हमें घनिष्ट रूप से जुड़ना पसंद है – एक कैनेडियन योग दल का आश्रम आगमन – 13 दिसंबर 2015

कैनेडियन योग दल

पिछले हफ्ते हम आश्रम में कुछ बहुत शानदार लोगों के साथ पूरी तरह व्यस्त रहे: हमारे आश्रम में कैनेडा से एक योग-दल आया था! मुझे कहना चाहिए कि एक बार फिर हमें अपना घर कुछ बहुत सुंदर लोगों के साथ साझा करने का अवसर मिला था!

तीन साल पहले एक योग शिक्षिका हमारे आश्रम में आई थी और उसने हमारे योग-अवकाश शिविर में हिस्सा लिया था। उस समय बहुत से दूसरे लोग भी यहाँ आए थे। उन्होंने यहाँ खूब मौज-मस्ती की थी और विश्रांति लेने के बाद तरोताज़ा होकर वापस गए थे। उनमें से दो लोगों का पुनः स्वागत करने का अवसर हमें इसी साल पहले ही मिल चुका था और यह ऐसा तीसरा सुअवसर था! जब से एलेक्सिस यहाँ से गई थी, उसे हरदम लगता था कि वह पुनः हमारे आश्रम अवश्य आएगी और संभव हुआ तो अपने कुछ साथियों को लेकर भी आएगी।

इस तरह बारह लोगों का एक दल, उसी दिन हमारे आश्रम पहुँचा जिस दिन हम खुद अपनी जर्मनी यात्रा से वापस आए थे। यह दल हमारे योग-विश्रांति शिविर में हिस्सा लेने आया था। हमें ऐसे संबंध बनाना बहुत पसंद है और यह और भी अच्छा लगता है, जब वे कई दूसरे लोगों को लेकर भी आते हैं, ऐसे लोगों को, जो शायद अकेले भारत आने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे!

हमने उनके लिए ताजमहल देखने का इंतज़ाम किया था, जो दिन भर का आगरा प्रवास था। और एक दिन वे हमारे छोटे से शहर के बाज़ारों में घूमते-फिरते रहे, मंदिर देखे और आसपास के दर्शनीय स्थलों का दौरा किया। लेकिन ज़्यादातर समय वे आश्रम की दिनचर्या का जायज़ा लेते हुए गुज़ारते थे। वे आश्रम की दैनिक गतिविधियों से इतने प्रभावित थे कि न सिर्फ उसे बारीकी से देखने-समझने की कोशिश करते बल्कि खुद भी उसके साथ अंतरंग रूप से जुड़ने की और उसके अनुसार ढलने की कोशिश भी करते। स्कूल देखने के बाद वे बच्चों को खाना परोसने में मदद करने लगे, बच्चों की योग कक्षा में शामिल हुए और निश्चित ही, हमने आश्रम में तैयार सुस्वादु भोजन भी साथ-साथ किया। मैं उन्हें अपना निर्माणाधीन रेस्तराँ दिखाने ले गया और उसे लेकर हमारी योजना की जानकारी दी। इसके अलावा, सबने आयुर्वेदिक मालिश और विश्रांति संबंधी उपचार की सेवाओं का लाभ उठाया और शरीर के उन बिंदुओं पर ख़ास वर्जिश की, जहाँ अक्सर दर्द हो जाया करता है।

हमारे मित्र ने और उनके सहयोगी ने मिलकर अपनी योग कक्षाएँ लीं और कुछ और सामूहिक सत्रों का संचालन किया और एक दिन मैंने भी सत्र में शामिल होकर समूह के सदस्यों के साथ बातचीत की। एक आध्यात्मिक गुरु और उपदेशक के रूप में बिताई गई अपनी पिछली ज़िंदगी के अनुभव उनके साथ साझा किए और बताया कि वहाँ से निकलकर आज तक की-जो कुछ भी मैं बन सका हूँ, उसकी- यात्रा कैसी रही।

वास्तव में उन बहुत ख़ास लोगों के साथ हमारा समय बड़ा शानदार बीता। कल दोपहर बाद कैनेडा की फ्लाइट पकड़ने के लिए उन्होंने आश्रम से बिदा ली। गुडबाय कहते हुए बहुत सी आँखों में एक साथ आँसू आ गए-और हम अभी से सोचने लग गए हैं कि वे जल्द से जल्द यहाँ आएँ और हमें उन लोगों का स्वागत करने का मौका मिले।

मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि खुले दिल के, खुशमिजाज़ लोगों से और उन लोगों से, जिनमें नई से नई बातें जानने की उत्सुकता होती है और जो भारत को भीतर से जानना चाहते हैं, मुलाक़ात हमेशा एक अद्भुत अनुभव होती है। वे खुश हैं, भारत में आकर और हमसे मिलकर आनंदित हैं, यही हमारा पुरस्कार है-और मैं जानता हूँ, वे भी आश्रम में बिताए समय की कुछ बेहद अविस्मरणीय यादें लेकर घर जा रहे हैं!

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