छोटी सी डांसर अपरा ने दिया स्वतः प्रवर्तित नृत्य प्रदर्शन – 9 नवम्बर 2015

साल में एक बार, हमारे शहर में एक मेला लगता है, जिसे शहर के लोग मेरी किशोरावस्था के समय से ही मनाते चले आ रहे हैं। यह मेला ‘बाल मेला’ कहलाता है और पूरे शहर के सभी स्कूल इसमें होने वाली कला प्रतियोगिताओं, नृत्य और नाट्य प्रदर्शन इत्यादि और कई तरह के दूसरे कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर इस कार्यक्रम को आकर्षक बनाते हैं।

जब मैं स्कूल में था, तब हम भी हिस्सा लिया करते थे और मुझे याद है कि मैंने कई बार मंच पर प्रस्तुति दी थी। बच्चों को मैदान के एक कोने में स्टाल्स लगाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता था। एक वर्ष मैंने चाय और नाश्ते की दुकान लगाई थी-हालांकि नाश्ता मेरी माँ ने घर पर तैयार किया था। बाद में मेरे पास कैमरा भी आ गया था और उस साल मैंने लोगों की बहुत फोटो खींचीं। बाद में मैं उन्हें डिवैलप करवाके उनके घर पहुँचाता था, जिसकी मुझे संतोषजनक कीमत मिल जाती थी।

जैसा कि मैंने बताया, हमारी फ़्रांसीसी मित्र मेलनी भी लंबे समय के लिए आश्रम आई हुई है। शाम को वह स्वयं भी फायर-डांस (अग्नि नृत्य) प्रस्तुत करके हमारा और हमारे अतिथियों का मनोरंजन करती है, जिसमें वह जलते हुए गेंद को अपने चारों तरफ घुमाते हुए नृत्य करती है। वह सचमुच दर्शनीय होता है, और यह पता चलने पर कि ‘बाल-मेला’ शुरू होने वाला है, पूर्णेंदु ने अपने मित्र से बात की, जोकि इस कार्यक्रम का आयोजक भी था। निश्चित ही समारोह की यह शुरुआत बहुत शानदार रही!

फिर, हमारे मेहमानों का काफी बड़ा समूह हमारे साथ था और हम उन्हें अपने शहर की कुछ रौनक भी दिखाना चाहते थे! इसलिए पूर्णेंदु उन सभी को, यानी मेलनी, हमारे अन्य अतिथि और स्वाभाविक ही, अपरा सहित आश्रम के सभी बच्चों को उस समारोह में ले गया।

वहाँ, सभी ने बहुत अच्छा समय बिताया। आम तौर पर जैसा कि भारत में होता है, नृत्य का कार्यक्रम पूर्व-घोषित समय से काफ़ी देर बाद शुरू हुआ, किन्तु दर्शकों को उनके सब्र का बड़ा अच्छा फल मिला-उस विशाल मंच पर मेलनी के शानदार फायर डांस के रूप में। अपरा ने जब नृत्य देखा तो वह भी मंच पर जाकर डांस करने के लिए मचलने लगी।

तब पूर्णेन्दु ने एक बार फिर अपने मित्र से बात की और जल्द ही उद्घोषक ने हमारे बाल-सितारा का नाम घोषित किया! वह मंच पर आई और अपने एक प्रिय गाने पर अपना नृत्य प्रस्तुत किया, जिसे उसने पहले-पहल इन्हीं गर्मियों में सीखा था। उसके नृत्य को बहुत सराहा गया और कार्यक्रम में भागीदारी करने के ईनाम के तौर पर उसे एक मैडल और कप मिला, जिसे लेकर वह खुशी-खुशी और सगर्व घर लौटी!

जब वे सब वापस लौटने को थे, आयोजकों ने हमारे सभी अतिथियों को भी मंच पर आमंत्रित किया। हम आज सबेरे नाश्ते के समय भी वहाँ के अनुभवों का ज़िक्र करते हुए आपस में हँसी-मज़ाक करते रहे कि किस तरह आयोजकों ने उन्हें समारोह का विशिष्ट अतिथि बनाया और कैसे वे बड़ी शान से चलते हुए स्टेज पर पहुँचे और स्वागत समारोह में गंभीर भागीदारी की!

ओह, और अब हम दोनो, अपरा के माता-पिता, गर्व से अभिभूत हैं कि हमारी बच्ची सैकड़ों अपरिचित लोगों के बीच बिना किसी पूर्व-तैयारी के, उन्हीं कपड़ों में, जिन्हें उसकी माँ ने जल्दबाज़ी में पहना दिया था, पूरे आत्मविश्वास के साथ स्टेज पर जाकर अपना नृत्य प्रस्तुत कर सकती है! अपरा को भी बहुत मज़ा आया और आज मैं गर्व से कह सकता हूँ कि वह मेरी बेटी है, एक ऐसे बाप की बेटी, जो स्वयं अपनी किशोरावस्था और युवावस्था में विशाल जनसमूह के बीच, सैकड़ों मंचीय कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुका है।

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