अपने जीवन का समय बरबाद न हो इसलिए अपने काम से प्रेम करें – 21 जनवरी 2015

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

कल चिकित्सा व्यवसाय पर लिखने के पश्चात आज मैं सामान्य रूप से सभी पेशों में काम करने वाले लोगों से यह कहना चाहता हूँ कि जिस काम को आपने अपने जीवन का ध्येय बनाया है उससे प्यार करें। मेरे विचार में जिस काम को आप करें उससे आपको प्यार भी करना चाहिए!

बहुसंख्यक लोगों के लिए उनका काम उनके दिन का बड़ा हिस्सा ले लेता है। सामान्य रूप से अधिकतर लोग दिन में आठ घंटे काम करते हैं और कुछ लोग इससे भी ज़्यादा। अगर यह माना जाए कि आप आठ घंटे सोते हैं, व्यक्तिगत कामों और बाथरूम में एक घंटा लगता है-कुछ लोगों को इससे भी अधिक समय लगता है-और अपने काम की जगह जाने और वापस लौटने में भी आपका एक घंटा चला जाता है तो आपके पास दिन भर में सिर्फ छह घंटे बचते हैं। इन छह घंटों में आपको घर का सामान आदि लाना होता है या कोई और ख़रीदारी करनी होती है, घर के कुछ काम निपटाने होते हैं और खाना-पीना होता है। अंत में आपके पास बहुत कम समय बचता है कि आप अपने मनबहलाव के लिए भी कुछ कर सकें या दोस्तों या रिश्तेदारों के साथ समय गुज़ार सकें, बच्चों के साथ खेल सकें या आपसी सम्बन्धों के लिए कुछ समय निकाल सकें।

ज़्यादा नहीं बचता, है न?

जबकि कई देशों में अधिकांश लोगों के लिए हफ्ते में काम के पाँच दिन ही होते हैं, कुछ दूसरों के लिए छह दिन और कुछ लोगों के लिए सात दिन काम के होते हैं, जिसमें से एक दिन आधे दिन तक ही काम होता है।

तो अपने काम में आप इतना अधिक समय व्यतीत करते हैं कि जो आप कर रहे हैं उसमें आपकी रुचि होना अत्यंत आवश्यक है! क्या आप यह नहीं देख पा रहे हैं कि अगर ऐसा नहीं है तो आप अपने जीवन के साथ क्या कर रहे हैं? हर दिन, हर सप्ताह, हर माह और हर साल आप ऐसे काम में अपना समय खर्च कर रहे हैं जिसे आप पसंद नहीं करते, बल्कि उससे घृणा करते हैं!

यह आपको सुखी नहीं रख सकता, यह आपको संतुष्टि प्रदान नहीं कर सकता। उल्टे यह आपको बीमार कर देगा।

हाँ हाँ मैं जानता हूँ कि लोग कहेंगे: ‘लेकिन मुझे गुज़ारा करने के लिए कोई न कोई काम तो करना ही होगा!’ वे तर्क देंगे कि आप इसका चुनाव नहीं कर सकते कि नौकरी के लिए आपको किस जगह स्वीकार किया जाता है। लेकिन अगर आप ठीक तरह से सोचें तो आपको पता चलेगा कि अधिकतर मामलों में आपके पास विकल्प होता है! आप बहुत सा समय अपने समय के साथ सुलह-समझौते में ही लगे रहकर ऐसी नौकरी या ऐसे व्यवसाय में बने रहते हैं जिसे आप पसंद नहीं करते। नौकरी या व्यवसाय में रुचि या अरुचि के अलावा इसके और भी कई कारण होते हैं मगर सबसे मुख्य कारण पैसा होता है।

अगर वे इस बात को मंजूर कर लें कि यदि उनके काम या व्यवसाय से उन्हें कम आमदनी होती है तो भी कोई बात नहीं मतलब कि अगर वे कम पैसे में भी संतुष्ट हो जाएँ तो कई लोगों के लिए यह संभव हो सकता है कि वे ऐसे काम या व्यवसाय का चुनाव कर पाएँ जो उन्हें प्रसन्न भी रखे और उससे उन्हें संतुष्टि भी प्राप्त हो। वे भूखों नहीं मरेंगे और न ही उन्हें कोई ज़्यादा आर्थिक परेशानी होगी-होगी भी उतनी नहीं कि उसे बरदाश्त न किया जा सके।

और इसीलिए मैं सभी को प्रोत्साहित करता हूँ कि प्रसन्न रहने का तरीका खोजें। अपने काम को पसंद करने का, उससे प्रेम करने का तरीका सीखें या फिर उस काम को छोड़कर किसी दूसरे काम का चुनाव करें। यह भी संभव है कि आप अपने वर्तमान काम या व्यवसाय में काम करने के घंटे कम कर दें और बचे हुए समय में कोई दूसरा काम शुरू करें जो आपके लिए अधिक आनंददायक और संतुष्टि प्रदान करने वाला हो। यह भी संभव है कि सिर्फ अपने खर्चे कम करके आप पूरी तरह से कोई नया काम या व्यवसाय शुरू कर सकें। हो सकता है कि आप अपना कोई व्यापार शुरू कर दें, उसमें ज़्यादा समय दें, अधिक मेहनत करें लेकिन उसी काम ले लिए जिसे आप शिद्दत के साथ पसंद करते हैं।

मेहरबानी करके ऐसा काम करते हुए अपनी ज़िंदगी का बहुमूल्य समय बर्बाद न करें जिसे आप पसंद नहीं करते।