चार प्रकार के प्रश्नकर्ता – जिज्ञासु, बुद्धिमान, परीक्षक और आलोचक – 10 मई 2008

कल मैंने एक प्रश्न और उसका जवाब लिखा और प्रत्येक व्याख्यान के बाद यह सामान्य है कि लोगों के पास कुछ समय होता है मुझसे किसी चीज के बारे में पूछने के लिये, व्याख्यान का विषय या अन्य कुछ भी। जब मैं नौ साल का था तब भी व्याख्यान देता था। मुझे इसके ढेर सारे अनुभव हैं और मैं प्रश्न कर्ताओं को चार अलग अलग प्रकार में वर्गीकृत कर सकता हूं:

  1. प्रथम प्रकार में वे व्यक्ति आते हैं जो वास्तव में अपने प्रश्न के उतर जानने के जिज्ञासु हेतु होते हैं वे उत्साहित होते हैं और आप देख सकते हैं कि इस ज्ञान को प्राप्त करने के लिये वे कितने आतुर होते हैं। वे आपकी बात को बहुत ध्यानपूर्वक सुनते हैं और प्रत्येक शब्द को आत्मसात कर लेते हैं|
  2. दूसरे प्रकार के व्यक्ति वे होते हैं जिनका मुख्य उद्देश्य जवाब प्राप्त करना नहीं होता बल्कि यह प्रदर्शित करना होता है कि वे कितने बुद्धिमान है और वे कितना ज्यादा वे जानते हैं। वे बहुत लंबे और एक जटिल तरीके से अपनी बात को व्यक्त करते हैं और अकसर अंत में आपको यह पता ही नहीं चलता कि वास्तव में उनका प्रश्न क्या था। ये सवाल केवल अहंकार से संचालित होते हैं और वे अपने ज्ञान से आपको प्रभावित करना चाहते हैं|
  3. तीसरे प्रकार के व्यक्ति आपको और आपकी जानकारी/ ज्ञान को परखना चाहते हैं। वे कुछ ऐसा पुछते है, जिसके बारे में उन्हें पता रहता है, मात्र यह परखने के लिये कि क्या आपको भी यह ज्ञान है । यह एक परीक्षा की तरह है। असल में वे छात्र बनकर कुछ सीखना नहीं चाहते बल्कि शिक्षण करना चाहते हैं।
  4. अंतिम प्रकार के व्यक्ति किसी प्रकार का उत्साह नहीं प्रदर्शित करते हैं और सिर्फ आपकी और आपके कथन की आलोचना करने के लिये ही प्रश्न करते हैं। वे तार्किक बहस नहीं करते बल्कि जो भी जबाव आप देंगे उसमें से कोई मुद्दा निकाल कर दूसरे बहस की शुरुआत कर देंगे। वे एक तय योजना के साथ आते हैं और वे लड़ना चाहते हैं|

अंतिम तीन प्रकार वालों को वास्तव में किसी जवाब की आवश्यकता नहीं होती। दूसरे प्रकार वाले प्रश्न कर्ता सिर्फ अपने ज्ञान को प्रस्तुत करना चाहते है और आपमें उनकी रुची नहीं होती। वे जिन्हें पहले से जवाब पता होता है परन्तु आपकी परीक्षा लेना चाहते हैं और उन लोगों के जवाब देने का कोई मायने नहीं है जो केवल लड़ रहे हैं क्योंकि कि वे प्रत्येक चीज की आलोचना ही करेंगे।

हालांकि प्रथम प्रकार के व्यक्ति का जवाब देना सुखद होता है। उनका प्रश्न उनके ह्रदय से, समर्पण से उत्पन्न होता है। सिर्फ वही वास्तविक जवाब प्राप्त करते है और सिर्फ उन्हीं के लिये यह किसी उपयोग का होता है।

आज हम मायकल और एन्ड्रीया के साथ हैमबर्ग गये और अपने मित्र गैरी बीर्च से मिले जो प्रोफ़ेशनल गोल्फ़ प्लेयर हैं । वह जल्द ही अमेरिका के लिये उड़ान भरेंगे और हमने गुड बाय कहने के लिये एकसाथ सुखद मध्याह्न काल बिताया।

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