आश्रम आने के विषय में पूछताछ का एक उदाहरण, जिसे हमने अस्वीकार कर दिया – 5 नवंबर 2015

कुछ लोगों ने यह जानने में रुचि दिखाई है कि जब हम लोगों को आश्रम न आने के लिए प्रेरित करने की कोशिश करते हैं तो ठीक-ठीक क्या करते हैं। मैं आपके सम्मुख धार्मिक उद्देश्य से वृंदावन आने की इच्छुक एक महिला के साथ हाल ही में हुए वार्तालाप का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा हूँ।

दरअसल ज़्यादातर हम इसी कारण ‘नहीं’ कहते हैं। वैसे आजकल इस बारे में पूछताछ पहले से बहुत कम हो गई है क्योंकि हमने अपनी वेबसाइट पर ही इन बातों को साफ-साफ लिख रखा है। लेकिन फिर भी कभी-कभार हमें ऐसे ईमेल मिल ही जाते हैं और उन्हीं का एक उदाहरण नीचे दे रहा हूँ।

पूछताछ करते हुए उसने हमें ईमेल भेजा जिसमें ‘यहाँ आने का कारण’ लिखा था:

वृंदावन की यात्रा करना सदा से मेरा सपना था। मुझे आशा है कि ईश्वर की कृपा से मैं यह यात्रा कर सकूँगी। आश्रम आकर और कुछ दिन वहाँ आश्रम का जीवन बिताकर मुझे बहुत प्रसन्नता होगी। मैं वहाँ के मंदिरों में भगवान के दर्शन करना चाहती हूँ, हरिनाम जपना चाहती हूँ और परिक्रमा करना चाहती हूँ।

उसका इतना भर बताना हमारे लिए पर्याप्त था कि हमारी पटरी नहीं बैठ पाएगी। इसलिए हमने उसे यह जवाब भेजा:

आश्रम आने की इच्छा प्रकट करने के लिए हम आपका शुक्रिया अदा करते हैं। हमें आपकी पूरी जानकारी प्राप्त हो गई है।

दुर्भाग्य से हमें नहीं लगता कि हमारा आश्रम आपके निवास के लिए उपयुक्त स्थान होगा। हम अधार्मिक और नास्तिक लोग हैं और ईश्वर पर विश्वास नहीं रखते।

हमारे यहाँ किसी तरह का कोई धार्मिक समारोह नहीं होता और न ही पूजा-पाठ इत्यादि की कोई व्यवस्था है।

हमे पूरा विश्वास है कि वृंदावन में आपको कई दूसरे स्थान मिल जाएँगे जहाँ आप प्रसन्नतापूर्वक रह सकेंगी क्योंकि वे अपने यहाँ आध्यात्मिक वातावरण और दूसरे धार्मिक व्यक्तियों का साथ सुनिश्चित करते हैं।

क्योंकि हम नास्तिक हैं, ईश्वर को नहीं मानते, हमें लगता है कि आप वास्तव में हमारे यहाँ उपलब्ध वातावरण में प्रसन्न नहीं रह सकेंगी। हमारा अनुभव है कि धार्मिक कारणों से वृंदावन आने वाले लोग हमारे यहाँ आकर प्रसन्न नहीं होते और हमारे दूसरे मेहमानों को अपने दृष्टिकोण से प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। उन्हें धार्मिक चर्चा आदि में ज़्यादा रुचि होती है और हमारे यहाँ चर्चा का विषय अक्सर इसके विपरीत होता है। हमारे विचार में यह स्थिति दोनों पक्षों के लिए सुविधाजनक नहीं होगी।

बहुत सादा और स्पष्ट लेकिन इसके बाद भी इतना नम्र और संजीदा कि किसी को बुरा न लगे। तो इस तरह की पूछताछ पर हम उपरोक्त आशय का जवाब लिखने की कोशिश करते हैं।

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