‘रौंग नंबर, हनी!’ जब अमरीकी और जर्मन संस्कृतियाँ टकराती हैं तो यही होता है 17 जुलाई 2013

जब हम जर्मनी में थे तब अपने एक मित्र और उसकी एक अमरीकी गर्लफ्रेंड से मिले जो कुछ समय पहले ही अमरीका से जर्मनी आकर बस गई थी। वह पहले भी जर्मनी में रह चुकी थी मगर अब, जब कि वह स्थायी रूप से यहाँ रहने वाली थी, उसे दोनों संस्कृतियों में बहुत बड़ा अंतर दृष्टिगोचर हुआ। और एक बात तो ऐसी हुई कि हम हँस-हँसकर लोट-पोट हो गए। कई बार ऐसा महसूस होता है कि दो संस्कृतियाँ एक दूसरे के अनुरूप हो ही नहीं सकतीं।

हमारी अमरीकी मित्र एक ट्रेन पकड़कर जर्मनी में ही एक शहर से दूसरे शहर जा रही थी। एक कतार में टिकिटों की जांच करता हुआ टिकिट-चेकर उसके पास भी आया। जैसा कि वह अमरीका में करती रही होगी, मित्र ने अपना टिकिट दिखाया और टिकिट-चेकर से पूछा, हाय, आप कैसे हैं? टिकिट-चेकर ने टिकिट लिया, चेक करके उसे वापस किया और भुनभुनाता हुआ आगे बढ़ा: अपने काम से काम रखो, मिस!

यह दो संस्कृतियों के अंतर और उनके बीच संघर्ष का एक बेहतरीन नमूना था। अगर मुझे थोड़ा सामान्यीकरण करने की इजाज़त दी जाए तो मैंने पाया है कि अमरीकन, जो भी मिलता है या जो भी उन्हें आसपास दिखाई देता है, उससे 'आप कैसे हैं' पूछकर उसका अभिवादन करते हैं। जब हम अमरीका में थे तब हमने भी यह बात नोटिस की थी। आप सुपर मार्केट में हों और किसी गलियारे से गुज़र रहे हों तो अचानक एक व्यक्ति, जो दरअसल शेल्फ में सामान जमाने में व्यस्त है, आपसे मुसकुराते हुए अवश्य पूछेगा, 'गुड मॉर्निंग सर, आप कैसे हैं'। आप उसे जानते नहीं हैं, बल्कि पहली बार मिल रहे हैं; फिर आप उसे क्यों बताएँगे कि रात भर आपको मच्छर काटते रहे और आप बिल्कुल सो नहीं पाए हैं और अभी यहीं फर्श पर आपकी सोने की इच्छा हो रही है!

रमोना, जोकि जर्मन है, एक बार अमेरिका में बड़ी विस्मित हुई जब उसने एक नंबर डायल किया और जिसने उठाया उसकी आवाज़ से वह परिचित नहीं थी। उसने उस महिला के बारे में पूछा जिससे वह बात करना चाहती थी कि क्या वह महिला वहाँ है? उधर से जवाब आया, 'रोंग नंबर हनी!' रमोना की नज़र में किसी अपरिचित का यह कहना कुछ ज़्यादा ही अंतरंग बात थी और वह स्तब्ध रह गई। मेरे मित्र का नंबर आपसे मिलता जुलता है तो आप मेरी इतनी आत्मीय नहीं हो गईं कि मुझे 'हनी' कहने लगें!

तो किसी जर्मन के लिए 'आप कैसे हैं' सुनना हमेशा ही एक मज़ेदार अनुभव होगा लेकिन किसी अमरीकन के लिए जवाब में 'अपने काम से काम रखो' जैसी कड़ुवी बात सुनना बहुत ही दुखद और अपमानजनक हो सकता है। आखिर वह तो बिचारा बहुत अपनेपन से यह कह रहा था। जर्मन नज़रिये से यह अनौपचारिकता, अपनी सीमा का बेजा उल्लंघन है।

नतीजा यह हुआ है कि अमरीकी जरमन्स को बहुत अंतर्मुखी, औपचारिक और अ-मित्रवत समझते हैं। आप जर्मनी की किसी सड़क पर झूमते, हँसते-गाते निकलें और दूसरे आने-जाने वालों की आँखों में चाहें कि थोड़ी सी खुशी या हल्की सी मुस्कुराहट भी दिखाई दे जाए तो आप निराश हो जाएंगे। बहुत संकोच के साथ ज़रा सी हरकत होगी। लोग आपके परे देखेंगे या ज़मीन पर। कोई अगर आपकी तरफ गलती से देख ले तो आपको मुसकुराता देखकर आश्चर्य में पड़ जाएगा, सोचेगा, अगर यह पागल नहीं है तो इस तरह हंस क्यों रहा है!

ये दोनों विवरण कुछ ज़्यादा ही सामान्यीकृत हो गए हैं। हर अमरीकी किसी अजनबी के गले नहीं लग जाता और न ही हर जर्मन इतना संकोची या तुनकमिजाज होता है कि अजनबी से बात करने से ही कतराए। फिर भी इसमें थोड़ी सी सच्चाई भी है कि ये चारित्रिक विशेषताएँ अमरीकनों में और जर्मनों में आम तौर पर पाई जाती हैं।

जब तक ऐसी मज़ेदार बातें होती रहेंगी, जैसी मेरी अमरीकी मित्र के साथ हुई थी, तब तक लोग अपने इस व्यवहार पर गौर करते रहेगे और यह बात हमेशा अच्छी ही सिद्ध होगी।

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