33 सदस्यों का एक भारतीय संयुक्त परिवार – हमारे स्कूल के बच्चे – 20 दिसंबर 2013

आज मैं आपको एक साथ तीन बहनों से मिलवाना चाहता हूँ: अनुष्का, दिव्यान्शी और उज्ज्वला। जब हमने उनके घर पहुंचकर उनके आँगन में उनके परिवार के बारे में तफतीश की तो बहुत से लोग इकट्ठा हो गए और सबसे पहले हमें उन लोगों के एक बहुत बड़े समूह को अलग करते हुए आगे बढ़ना पड़ा: तीनों लड़कियां एक संयुक्त परिवार में रहती हैं। 33 लोगों का विशाल भारतीय संयुक्त परिवार!

आखिर हम उनके सबसे नजदीकी रिश्तेदारों, यानी माता-पिता और भाई-बहन, तक पहुँचने में कामयाब हुए और तब हमें पता चला कि उनकी एक और बहन है जो हमारी बेटी, अपरा से तीन दिन पहले पैदा हुई है, इस तरह वह इसी जनवरी में दो साल की हो जाएगी। अनुष्का तेरह साल की है, दिव्यान्शी दस और उज्ज्वला छह साल की है।

लड़कियों के पिता ने बिजली का काम सीखा हुआ है लेकिन वह यह काम नहीं करता। बिजली का काम बहुत अस्थिर और अस्थाई है और वह महीने में अधिकतर दिन बेकार ही बैठा रह जाता था। इसलिए उसने मथुरा की एक साड़ी फैक्टरी में काम करना शुरू कर दिया, जिसमें उसे एक कन्व्हेयर बेल्ट पर खड़ा रहकर एक लय में हाथों का वही-वही हस्त-संचालन करना पड़ता है। लेकिन इस काम से उसे हर माह 4000 रुपये, यानी लगभग 65 डालर की आय हो जाती है। छह सदस्यों के परिवार के लिए यह रकम पर्याप्त नहीं है लेकिन कम से कम विश्वसनीय और नियमित तो है ही।

आप पूछ सकते हैं कि परिवार के बाकी 27 लोगों का क्या हाल है? लड़कियों के पिता सहित ये लोग छह भाई हैं, जिनमें से चार की शादी हो चुकी है। इसके अलावा उनके बच्चे भी हैं और माँ भी साथ रहती है। छहों भाई कोई न कोई काम करते हैं और सबकी लगभग एक जैसी, अपर्याप्त आमदनी है। बूढ़ी माँ को पेंशन मिलती है क्योंकि उसका दिवंगत पति सरकारी नौकरी में था। मकान माँ के नाम पर है और माँ ही है जो अपनी पेंशन में से कुछ रकम बचा लेती है। इस बचत से वह मकान में कुछ और कमरे बनाना चाहती है अन्यथा, जैसा कि अनुष्का की माँ बताती है, चार हजार रुपयों की आमदनी में मकान को और विस्तार अधिक देना असंभव है।

ऐसी स्थिति में उनका परिवार इस बात से खुश है कि उनकी तीन लड़कियां हमारे स्कूल में पढ़ रहीं हैं और उन्हें स्कूल फीस, किताबों और वर्दियों पर एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ता। इसके अलावा वे वहाँ से पेट भर खाना खाकर घर लौटती हैं।

अनुष्का बहुत शर्मीली लड़की है। अपने इस स्वभाव के चलते स्कूल में उसे बहुत दिक्कत पेश आती है क्योंकि कोई विषय समझ में न आने पर वह उसका अर्थ दोबारा बताने के लिए शिक्षकों से कह नहीं पाती। इसके बावजूद वह छठवीं कक्षा में पहुँच चुकी है और इस तरह हमारे स्कूल की सबसे ऊंची कक्षा में पढ़ रही है। दिव्यान्शी का स्वभाव कुछ अलग है। अनुष्का की तुलना में वह ज़्यादा बातचीत कर लेती है और खुले मन की लड़की है। शिक्षक उससे प्रसन्न रहते हैं और पढ़ाई के प्रति उसकी लगन देखकर उसकी तारीफ करते हैं। एल के जी में पढ़ने वाली उज्ज्वला अभी इतनी छोटी है कि उसके बारे में और उसकी पढ़ाई के बारे में निश्चित रूप से कुछ भी कहना मुश्किल है। लेकिन इतना हम जानते हैं कि वह बहुत खुशमिजाज़ और चंचल लड़की है और स्कूल में अपना समय बड़े उल्लास के साथ व्यतीत करती है!

हम प्रयत्न कर रहे हैं कि इन बच्चों का भविष्य अच्छा हो और अगर हमारे इस प्रयास में आप भी हमारी मदद करना चाहते हैं तो किसी एक बच्चे को गोद लेकर या बच्चों के एक दिन के भोजन का खर्च वहन करके आप ऐसा कर सकते हैं। अन्यथा आप मनचाही रकम दान करके भी ऐसा कर सकते हैं।

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