सत्य एक है – अपनी अंतरवाणी को सुनें – 27 मार्च 2008

सत्य

मैं और रमोना सुबह सत्य के बारे में बातें कर रहे थे। वस्तुतः मैंने थामस के साथ भी गत रात्रि में इसके बारे में चर्चा की थी। केवल एक ही सत्य है। यह बहुत सारे धर्मग्रंथों में कहा गया है, भागवत गीता में और थामस ने मुझे बताया कि आप इससे थोड़ी अलग व्याख्या परन्तु एक जैसे सार बाइबिल में भी पायेंगे। सत्य एक है। यह दो नहीं हो सकता। कोई भी धर्म इससे इंकार नहीं करेगा। हर धर्म इस पर सहमत है कि सत्य एक है।

कभी-कभी मैं यह सुनता हूं कि लोग बहाने के साथ एक द्वंद की व्याख्या करते हैं कि उनका सत्य अलग है और किसी दूसरे का सत्य अलग है। मैंने थामस को फ़ोन पर एक उदाहरण दिया, मैंने सितारों को देखा और कहा: मैं यहां चांद को देख रहा हूं और यदि इसे तुम्हें दिखाता हूं, तुम भी चांद ही देखोगे। तुम सूर्य नहीं देखोगे और तुम मुझसे यह नहीं कहोगे कि यह सूर्य है क्योंकि सत्य यह है कि यह चांद है। और सत्य इसी तरह का है। यह भिन्न नहीं हो सकता।

हमारे अंदर इसके लिये एक संकेतक भी है। यह अंतरवाणी जो कभी कभी आपको बताती है कि कोई झूठ बोल रहा है या धोखा दे रहा है या आपको क्या करना चाहिये। और हमें इस अंतरवाणी के साथ चलना चाहिये। मैंने पहले भी यह कहा है कि आप बहुत ज्यादा न सोचे इस बारे में कि दूसरे आपके बारे में क्या कहते है या क्या सोचते है। तब आप कुछ और होने का दिखावा करेंगे। हो सकता है आप यह साबित करने का प्रयास करें कि यह आपका सत्य है और अजीब व्यवहार करें हालांकि आपके अंतर में यह पता हैं कि सत्य कुछ और है। कि आप वास्तव में कुछ और हैं। इसलिये आप आपने भीतर की आवाज की अनदेखी न करें और दूसरे के लिये न जियें। सत्य से भागना बंद करें। सत्य केवल एक है|

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