दीपों, मिठाइयों और मित्रों के साथ दीवाली का हर्षोल्लास – 11 नवंबर 2015

उत्सव

आज दिवाली का दिन है, प्रकाश का भारतीय उत्सव! होली के साथ यह त्योहार साल भर के दो सबसे बड़े उत्सवों में से एक है और स्वाभाविक ही सभी इसके आने की राह देखते हैं। और हमारे जर्मन अतिथि भी योजना बनाकर इसी अवसर का आनंद उठाने भारत आए हैं जिससे वे भी इस समारोह का हिस्सा बन सकें।

पिछले कुछ दिनों से ही हमारे मित्र शहर के वातावरण में क्रमशः हो रहे परिवर्तन का अनुभव कर पा रहे हैं। सभी स्कूलों में अभी त्योहार की छुट्टियाँ चल रही हैं और बच्चे स्वच्छंद होकर परिवार सहित ख़रीदारी करने, रिश्तेदारों से मिलने और त्योहार की तैयारियों के सिलसिले में बाहर निकल आए हैं। धीरे-धीरे पूरे शहर में लोग अपने घरों के सामने वाले हिस्से को रंगबिरंगे बल्बों की रोशनी से सजाते जा रहे हैं।

दो दिन पहले हमारे एलेक्ट्रिशियन ने आकर आश्रम को भी उसी प्रकार सजाना शुरू कर दिया था और कल शाम से हम प्रकाश से रोशन हुए अपने आश्रम के भवन, उद्यान, स्कूल और रेस्तराँ के सौंदर्य पर मंत्र-मुग्ध हो रहे हैं।

इसके साथ ही आश्रम की रसोई भी पूरी तेज़ी के साथ दिवाली की मिठाइयाँ बनाने में लग चुकी हैं। कल सारा दिन हमारे रसोइए बाहर से बुलाए अतिरिक्त कारीगरों के साथ मिलकर स्वादिष्ट से स्वादिष्ट मिठाइयाँ बनाने के उद्देश्य से आटा बेलने, विभिन्न मसालों को काटने-पीसने, उनका मिश्रण तैयार करने, अलग-अलग मिठाइयों को तलने या बेक करने में जुटे हुए थे! पूरा आश्रम कई तरह की बहुत शानदार खुशबुओं से भर गया है और हमारे जर्मन मित्रों का समूह उन्हें अपनी पहली चाय के साथ चख भी चुका है और भोजन के समय भी उनका आस्वाद लेने में मस्त है!

आज सुबह से साफ-सफाई का काम ज़ोर-शोर से चल रहा है और शाम के लिए सभी अपने अच्छे से अच्छे कपड़े तैयार करने में लगे हैं। हम बस अभी तेल के दिये निकालने ही वाले हैं। उनको तैयार करना पड़ता है। पहले रुई से बत्तियाँ बनाई जाती हैं और दियों में तेल भरकर बत्तियों को जलाया जाता है। पूरे आश्रम परिवार और हमारे मेहमानों के लिए इतना काम सारी दोपहर बिताने के लिए पर्याप्त है, और यह सब सचमुच बड़ा दिलचस्प होता है!

अंत में, रोशनी से चमकते आश्रम की सुंदरता में, शायद अच्छे से अच्छे कपड़े पहनकर और इस दिन को कुछ खास महसूस करते हुए हम सब साथ मिलकर अपने काम की सुंदरता का आनंद लेंगे। शानदार डिनर, शायद कुछ नाच-गाना भी और ढेर सारी मस्ती!

और हालांकि उसे सर्दी हो गई है, फिर भी अपरा, जो आश्रम की सबसे छोटी सदस्य है, इस मौज-मस्ती के केंद्र में बनी हुई है!

मैं आप सभी को एक अत्यंत उल्लासपूर्ण दीवाली की शुभकामनाएँ देता हूँ और आशा करता हूँ कि जिस तरह हम यहाँ पूरी मौज-मस्ती के साथ दीवाली मना रहे हैं, आपकी दीवाली भी वैसी ही खूबसूरत हो और यह समय आपके जीवन का अविस्मरणीय समय बन जाए!

सभी को बहुत सारा प्यार!

यहाँ आप हमारे दिवाली समारोह के चित्र देख सकते हैं।

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