भारत भ्रमण पर आई गोरी महिलाओं को क्या नहीं करना चाहिए! भाग दो – 4 फरवरी 2014

यात्रा

अकेले भारत भ्रमण पर आई पश्चिमी महिलाओं को कल मैंने कुछ सुझाव दिये थे, जिसमें मैंने बताया था कि उन्हें क्या-क्या नहीं करना चाहिए। उसी क्रम में मैं कुछ और महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए आज अपनी बात समाप्त करूंगा।

4- पुरुषों के साथ छेड़-छाड़ और हंसी मज़ाक न करें

जी हाँ! आपको यह बात अविश्वसनीय लग सकती है मगर इसे स्पष्ट करना आवश्यक है। आप सोचेंगे कि जब महिलाएं पहले से ही पुरुषों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित न हो इसके लिए परेशान रहती हैं तो फिर उन्हें इसके लिए आगाह करने की क्या ज़रूरत है लेकिन यह अक्सर होता रहता है। वे समझ नहीं पातीं कि उनके शब्दों और चुहल, छेड़-छाड़ का भारत में क्या अर्थ लिया जाता है, भले ही वे ऐसा बेखबरी में कह या कर रही हों।

शब्दों का इस्तेमाल सोच-समझकर करें, कहने के तरीके और हाव-भाव पर ध्यान रखें। यह तो स्पष्ट है कि आप इश्कबाज़ी नहीं कर रही हैं, किसी दूसरी संस्कृति के बीच होने के कारण इसकी कतई संभावना नहीं है। जैसा कि मैंने अपने अमरीकी मेहमानों को अक्सर कहते देखा है, जिस व्यक्ति से आप बात कर रही हैं उसे ‘हनी’ या ‘स्वीटी’ न कहें। भारत में स्नेह के ये बेफिक्र शब्द दैनंदिन व्यवहार में हर किसी के लिए प्रयोग नहीं किए जाते। ये लाड़-भरे शब्द सिर्फ अपने बहुत करीबी लोगों के लिए ही उपयोग में लाए जाते हैं।

इसी तरह किसी दूसरे व्यक्ति (पुरुष) को स्पर्श करने से बचें। कुछ देशों में बातों-बातों में सामने वाले के कंधे पर हाथ रख देना सामान्य बात है, चाहे वह पुरुष हो या महिला। मगर भारत में ऐसा नहीं होता और पुरुष और महिलाओं के बीच शारीरिक स्पर्श वैसे भी इतना दुर्लभ होता है कि आपके ऐसे स्पर्श से कोई भी पुरुष यह समझ सकता है कि आप उसकी ओर आकृष्ट हैं और उसमें रुचि ले रही हैं।

5- यूं ही किसी सड़क-चलते अनजान पुरुष से दोस्ती न करें।

इस बिन्दु पर कुछ लोग कहेंगे कि मैं हमारी पश्चिमी महिला मेहमानों को स्थानीय लोगों से विमुख कर रहा हूँ, उन्हें खुलकर लोगों से मिलने-जुलने से मना कर रहा हूँ, जबकि अक्सर मैं उनके खुले मन से घुल-मिलकर रहने का समर्थन करता रहा हूँ। लेकिन खुलकर मिलना और किसी के साथ संबंध बना लेना दो अलग-अलग बातें हैं। जी हाँ, आपको खुलेपन के साथ सबसे मिलना-जुलना चाहिए, जिससे आप अपने समय का भरपूर आनंद उठा सकें, लोगों के साथ उन्मुक्त चर्चा कर सकें, अपने क्षितिज का विस्तार कर सकें। लेकिन ऐसा हर किसी राह-चलते के साथ करना उचित नहीं होगा।

वास्तव में अगर आप किसी पुरुष के बारे में कुछ भी नहीं जानतीं, जहां आप रह रही हैं उससे उस पुरुष का कोई संबंध नहीं है या वहाँ उसका कोई दोस्त नहीं है तो मैं यह सुझाव दूंगा कि ऐसे व्यक्ति से अपने मन की सारी बातें न कहें, अपने बारे में अधिक न बताएं, उसके साथ अकेले में न मिलें, खासकर तब, जब कोई नहीं जानता कि आप कैसी जगह पर उपस्थित हैं। आप नहीं जानतीं कि वह कौन है, उसका मकसद क्या है और वह आपसे इतनी बातें क्यों करना चाहता है। ठीक है कि वह एक सामान्य, उत्सुक व्यक्ति हो सकता है, जो एक पश्चिमी व्यक्ति को अपना मित्र बनाना चाहता हो। लेकिन आप यह निश्चित रूप से नहीं जानतीं। कोशिश करें कि पुरुष हों या महिलाएं, उन्हीं नए व्यक्तियों से संबंध बनाएँ, जिनका आपके किसी परिचित के साथ संबंध हो। इस तरह आप निरापद रह सकेंगी।

6- अगर आप पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं तो अकेले बाहर मत निकलिए

इन सबके बावजूद भी अगर आप अपनी सुरक्षा के प्रति पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं तो फिर अकेले अपनी ज़िम्मेदारी पर विदेश घूमने मत निकलिए। मैं आपसे भारत न आने के लिए नहीं कह रहा हूँ! सिर्फ यह कि अकेले घूमने न निकलिए। किसी मित्र को अपने साथ आने के लिए मनाइए या किसी टूर कार्यक्रम में शामिल हो जाइए। ऐसे टूर कार्यक्रम हम लोग भी पेश करते हैं। किसी सुनियोजित समूह के साथ यात्रा कीजिये या कोई व्यक्तिगत गाइड कर लीजिए। जब आपके साथ कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो इस देश को और यहाँ की संस्कृति को अच्छी तरह जानता है तो फिर आप न सिर्फ सुरक्षित महसूस करेंगी बल्कि इस देश को बेहतर ढंग से जान पाएँगी और आपकी जानकारियाँ और अनुभव ज़्यादा प्रामाणिक होंगे। ऐसा अनुभव आपको अकेले घूमने पर प्राप्त नहीं होगा।

मुख्य बात यह कि अगर आप थोड़ा तैयारी के साथ आएँ तो भारत आते हुए असुरक्षित महसूस नहीं करेंगी। अगर आप चाहें तो अपना टूर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए हमसे कह सकती हैं, जिससे आप बहुत से झंझटों से बच जाएंगी और इस देश का बेहतर अनुभव प्राप्त कर सकेंगी। अगर आपकी इच्छा है और आप कई सालों से यहाँ आने का सपना बुन रही हैं तो फिर उसे पूरा करने का अवसर आपके सामने प्रस्तुत है।

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