यूरोप में बिताए पिछले तीन महीनों पर एक नज़र – 12 अगस्त 2014

यात्रा

अब हमें जर्मनी में रहते हुए लगभग तीन माह हो गए हैं और आज अपरा, रमोना और मैं वापस भारत लौटने के लिए उड़ान भरेंगे। इस बीच बहुत सी बातें हुईं, बड़ा रोमांचक समय व्यतीत हुआ और अब वापसी का मौका भी बहुत सुखद लग रहा है। खैर, दूसरे घर से पहले घर की ओर वापसी!

जर्मनी में, जर्मन लोगों के साथ इतना समय गुजारने के बाद मैं वार्तालाप के सामान्य जर्मन तरीके से अपने ब्लॉग की शुरुआत करता हूँ, यानी मौसम के बारे में लिखकर। मौसम बहुत शानदार रहा! कई सप्ताह सुखद गर्मी के, चमकते सूरज और नीले आकाश के और आदर्श तापमान के रहे! लेकिन मैंने नोटिस किया कि इस साल बारिश अक्सर होती रही और कभी-कभी मूसलाधार बारिश, कुछ-कुछ भारत के मानसून की तरह! और जब भी बारिश ज्यादा होती तो वातावरण में नमी भी हो जाती, जिससे पूरी तरह भारत के बारिश के मौसम का समाँ होता! तो लगता है कि जर्मनी में भी एक और मौसम की शुरुआत हो रही है: मूसलाधार बारिश वाला मानसूनी माह!

अपरा के लिए जर्मनी में इतना लंबा समय बिताना बहुत अच्छा रहा! शुरू में, जब हम यहाँ आए थे, वह जर्मन अच्छी तरह समझ लेती थी लेकिन तब तक वह रमोना की बातों का जवाब कई बार हिन्दी में देती थी। रमोना अक्सर उससे वही जवाब जर्मन में दोहराने के लिए कहती थी लेकिन उसके लिए जर्मन में पूरे वाक्य बनाना मुश्किल होता था। अब वह जर्मन में धाराप्रवाह बात करती है और वह भी दिन-दिन भर!

हम अभी से सोच रहे हैं कि जब हम आश्रम पहुंचेंगे, उसे यहाँ के अनुभवों के बारे में वहाँ बताने में दिक्कत होगी क्योंकि अब उसकी बोलचाल में जर्मन भाषा के बहुत ज़्यादा शब्द आ गए हैं! हमने उसे स्काइप पर आश्रम के बच्चों से इस तरह बात करते सुना और देखा है: हिन्दी व्याकरण और वाक्य विन्यास लेकिन शब्द जर्मन भाषा के! आगे चलकर यह देखना और भी ज़्यादा दिलचस्प होगा!

स्वाभाविक ही ग्रान कनारिया में बिताया समय उसके लिए स्पेनिश सीखने के लिए पर्याप्त नहीं था- सिर्फ कुछ शब्द ही वह सीख पाई-लेकिन वहाँ की जो यादें हम सब बटोरकर ले आए हैं वे बहुमूल्य और असाधारण हैं! मुझे विश्वास है कि वहाँ के दैनिक बीच भ्रमण के बारे में वह अवश्य बताएगी और निश्चय ही व्हेल और डॉल्फ़िंस के बारे में, जिन्हें उसने वहाँ के चिड़ियाघर में देखा था।

अपरा भी अब वापस घर जाने के लिए लालायित है! कुछ दिन पहले मैंने उससे कहा था कि हम जल्द ही वापस घर जाएँगे लेकिन इस जल्दी का सम्बन्ध वह उसके समय अन्तराल से नहीं जोड़ पाई कि ठीक कितना समय और व्यतीत करना है। चार दिन या एक सप्ताह के अन्तराल को अभी वह नहीं समझ पाती और इसलिए वह कई बार पूछती रही ‘अब हम आश्रम चल रहे हैं, न?’ यह कितनी अच्छी बात है कि वह भी अब वापस लौटना चाहती है।

लेकिन कल के बाद उसे स्पष्ट समझ में आ गया। वह ‘आने वाले कल’ को अच्छी तरह समझती है और इसलिए उसने बिना किसी परेशानी के अपने खिलौने पैक करने में रमोना की अच्छी मदद की। बल्कि वह यह जानकर बहुत खुश हुई कि हम लोग वापसी के सफर की तैयारी कर रहे हैं! जब यशेंदु बेसमेंट से सारे सूटकेस लेकर आया, वह खुशी से पागल हो उठी! वह सारे फ्लैट में कूद-फांद मचाने लगी, खुशी में गला फाड़कर चीखती-चिल्लाती ‘हम जा रहे हैं! हम वापस घर जा रहे हैं!’ कुछ शांत होने के बाद उसने धीमे स्वर में फुसफुसाकर हमें बताया कि घर पहुँचकर अब वह अपने पूर्णेन्दु चाचा के साथ मिलकर पराठे बनाने वाली है!

अभी वह सो रही है और हम बाकी का काम तेज़ी से निपटा रहे हैं, हमने नाश्ता कर लिया है और जल्द ही विमानतल की ओर रवाना होंगे। मुझे नहीं मालूम कि हवाई कंपनी अपरा की एक खास मांग पूरी करेगी या नहीं: असल में आज ही उसने सफर के लिए छोटे विमान का अनुरोध किया है!

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