सत्य की खोज -16 दिसंबर 2009

कल मैंने कहा था, आपको अपने विचार स्थिर रखने की आवश्यकता है । कल मैं आपके उन अनुभवों के बारे चर्चा कर रहा था जो प्रत्येक व्यक्ति के साथ मिलने पर नहीं बदलते हैं। लेकिन अध्यात्मिक दुनिया में यह भी बहुत सामान्य बात है कि लोग बहुत तीव्रता से बदलते हैं और पूर्णतः अपने विचार पर स्थिर नहीं रह पाते। यह भी इसका प्रभाव है कि वे दृढ़ नहीं हैं। बहुत सारे संदेह हमेशा वहाँ हैं।

और निश्चित रूप से वे खोज कर रहे हैं। वे सत्य की खोज कर रहे हैं। वे किसी व्यक्ति या किसी चीज, कोई संगठन या शिक्षक या गुरु वह कोई जो सत्य को जानता हो और उन्हें वहां तक पहुंचा सकता हो, उसके पास जाते हैं।

मुझे आपके सत्य की तलाश पसंद है परन्तु मैं कहना चाहता हूं: सत्य कहीं बाहर नहीं है। यही कारण है कि आपके हाथ हमेशा निराशा लगती है और आप सत्य को कहीं नहीं प्राप्त कर पाते हैं। आपका सत्य आपके अंदर है। अपने प्रेम और अपनी ईमानदारी में इसे तलाशें, वहां आप अपने सत्य को पायेंगे।

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