हर मुश्किल में भी अपना आत्मसम्मान बनाए रखें! 4 सितंबर 2014

आत्मविश्वास

कल मैंने ज़िक्र किया था कि एक सफल व्यवसाय चलाने के लिए आपको आत्माभिमान, आत्मगौरव (खुद अपने आपसे प्रेम करने की) और आत्मसम्मान की ज़रूरत होती है। तभी आप अपने दिल का कहा मानते हुए अपना काम भी करेंगे और आपको कोई अपराधबोध भी नहीं होगा कि आपने अपने दैनिक काम का मेहनताना क्यों लिया। बहुत से लोगों के लिए एक कठिन विषय मगर साथ ही बहुत महत्वपूर्ण भी! लेकिन इसे गंभीरता से लें- वरना हर कोई आपकी भलमनसाहत का फायदा उठाने की कोशिश करेगा!

हम इस बात की चर्चा कर चुके हैं कि व्यापार-व्यवसाय में यह किस तरह सामने आता है। लोग आपसे कोई चीज़ मुफ्त प्राप्त करना चाहते हैं और अगर आप पर्याप्त भले या भोले हैं तो वे अपने उद्देश्य में सफल हो जाते हैं। एक बार दे देने के बाद आप वापस नहीं लौट सकते और देते चले जाते हैं, बहुत ज़्यादा मुफ्त दे बैठते हैं और फिर दुखी और गुस्सा होते रहते हैं मगर कुछ नहीं कर पाते-जो चीज़ आप बेच रहे हैं उसकी कीमत के बारे में अनिश्चित, उसके महत्व के बारे में संदेहग्रस्त।

परिवार और मित्रों के बीच मामला पैसे का नहीं होता। कम से कम अक्सर नहीं होता। अक्सर मुद्दा यह होता है कि आपने दूसरों के लिए क्या किया और खुद अपने लिए कितना करते हैं। अपने व्यक्तिगत सत्रों में अक्सर मैं ऐसे लोगों से मिलता हूँ, जिन्हें आत्माभिमान या अपने आपसे प्रेम नहीं होता और अपनी नज़र में खुद की कोई कीमत ही नहीं होती क्योंकि उनके मन में दबा हुआ तीखा गुस्सा और अक्सर परिवार के सदस्यों या कुछ मित्रों के साथ अनबन होती है। वे देते हैं, देते हैं, देते चले जाते हैं, जैसे देते रहना ही उनका काम हो- लोग भी उन्हें इसी लायक समझने लगते हैं! लेकिन उनके मन में यह एहसास मौजूद होता है कि उनका शोषण हो रहा है, आसपास के लोग आखिरी बूँद तक चूस लेना चाहते हैं और बदले में उन्हें कुछ भी प्राप्त नहीं होता।

पहली सीढ़ी है आत्माभिमान और आत्मगौरव (खुद से प्यार करना)। यह तब होगा जब आप अपने आपकी कद्र करेंगे, अपने समय और अपने श्रम की कीमत आँकेंगे, आप जो कुछ कर रहे हैं, उसका आदर करेंगे। आप अपने शरीर, मन-मस्तिष्क और अपने काम से उनकी अच्छाइयों और उनकी बुराइयों सहित प्यार करते हैं। लेकिन आपको एक और चीज़ की दरकार होगी: लोगों के सामने उस आत्मगौरव को प्रकट करने की क्षमता और साहस की! और यह क्षमता और साहस ही आपका आत्मसम्मान या स्वाभिमान है जिसे आपको दूसरों के सामने व्यक्त करते रहना है।

जब आप पूरे आत्मविश्वास के साथ बता सकेंगे कि दूसरों के लिए कुछ करने की आपकी सीमा क्या है। जब आप जानेंगे और उन्हें बताएँगे कि इस बिंदु के बाद आपको अपने लिए समय चाहिए या आपको लगे कि इसके आगे वे आपके काम की या आपके श्रम की बेईज्ज़ती कर रहे हैं, उसकी उचित कीमत नहीं लगा रहे हैं और आपके साथ नाइंसाफी कर रहे हैं।

अगर आपको इस विषय में कोई दिक्कत रही है तो यहाँ तक पहुँचना काफी मुश्किल होगा लेकिन यह संभव है। आपको अपने आप से अपने प्रेम को मजबूती प्रदान करनी होगी यानी कि आपको अपने आत्माभिमान और आत्मगौरव को ऊँचा उठाना होगा। जब भी आपको लगे कि कोई दूसरा आपका अनुचित लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है, जब आपको लगे कि आप पर किसी काम को करने का दबाव बनाया जा रहा है या किसी काम को कम कीमत पर करने का दबाव बनाया जा रहा है तो सोचने के लिए अपना समय लीजिए। जो आप कर रहे हैं उससे एक कदम पीछे हट जाइए, कुछ समय के लिए अपने आप से माफ़ी माँगिए कि आप पूर्वनिर्धारित तरीके से काम नहीं कर रहे हैं और शांत हो जाइए, सुकून अनुभव करने का प्रयास कीजिए। अगर आपकी भावनाएँ तीव्र होंगीं तो आप ठीक ढंग से सोच नहीं पाएँगे, और आपके विचारों में स्पष्टता नहीं होगी और आप उचित निर्णय नहीं ले पाएँगे।

एक बार शांत होने के बाद आपको विश्लेषण करना होगा कि क्या दूसरों के दबाव के चलते आपके भीतर वैसी भावनाएँ पैदा हो गई हैं, कुछ ऐसा करने का दबाव जो आपकी इच्छा या सहूलियत में हस्तक्षेप करता है। अगर ऐसी बात है तो उस सीमा को टटोलिए जहाँ आप सहूलियत महसूस करते हैं, जहाँ तक आप ख़ुशी-ख़ुशी वह काम कर सकते हैं। अपने आपको याद दिलाते रहिए कि आपकी इतनी कीमत तो है कि आप खुद अपने आपके लिए, अपने आत्मसम्मान के लिए खड़े हों। और उसके बाद उस स्थिति पर वापस लौटिए।

शांत रहें मगर उसी जगह, जहाँ आपको ठीक लगता है, जहाँ आपकी इच्छा है। आप देखेंगे कि एक बार आप सफलता पूर्वक इस प्रक्रिया से गुज़र जाएँगे तो आपको बड़ा अच्छा लगेगा! भले ही वह अपनी सास से एक छोटी सी बात कहना हो कि पारिवारिक मीटिंग के लिए आप एक और मिठाई तैयार नहीं कर सकते क्योंकि आप अपने बच्चे के साथ खेल रहे हैं, अपने काम में व्यस्त हैं और दो दूसरे व्यंजन पहले ही आप बना चुके हैं! आपके लिए और आपके आत्माभिमान, आत्मसम्मान के लिए यह एक छोटी सी जीत होगी!

तो, शुरू कीजिए-मजबूत बनिए, अपना महत्व पहचानिए और अपने आपसे प्रेम कीजिए!

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