क्या किया जाए जब आप शादीशुदा हों और अपने जीवन साथी को धोखा देने का विचार कर रहे हों? 13 अक्टूबर 2014

सम्बन्ध

एक महिला ने एक बहुत निजी और व्यक्तिगत प्रश्न पर चर्चा हेतु मुझसे संपर्क किया: वह विवाहित थी और उसके अनुसार अपने विवाह से खुश भी थी। फिर भी, जब वह कुछ दिन पहले एक पुरुष से मिली और उसे कुछ बेहतर तरीके से जाना तो उस पर इतना मोहित हो गई कि उसने अपने पति के साथ धोखा तक करने का मन बना लिया। तब तक उसने धोखा किया नहीं था मगर मुझसे पूछ रही थी कि इस मामले में क्या करे। आज के ब्लॉग में मैं इस परिस्थिति पर चर्चा करना चाहूँगा।

पहली बात तो यह कि मैं किसी भी स्थिति में धोखा देने के खिलाफ हूँ। यह कभी मत कीजिए। जब आपको इस बात का एहसास हो गया है तो अब खुद को काबू में रखिए और यह कदम किसी भी हालत में मत उठाइए क्योंकि न सिर्फ वह आपके साथी को चोट पहुँचाएगा बल्कि आपके संबंधों पर भी कुठाराघात करेगा और साथ ही आपकी विश्वसनीयता भी हमेशा हमेशा के लिए खतरे में पड़ जाएगी!

इसके अलावा, मैंने बहुत से लोगों को कहते सुना है कि 'मैं अपने साथी से प्रेम करता हूँ' और 'हमारे संबंध अच्छे हैं, हमारे बीच कोई समस्या नहीं है' लेकिन अगले ही वाक्य में वे कहते हैं कि वे अपने साथी के साथ धोखा करते रहे हैं या यह कि वे दूसरों के प्रति आकर्षण महसूस करते हैं और यहाँ तक कि यह भी कि वे किसी दूसरे पुरुष या महिला से प्रेम करते हैं। इसके जो स्पष्टीकरण वे देते हैं वे कुछ इस प्रकार होते हैं: 'प्रेम रहस्यमय तरीके से काम करता है' और 'प्रेम कब और कैसे हो जाता है कहा नहीं जा सकता, क्यों हो जाता है, समझना मुश्किल है; बस, वह हो जाता है!' आदि। इनमें से किसी भी स्पष्टीकरण से मैं सहमत नहीं हूँ।

मैं इस बात पर कतई विश्वास नहीं करता कि अपने साथी के साथ, आपके एकमात्र आत्मीय जीवन-साथी, आपकी पत्नी या पति के साथ आपके प्रेमपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और सुखद सम्बन्ध हैं- और उसके पश्चात आप किसी दूसरे व्यक्ति के प्रति वैसा ही आकर्षण महसूस करते हैं, उस सीमा तक भी कि आप उसके साथ यौन सम्बन्ध भी स्थापित कर सकते हैं! जी नहीं, मैं जानता हूँ कि मामला कुछ दूसरा होता है: आपके संबंधों में या आपके विवाह में कुछ कमी रह गई है, वह अपूर्ण है! कोई ऐसी चीज़ है, जिसकी आप कमी महसूस करते हैं और उसे बाहर तलाश करने की कोशिश करते हैं!

इन अनचाही भावनाओं से निपटने की दिशा में पहला कदम यह होगा कि एक तथ्य के रूप में उसे स्वीकार करें: आपके और आपके साथी के बीच कोई न कोई समस्या है। आपको उस कारण की तह तक जाना होगा, जिसके चलते आपके मन में वे विचार और भावनाएँ पैदा हुईं।

इसकी दो संभावनाएँ हो सकती हैं: या तो अभी-अभी कोई बात हुई है या फिर समस्या आपके संबंधों की शुरुआत से ही मौजूद थी।

हो सकता है कि आपके साथी का व्यवहार पिछले कुछ माह में बदला हो और आप उस व्यक्ति को मिस कर रहे हों, जिसके साथ आपने विवाह किया है या जिसके साथ आप रहते हैं। या फिर आपमें कोई परिवर्तन हुआ हो या आपके बीच कोई ऐसी बात हुई हो, जिसने आपको या अपने साथी के बारे में आपके नज़रिए को बदल दिया हो। कोई ऐसी नई ज़रुरत अवश्य पेश हुई है, जो अब पूरी नहीं हो पा रही है।

या फिर/और यह अधिक जटिल कारण है- आपका साथी तो हमेशा से ऐसा ही रहा हो और उसके कुछ रवैयों और आदतों को आपने कभी स्वीकार ही न किया हो। आपके दिलोदिमाग में शुरू से यह संदेह रहा हो, यह विचार कि आप अपने प्रेम की शक्ति से उसे बदल देंगे और यह सोचकर आधे मन से आप इस सम्बन्ध को जारी रखे हुए हों।

आपके मन में पैदा हो रहीं इन भावनाओं के पैदा होने का कारण एक बार पता चल जाने के बाद आपके लिए यह जानना ज़रूरी है कि उनका कोई इलाज संभव है या नहीं। यदि आप समझते हैं कि इलाज संभव है तो अपने साथी के साथ उस विषय पर खुलकर बात कीजिए। सारी बातों को विस्तार के साथ सामने रखिए, बताइए कि इस समस्या के चलते आप कैसा महसूस कर रहे हैं, यह भी कि उसके कारण आप किसी और के प्रति आकर्षण का अनुभव करने लगे हैं। धमकियाँ मत दीजिए या सामने वाले पर किसी प्रकार का दबाव मत डालिए- सिर्फ शान्ति के साथ अपनी बात रखिए!

लेकिन अगर आपको लगता है कि समस्या का कोई इलाज नहीं है और आप उसमें सुधार के लिए कई असफल प्रयास कर चुके हैं तो आसान रास्ता जानकर धोखा भर मत देते रहिए। जी नहीं! कुछ भी हो, हर हाल में नतीजों की परवाह किए बगैर बात कीजिए। अपने सम्बन्ध को तिलांजलि दे दीजिए और नया सम्बन्ध शुरू करने से पहले पिछले सम्बन्ध से आज़ाद और पाक-साफ़ हो लीजिए!

आपके लिए जो भी रास्ता उचित हो, मेरी नज़र में खुद को और दूसरों को धोखा देना उचित नहीं है और यह आपको किसी भी परिस्थिति में नहीं करना चाहिए। मुझे आशा है कि आप इस समस्या का समाधान कर लेंगे और अपने वास्तविक प्रेम-सम्बन्ध को प्राप्त करने में अवश्य सफल होंगे!

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