पूरी ईमानदारी के साथ बेईमानी – भारत में टूर-गाइडों का कमीशन व्यापार – 21 जुलाई 2015

आश्रम

कल मैंने आपको हमारे यहाँ से काम पाने की आशा से आए एक सरकारी मान्यता प्राप्त टूर गाइड के साक्षात्कार के बारे में बताया था। उसका कहना था कि लोग उसे जबरदस्ती पैसे दे देते हैं तो मजबूरी में लेना पड़ता है। मैंने आपसे कहा था कि आम तौर पर टूर गाइड, सीधे तौर पर या घुमा-फिराकर पैसों की उम्मीद रखते ही हैं। आज मैं जो उदाहरण आपके सामने रखूँगा, उससे आपके सम्मुख स्पष्ट हो जाएगा कि कैसे यह आदमी भी कोई अलग बात नहीं कह रहा था- बल्कि उसे लग रहा था कि वह हम पर कोई एहसान कर रहा है।

‘टिप’ (बख्शीष) पर उस आदमी के इस रवैये से मैं यह जान गया कि यह आदमी हम लोगों के लिए किसी काम का नहीं है। उसने आगे जो कहा, उससे मेरा यह शक सही सिद्ध हो गया:

‘फिक्र न करें, आप ब्राह्मण हैं, मैं ब्राह्मण हूँ, इसलिए मैं आपके साथ काम करने के लिए तैयार हूँ। मैं इन लोगों को बाज़ार की सैर कराऊँगा और कमीशन का हिस्सा नियमित रूप से लाकर आपको देता रहूँगा। हम लोग ब्राह्मण हैं, मै ईमानदारी से कमीशन का आपका हिस्सा आप तक पहुँचाता रहूँगा!”

अरे भाई, मुझे पता है कि भ्रष्टाचार के सभी कार्य पूरी ईमानदारी से किए जाते हैं! उसी तरह यह आदमी भी ईमानदारों का सरताज नज़र आ रहा था! वह पूरी ईमानदारी के साथ हमारे मेहमानों को ताजमहल के बिल्कुल आसपास स्थित अत्यधिक महँगी दुकानों पर ले कर जाएगा, उनको विश्वास दिलाएगा कि इन दुकानों द्वारा बेची जा रही घटिया वस्तुएँ सबसे अच्छी हैं, वैसी यादगार-निशानियाँ आगरा में कहीं और नहीं मिल सकतीं और उनसे उन दुकानदारों को दस गुना कीमत दिलवाएगा! पूरी ईमानदारी से वह दुकानदार से अपना कमीशन लेगा, हमारा हिस्सा अलग निकालकर बाकी अपनी जेब के हवाले करेगा!

इस प्रकार बहुत से लोग इन परिस्थितियों का लाभ उठाते हुए काफी पैसा कमा लेते हैं, लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। हम ऐसे आदमी के साथ अपने मेहमानों को कैसे भेज सकते हैं?

बिदा लेने से पहले उस आदमी ने कहा: “यह अच्छा होगा कि एक ब्राह्मण दूसरे ब्राह्मण की मदद करे। मैं आपकी मदद करूँ, आप मेरी!”

मेरा मित्र इस आदमी को हमसे मिलवाने लाया था और मेरी बगल में बैठा था। सिर्फ यही कारण था कि मैंने अपने आपको यह कहने से रोक लिया: “आपको गलत जानकारी प्राप्त हुई है, मैं तो अछूत या निम्न जाति से हूँ! और अब आपने मेरे घर में पानी भी पी लिया है और चाय भी।”

मैं अपने मित्र को किसी असुविधाजनक स्थिति से दूर रखना चाहता था इसलिए मैंने इस तरह की कोई बात नहीं की। लेकिन मैंने फोन पर उससे साफ कह दिया कि ऐसे व्यक्ति की हमें ज़रूरत नहीं है। इसलिए जब तक हमें कोई ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिल जाता, जिस पर हम वाकई पूरा भरोसा कर सकें, तब तक हमारे मेहमानों की सभी यात्राओं में यशेंदु या पूर्णेन्दु ही साथ जाते रहेंगे!

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