निकलकर नौकरी करना या अपना कोई व्यवसाय करना और आपके बराबर या आपसे अधिक पैसे कमाकर लाना आपके लिए कोई समस्या तो नहीं बन जाएगा? क्या आप कभी-कभी अपने काम से छुट्टी लेकर बच्चों के साथ घर बैठ पाएँगे, जिससे पत्नी अपने काम पर जा सके?

अपने होने वाले जीवन साथी के साथ, भारत में या उसके देश में रहने के विकल्प के साथ कुछ परिदृश्यों पर चर्चा कीजिए। एक-दूसरे को अधिक से अधिक जानने की कोशिश कीजिए! जब आप एक-दूसरे के साथ पर्याप्त समय गुजारेंगे तो कुछ और सामान्य मतभेद उजागर होंगे- लेकिन उनके विषय में विस्तृत चर्चा कल करेंगे!