इस बात को समझिए कि आपका वास्तविक जीवन आपकी ऑनलाइन दुनिया से अधिक महत्वपूर्ण है – 4 मार्च 2015

तकनीक

बहुत से लोग आजकल दिन का बहुत सारा समय मोबाइल फोनों और टेबलेटों पर गुज़ारते हैं। वहाँ वे कोई काम नहीं कर रहे होते बल्कि सोशल मीडिया पर यार-दोस्तों से गपशप कर रहे होते हैं। मैं नहीं समझता कि इसमें कोई बुराई है। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि आप ऐसा न करें। लेकिन मैं यह अवश्य कह रहा हूँ कि सतर्क रहें और यह न समझें कि जो भी आप वहाँ पढ़ रहे हैं, सच ही है।

बहुत से लोगों के साथ मैंने ऐसा होते देखा है-विशेष रूप से उनके साथ, जिनकी प्रवृत्ति अपने आपको दूसरों से कमतर समझने की होती है। दूसरों की लिखी मसालेदार टिप्पणियों को, ट्वीटों को और वक्तव्यों को वे पढ़ते हैं और फिर अपने जीवन में हीनता-बोध से ग्रसित हो जाते हैं।

कुछ समय पहले की ही बात है जब लोग पत्रिकाओं में प्रसिद्ध लोगों के साक्षात्कार पढ़ते थे और सोचते थे कि उनका जीवन कितना शानदार है, उनका शरीर कितना गठीला या लोचदार है और वे किस तरह अपने प्रेमियों के साथ रहते हैं और उनके पास सफलता, प्रतिष्ठा और ऐश्वर्य, सब कुछ है। फिर जब एक दिन वे सुनते थे कि उस व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली तो उन्हें बहुत बड़ा झटका लगता था, वे अचंभित रह जाते थे कि इतना सुखी व्यक्ति ऐसा कैसे कर सकता है-कोई भी यह नहीं देख पाता था कि उनका जीवन भी वास्तव में कितना दीन-हीन, कितना अभागा था। जैसा मीडिया में दिखाया जाता था, कम से कम वैसा सम्मोहक तो वह कतई नहीं था।

फिर वे अपने वास्तविक जीवन के मित्रों की ओर देखते और पाते कि वास्तविक, समस्या-ग्रस्त इंसान सिर्फ वे ही नहीं हैं। दिक्कतें, परेशानियाँ और तुनकमिजाजी सिर्फ उनके मित्रों में ही नहीं, बड़े-बड़े ऐश्वर्यशाली लोगों में भी पाई जाती है।

आज, सोशल मीडिया पर उन टिप्पणियों को पढ़कर आप सोच में पड़ जाते हैं कि क्या उन्हें लिखने वाले वास्तव में हमेशा प्रसन्न रहते हैं, क्या वे सम्पूर्ण रूप से निर्दोष, आदर्श व्यक्ति हैं या वास्तविक, सामान्य मनुष्य हैं। और मुझे लगता है कि यहीं पर असली खतरा विद्यमान होता है।

उन लोगों के लिए, जिन्हें दूसरों से अपने आप की तुलना करना पसंद है, इसका परिणाम यह होता है कि वे अपने आपको तुच्छ समझने लगते हैं। स्वाभाविक ही, ये दूसरे लोग, जिन्हें उन्होंने प्रत्यक्ष देखा नहीं होता, कोई प्रख्यात सेलेब्रिटी नहीं होते बल्कि उनके वास्तविक मित्र और जान-पहचान वाले होते हैं! तो उन्हें लगता है कि उनके आसपास का हर कोई वास्तव में एक शानदार दुनिया में, जैसे स्वर्ग में ही रह रहा है और एक से बढ़कर एक, मज़ेदार और सुखद बातों का अनुभव कर रहा है, सबसे इतना प्रेम और प्रशंसा पा रहा है। सिर्फ वे ही हैं, जिन्हें यह सब उपलब्ध नहीं है!

जिन्हें ऐसा महसूस होता है उन्हें मैं यही सलाह देना चाहता हूँ कि कंप्यूटर स्क्रीन से कुछ समय के लिए दूर हो जाएँ और इस आभासी दुनिया के मित्रों से वास्तविक जीवन में आमने-सामने मिलें। वास्तविक दुनिया के साथ अपना ताल्लुक बढ़ाएँ और इस बात को समझें कि आप जो चाहें, कुछ भी लिख सकते हैं और उन बातों को छिपा सकते हैं, जिनसे आपका जीवन वास्तव में प्रभावित होता है। स्वाभाविक ही बहुत से लोग अपने अच्छे, सुखद क्षणों को दूसरों के साथ साझा करना चाहते हैं, जबकि वास्तविक जीवन में, अकेले में वे बहुत बुरी परिस्थितियों का सामना कर रहे होते हैं! वे नहीं चाहते कि इस आभासी दुनिया में कोई भी उन पर दया करे, वे नहीं चाहते कि कोई भी उनके लिए सोशल मीडिया में सहानुभूतिपूर्ण शब्द लिखे, जब कि वास्तविक जीवन में उन्हें सर रखकर रोने के लिए एक कंधे की ज़रूरत है!

आभासी दुनिया बहुत शानदार है, आप उसकी सहायता से दुनिया भर के लोगों से संपर्क बनाए रख पाते हैं और देख सकते हैं कि वे क्या कर रहे हैं-लेकिन अपने वास्तविक जीवन को भूल न जाएँ, हाड़-मांस के वास्तविक लोगों से मिलें-जुलें और आप जैसे हैं, वैसे ही बने रहें, हर तरह की भावनाओं से युक्त, एक सामान्य इंसान!

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