जानना तो नहीं चाहते, फिर भी पूछते हैं, ‘आप कैसे हैं’? यह कैसी संस्कृति है, भई? 18 जुलाई 2013

कल मैंने अमरीकनों और जर्मन्स की चारित्रिक विशेषताओं के बारे में बताते हुए इस बात का ज़िक्र किया था कि जब ये लोग आपस में मिलते हैं तो क्या-क्या गुल खिलाते हैं! अमरीकनों की ‘आप कैसे हैं’ कहने की आदत के बारे में बताते हुए मैंने कोशिश की थी कि उसके बारे में एक बात आपसे न कहूँ मगर एक पाठकीय प्रतिक्रिया से उसका खुलासा भी हो ही गया। वह बात यह थी कि अमरीकी जब कहते हैं कि ‘आप कैसे हैं’ तो उन्हें आपके हालचाल जानने से कोई मतलब नहीं होता।

मैंने पूछा था कि क्या उस सुपर मार्केट का कर्मचारी वाकई मच्छरों द्वारा काटे जाने और इस कारण मेरी नींद में खलल पड़ने के बारे में जानना चाहता था। क्या वह समझ रहा था कि मैं थका हुआ हूँ और मेरा मूड खराब है? इसका सीधा सा उत्तर है: नहीं! मच्छरों, या आपकी नींद या थकान के बारे में कोई नहीं जानना चाहता। आप अगर अपनी अंतिम परीक्षा में फेल हो जाएँ, कोई पुरस्कार लेने स्टेज की ओर बढ़ें और सीढ़ियों पर गिरकर पैर तुड़वा लें, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। जब वे पूछें कि ‘आप कैसे हैं’ तो आपको यही जवाब देना है कि ‘मज़े में हूँ’, ‘ठीक हूँ’, या बहुत ही बुरी हालत में हों तो कहें, ‘किसी तरह चल रहा है!’

तो फिर आप यह प्रश्न पूछते ही क्यों हैं, भाई, कि ‘आप कैसे हैं’?

जब मैं अमरीका में था तो यह बात मैंने खुद महसूस की थी। मुझे यह देखकर अच्छा लगता था कि वहाँ की दिनचर्या कितनी खुशनुमा, हंसी-मज़ाक से भरपूर होती है। बाज़ार में लोग प्रसन्न घूमते हैं और हर आने-जाने वाले से हँसकर अभिवादन करते हैं और आप भी उस अभिवादन का उसी तरह हँसकर जवाब देते हैं, वे आपसे पूछते हैं ‘आप कैसे हैं’ और आप भी पलटकर पूछते हैं ‘आप कैसे हैं’! आपको लगता है आप सड़क पर ही नाचना शुरू कर दें, क्योंकि हम सब आपस में इतने अंतरंग और आत्मीय हैं, हमारा एक विशाल परिवार है और हम सब एक दूसरे से कितना प्रेम करते हैं!

कुछ समय बाद ही आप नोटिस करते हैं कि अभी-अभी जिस महिला ने मुस्कुराते हुए आपके लिए दरवाजा खोला है और आपसे कहा है कि ‘आप कैसे हैं’, वह महिला पल भर बाद ही किसी दूसरे की तरफ देख रही है और वही सवाल पूछ रही है, ‘आप कैसे हैं’, अब उसका ध्यान आपकी तरफ से उचट चुका है जब कि आपका मुंह एक मज़ेदार जवाब देने के लिए उद्यत है कि मैं कैसा हूँ, और यह भी कि क्या आप भी इतने बढ़िया मौसम में वैसी ही प्रसन्न नहीं हैं जैसा कि मैं हूँ! लेकिन आप तो ध्यान ही नहीं दे रही हैं! इस तरह हमारी बात आगे कैसे बढ़ेगी, एक दूसरे को बेहतर ढंग से जानने, रिश्ता कायम करने और जीवन भर के लिए मित्र बनने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। आपकी स्वागतातुर मुस्कान और प्रश्न कि ‘आप कैसे हैं’ मेरे लिए एक संभावना पैदा कर रही थी और दूसरे ही पल दिखाई गई आपकी उपेक्षा इसका विपरीत असर पैदा कर रही है।

नहीं, परेशानी की कोई बात नहीं है। मैं इस झटके से जल्द ही उबर गया। धीरे-धीरे मैं समझ गया कि यह महज एक तरह का अभिवादन है जैसे हॅलो या गुड मॉर्निंग है। इसका वही अर्थ नहीं है जो उन शब्दों का वास्तविक अर्थ है। मैंने महसूस किया कि अमरीका में सिर्फ इस वाक्य के साथ ही ऐसा नहीं है बल्कि झूठी भावनाओं का प्रदर्शन यहाँ बहुत आम बात है जिसे झेल पाना मुझ जैसे व्यक्ति के लिए बहुत कठिन है। लेकिन इससे यह भी पता चलता है कि यह कृत्रिम दुनिया कितनी झूठी है! क्या किसी को वाकई परवाह है? आप अभिवादन करते हैं और निश्चय ही बनावटी स्वर में कहते हैं आप कैसे हैं, आप झूठी रुचि दिखाते हैं जब कि उसकी तरफ पल भर के लिए भी आपका ध्यान नहीं होता!

अगर ऐसी बात है तो मैं आपसे यह कहना चाहता हूँ कि मेरे बारे में कुछ न पूछें। यह किसी भी अमरीकन को सोचना भी नहीं चाहिए: अगर आपकी मुस्कान एक धोखा है तो उस मुस्कान को पाकर मेरी दुनिया तिनका भर भी बेहतर नहीं होगी। आप अपनी नकली मुस्कान अपने पास रखें। अगर आप सच में कोई सरोकार रखते हैं तो थोड़ा गहरे उतारिए, अगर कोई प्रश्न करते हैं तो उसके उत्तर की पल भर प्रतीक्षा कीजिए और उस उत्तर पर भी अपनी सांकेतिक प्रतिक्रिया दीजिए। अगर आप नहीं जानना चाहते कि मैं कैसा हूँ तो पूछिए भी मत। मुझे इसका दुख नहीं होगा। मुझे वास्तविक अनुभूतियाँ चाहिए, नकली नहीं।

लेकिन प्रश्न पूछकर अभिवादन करने की आदत छोडने पर एक बात का खयाल अवश्य रखें: अपनी सकारात्मक मुद्रा को न छोड़ें। अमरीका में कई लोगों में मैंने यह सकारात्मकता पाई है जो मुझे बहुत अच्छी लगती है। इसलिए प्रसन्नता, सकारात्मकता और प्रेम की उस भावना को गहराई तक ले जाते हुए लोगों का वास्तविक मुस्कान के साथ अभिवादन करें।

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