योग बाज़ार का घपला – योग कक्षा को चुनना जैसे दूध खरीदना! 17 नवम्बर 2014

योग

अपने व्याख्यानों, कार्यशालाओं में और अपने ब्लॉगों में भी मैंने कई बार ज़िक्र किया है कि पश्चिमी दुनिया के साथ मेरे संपर्क की शुरुआत में मुझे एक प्रश्न सदा उलझन में डाल देता था: 'आप कौन सा योग सिखाते हैं?'

यशेन्दु के साथ भी कई बार इसी तरह की बातें होती रही हैं और निश्चय ही, आज भी यही स्थिति बनी हुई है। इसलिए, जब कुछ सप्ताह पहले यशेन्दु ने अपने किसी प्रतिभागी द्वारा पूछे गए इस सवाल का-और उसके बाद नीचे दी गई चर्चा का-ज़िक्र किया, हम हँसे बिना न रह सके!

जब कक्षा के बीच यही प्रश्न पूछा गया तो यशेन्दु ने हमेशा की तरह जवाब दिया था, 'जस्ट योग' ('just yoga')। वह महिला कुछ उलझन में पड़ गई और मन ही मन उसने समझ लिया कि हम लोग 'हठ योग' सिखाते हैं। क्योंकि सभी प्रतिभागी स्वस्थ थे और उत्साह से भरे हुए थे, जब यशेन्दु ने पुनः रवानी में आते हुए तेज़ी के साथ अगले अभ्यास कराने शुरू किए तो स्वाभाविक ही वह महिला भी बड़ी खुश हुई। सत्र के बाद महिला ने उससे पूछा कि क्या उसने भी किसी पॉवर योग ('power yoga') शिक्षक से योग सीखा है?

कुछ देर की उलझन के बाद हम उसके साथ हँसने लगे।

हमारे विचार में कोई विशेष योग नहीं होता है। हमारे योग का कोई ख़ास नाम, कोई ब्रांड या कोई विशिष्ट लक्षण नहीं है। यह योग है, सिर्फ योग, जिसे हमने अपने जीवन की शुरुआत से सीखा है।

इसकी तुलना आप दूध खरीदने से कर सकते हैं। पहले सिर्फ दूध होता था। सबको पता होता था कि दूध गाय से प्राप्त होता है और आज भी गाय ही दूध दे रही है। पहले आप दूध खरीदने बाज़ार जाते थे, दूध मांगते थे और आपको वही मिल जाता था। अब आप बाज़ार जाएँ तो आपको स्किम्ड मिल्क, फुल-फैट मिल्क, हाफ-फैट मिल्क, पाश्चराइज्ड मिल्क, फैट-फ्री मिल्क, ताज़ा, कई दिनों तक खराब न होने वाला आदि कई प्रकार का दूध मिल जाएगा! इसलिए जब आप दूध खरीदने बाज़ार जाते हैं तो आपको बताना पड़ता है कि कौन सा दूध आप खरीदना चाहते हैं!

यही मामला आजकल योग का भी है। पॉवर योग है, अय्यंगार योग है, हॉट योग है, हठ योग, अष्टांग योग, फ्लो योग, मैसूर योग, एक्रो योग, और न जाने कितने प्रकार के योग हैं। वे सिर्फ ‘योग’ नहीं रह गए हैं।

यहाँ हम आज भी दूध खरीदते हैं। और उसी तरह योग खरीदते हैं। यह सिर्फ हठ योग ही नहीं है कि आप उसे सिर्फ शारीरिक व्यायाम समझ लें और उसका अभ्यास करके शरीर को लचीला और मज़बूत बना लें। हमारे जीवन में योग का इससे अधिक महत्वपूर्ण स्थान है। यह आपके दैनिक व्यवहार का प्रश्न है, आपकी मानसिकता पूर्वाग्रहों, आपके विचारों और भावनाओं का प्रश्न!

निश्चय ही, अगर वह आपको स्वस्थ रखता है, आपके संदेहों को दूर करता है तो आपकी जो मर्ज़ी हो, नाम दे लें। लेकिन हम उसे सिर्फ योग कहेंगे और हमेशा आपको समझाने की कोशिश करते रहेंगे कि हम उसे सिर्फ ‘योग’ ही क्यों कहना चाहते हैं!

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