खुद अपने आप पर भरोसा करें: आप परिवर्तन ला सकते हैं और उनसे लाभ भी उठा सकते हैं – 25 मार्च 2015

विश्वास

कल मैंने बताया था कि अगर आप प्रसन्न रहना चाहते हैं तो आपको परिवर्तनों को स्वीकार करते हुए जो भी नई परिस्थितियाँ निर्मित हों, उनके अनुसार ही चलना होगा। स्वाभाविक ही कल की चर्चा उन बाहरी परिवर्तनों के बारे में थी, जिनके प्रति आपको लचीला रवैया अपनाना होगा। आज मैं एक और प्रकार के परिवर्तन के बारे में लिखना चाहता हूँ: वह, जिसका कारण आप स्वयं होते हैं; वह, जो आपके भीतर से आता है!

यह और बात है कि आपको बाहर से आने वाले परिवर्तनों के प्रति लचीला रवैया अपनाना चाहिए। इसमें बड़ी सक्रियता की ज़रूरत होती है लेकिन मुझे गलत मत समझिए, एक और परिस्थिति होती है जो इससे भी ज़्यादा कठिन लगती है: अपने भीतर हो रहे परिवर्तनों को स्वीकार करना और अपनी तरफ से ऐसे कदम उठाना, जो आपके जीवन में इन परिवर्तनों को क्रियान्वित कर सकें। आपके भावनात्मक और मानसिक परिवर्तनों को अमली जामा पहना सके। उन रास्तों पर चलने की हिम्मत पैदा कर सके, जिन पर दूसरे नहीं चलते। उन जगहों की यात्रा करने की इच्छा पैदा कर सके, जहाँ जाने के बारे में आपके आसपास के लोग सोच भी नहीं सकते और आपने भी तब तक नहीं सोचा था।

आप ऐसा क्यों नहीं करते? आप डरते हैं। किस बात से डरते हैं? इस बात से कि उस रास्ते को छोड़कर, जिस पर इतने सारे लोग चल रहे हैं, कहीं आप गलत काम तो नहीं कर रहे हैं? आपको शक है, आपमें विश्वास की कमी है।

जी हाँ, इसीलिए मेरा मानना है कि भारत में लोग आसानी के साथ परिवर्तनों को स्वीकार कर पाते हैं और ज़्यादा लचीले हैं: वे विश्वास करते हैं।

औसत पश्चिमी समाज यह सिखाने पर कोई ज़ोर नहीं देता कि विश्वास कैसे किया जाए! वह आपको दूसरी बहुत सी बातें सिखाता है लेकिन उसका सबसे मुख्य फोकस होता है, सुरक्षा। हर समय आपको मालूम होना चाहिए कि आप कहाँ जा रहे हैं, बाकायदा कोई योजना बनाकर ही कहीं निकालना चाहिए और एक बॅकअप प्लान भी होना चाहिए। और सबसे बड़ी बात, कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहिए।

जीवन एक सुनिश्चित कार्यक्रम की तरह है और स्पष्ट दिशा-निर्देशों (नियमों) द्वारा तय कर दिया गया है कि कौन सा कदम पहले और कौन सा बाद में रखा जाना है। यह स्पष्ट है कि इन पूर्वनिर्धारित राहों पर चलना सुरक्षित होता है। आपको इन नियमों पर विश्वास करना सिखाया जाता है और आगाह किया जाता है कि आपका एक भी कदम दाएँ या बाएँ न बहके। वास्तव में आपको भय होता है कि अगर आप नाक की सीध में नहीं चलेंगे तो यह सारा कार्यक्रम टूटकर बिखर जाएगा! थोड़ा सा भी पैर इधर-उधर हुआ नहीं कि आप बेचैन हो जाते हैं कि कहीं डूब न जाएँ, कि बियाबान में कहीं खो न जाएँ। नए रास्ते पर ज़रा सा चलते ही आपको थकान महसूस होती है, आपमें उत्साह नहीं रह जाता और आप तनावग्रस्त हो जाते हैं, चिंतित रहने लगते हैं!

मेरी बात मानें, आप कहीं नहीं गिरने वाले। मेरा विश्वास करें, यह विश्व टूटकर बिखरने वाला नहीं है कि उसका मलबा आपके आसपास बिखरा पड़ा हो और न ही आप दुनिया को तोड़ने वाले हैं। मेरी बात मानें, आपको कुछ नहीं होने वाला है। मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आपके अलग राह पर चल देने से इस दुनिया का कुछ भी नहीं बिगड़ने वाला। न तो आप दुनिया को कोई नुकसान पहुँचा सकते हैं और न ही आपके किसी काम से आसमान टूटकर गिरने वाला है।

आपको विश्वास करना सीखना पड़ेगा: मुझ पर नहीं बल्कि अपने आप पर। अपने निर्णयों पर पूरा विश्वास कीजिए, अपने जीवन पर भरोसा कीजिए! तभी आप सुखी और प्रसन्न रह सकेंगे!

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