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पश्चिम में बसने जा रहे भारतीयों के लिए कुछ और टिप्स – 9 जुलाई 2015

पश्चिमी संस्कृति

स्वामी बालेन्दु पश्चिम में बसने जा रहे भारतीयों के लिए उनके पास उपलब्ध कुछ और विचार लिख रहे हैं। पढ़िए और उन पर अमल कीजिए!

जब भारतीय पश्चिमी मुल्कों में खरीदारी करना सीखते हैं – 8 जुलाई 2015

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स्वामी बालेन्दु अपनी पत्नी या गर्लफ्रेंड के साथ पश्चिम में रहने वाले भारतीय मर्दों को बता रहे हैं कि कैसे वहाँ खरीदारी करना बहुत अलग अनुभव होता है! आज़ादी के एहसास जैसा!

कम औपचारिकताएँ जीवन आसान बनाती हैं! 28 जनवरी 2015

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स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि उन्हें महसूस हो रहा है कि औपचारिकताएँ कम होती जा रही हैं और जिसे व्यक्तिगत रूप से वे भी अच्छा मानते हैं. क्यों और कैसे यहाँ पढ़ें.

पश्चिम में वृद्धों का कठिन जीवन – 25 सितम्बर 2014

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बहुत से लोगों को वृद्धावस्था में बहुत कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। स्वामी बालेन्दु उनकी इस हालत का वर्णन करते हुए समझा रहे हैं कि वृद्धों को क्यों उनके लिए बनाए गए वृद्धाश्रम में रहने के अतिरिक्त कोई चारा नहीं होता।

संयुक्त परिवार बहुत अच्छे होते हैं मगर हर बुज़ुर्ग को ऐसी जीवन पद्धति रास नहीं आती – 24 सितम्बर 2014

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स्वामी बालेन्दु ऐसे बुजुर्गों के बारे में लिख रहे हैं जो संयुक्त परिवार में रहकर खुश नहीं होंगे बल्कि वृद्धों के लिए स्थापित किसी वृद्धाश्रम में रहना पसंद करेंगे।

जानना तो नहीं चाहते, फिर भी पूछते हैं, ‘आप कैसे हैं’? यह कैसी संस्कृति है, भई? 18 जुलाई 2013

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स्वामी बालेंदु ‘आप कैसे हैं’ पूछने की अमरीकी आदत के बारे में बता रहे हैं जो सिर्फ अभिवादन का एक तरीका है, जिसमें पूछने वाला उत्तर सुनने के लिए रुकता तक नहीं है।

‘रौंग नंबर, हनी!’ जब अमरीकी और जर्मन संस्कृतियाँ टकराती हैं तो यही होता है 17 जुलाई 2013

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स्वामी बालेंदु उदाहरण देकर बता रहे हैं कि जब अमरीकी और जर्मन्स मिलते हैं और अपनी-अपनी संस्कृतियों की चर्चा करते हैं तो हमेशा मज़ेदार स्थितियाँ निर्मित हो जाती हैं।