मैं घर से किया जाने वाला अपना काम (व्यवसाय) क्यों पसंद करता हूँ – 22 जनवरी 2015

जबकि काम के बारे में लिखते हुए कल ही मैंने आपको बताया था कि क्यों आपको अपने काम से प्रेम होना चाहिए, मुझे लगता है कि खुद मुझे भी अच्छी तरह सोच-समझकर अपनी परिस्थिति का आकलन करना चाहिए। क्योंकि मैं इस बात में विश्वास रखता हूँ कि हर एक को सकारात्मक समाचार और सुखद अनुभूतियों को दूसरों के साथ साझा करना चाहिए, मैं आज अपने विचार और भावनाएँ आपके साथ साझा करना चाहता हूँ!

सबसे पहली बात तो यह कि मुझे यह बड़ा अच्छा लगता है कि काम करने के लिए मुझे कहीं बाहर नहीं जाना पड़ता। यहाँ मैं विदेशों में आयोजित अपनी कार्यशालाओं या व्याख्यानों के बारे में बात नहीं कर रहा हूँ- वैसे भी वह अब मेरा मुख्य काम नहीं रह गया है। मुख्यतः मैं अपने घर से ही, कंप्यूटर पर अपना काम करता हूँ और आश्रम आए हुए मेहमानों के संपर्क में रहता हूँ और उनके साथ काम करता हूँ।

कुछ लोग कहते हैं कि वे कभी भी घर से अपना काम या व्यवसाय करना नहीं चाहेगे। वे अपनी कार्यालयीन ज़िंदगी और अपनी निजी ज़िंदगी के बीच स्पष्ट दूरी बनाए रखना पसंद करते हैं। मेरे खयाल से इसीलिए कुछ लोगों के दोहरे व्यक्तित्व होते हैं: एक अपने काम के लिए और दूसरा अपनी निजी ज़िंदगी के लिए! ये लोग अपने कार्यालय में ऐसे मित्र नहीं बनाते जो उनकी निजी ज़िंदगी में भी मित्र हो सकें!

मेरे लिए मेरा सारा घर ही मेरा काम है और मेरा काम ही मेरा घर है। क्या आपको इसमें कुछ अतिरेक नहीं लगता? यदि हाँ, तो इसलिए कि आप अपने काम से उस तरह प्यार नहीं करते जिस तरह मैं करता हूँ!

काम करने की मेरी कोई तय समय-सीमा नहीं है। स्वाभाविक ही, इसका अर्थ यह होता है कि मैं अक्सर कार्यालय में काम या व्यवसाय करने वाले सामान्य लोगों से अधिक काम करता हूँ; लेकिन साथ ही इसका यह भी अर्थ है कि मैं अपरा से खेलने का या शाम को यूँ ही आग तापने का समय पा जाता हूँ। लेकिन फिर यह भी एक तरह का काम ही होता है-क्योंकि वहाँ मैं आश्रम आए मेहमानों और अपने ग्राहकों के साथ बैठता हूँ, उनसे मिलता-जुलता हूँ, बातचीत करता हूँ-तो इसे आप इस तरह भी देख सकते हैं।

मैं अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर किसी दूसरे के पैसों के लिए काम नहीं कर रहा हूँ बल्कि दूसरों की भलाई के लिए काम कर रहा हूँ। आश्रम आए मेहमानों के स्वास्थ्य के लिए, विश्राम करने आए सहभागियों के लिए, अपने स्कूल के बच्चों की मदद के लिए, बाल-श्रम और गरीबी के विरुद्ध मेरा काम है।

स्वाभाविक ही, चैरिटी से आपको संतुष्टि प्राप्त होती है। और यही तब भी होता है जब आप दूसरों के स्वास्थ्य के लिए और उनकी ख़ुशी के लिए काम करते हैं: जब लोग आश्रम से प्रसन्नतापूर्वक बिदा होते हैं, हमें धन्यवाद कहते हैं और दोबारा वापस आना चाहते हैं तो हमें बहुत ख़ुशी होती है! और क्योंकि यह अक्सर होता है, हम न सिर्फ काम करते समय खुश रहते हैं बल्कि उसके नतीजों को देखकर भी हमें बड़ी ख़ुशी मिलती है।

और सबसे बड़ी बात यह कि मैं अपना काम अपने परिवार के साथ मिलकर कर रहा होता हूँ, पत्नी और भाइयों के साथ। हम एक दूसरे को इतनी अच्छी तरह जानते हैं कि कई बार यह महसूस होता है जैसे आपके पास काम करने के लिए चार-चार शरीर हैं। साथ ही अगर आप किसी बात को समझ नहीं पा रहे हैं तो आपके पास उस पर सोचने के लिए चार दिमाग भी हैं!

दुनिया भर से आने वाले ऐसे मेहमानों को पाना जो मित्र बन गए, घर पर रहकर अपना काम और व्यवसाय करना और अपने सभी मित्रों को अपने जीवन के समारोह में आमंत्रित करना और उनकी मेज़बानी का सौभाग्य हासिल करना, ये कुछ और बिंदु हैं जो मेरी इस धारणा को और भी मज़बूत करते हैं:

मैं अपने काम और व्यवसाय से प्यार करता हूँ!

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