जर्मनी जाने की तैयारियाँ – 12 नवंबर 2015

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कल के शानदार दीवाली समारोह के पश्चात आज हम एक बिल्कुल अलग तरह की तैयारियों में व्यस्त हो गए थे: रमोना, अपरा और मैं कल जर्मनी के लिए रवाना होंगे! हमें आधी रात के बाद दिल्ली से उड़ान भरनी थी लिहाजा हम आज ही यात्रा की सारी तैयारियाँ कर लेना चाहते थे!

खैर, सारी तो नहीं लेकिन जहाँ तक संभव हो सकता था। रमोना काफी ज़ोर-शोर से तैयारियों में लगना चाहती थी लेकिन इस बीच आश्रम में चल रही अनेकानेक गतिविधियों के बीच वह तैयारियों की शुरुआत भी नहीं कर सकी। फिर भी कम से कम हम इतना तो कर ही पाए कि जर्मनी के ठंडे मौसम से बचाव के लिए अपनी सभी सूटकेसें गरम कपड़ों से भर लें!

निश्चित ही, अपरा ने भी अपना सूटकेस अच्छी तरह तैयार कर लिया है! वही सबसे ज़्यादा उत्सुक भी थी! बहुत दिनों से सुबह की शुरुआत ही उसके इस प्रश्न से होती थी: "हम जर्मनी कब जाने वाले हैं?" और सारा दिन वह बार-बार यात्रा के बारे में पूछती रहती थी। दोपहर के भोजन के समय वह आश्रम के दूसरे बच्चों से कहती कि हम जर्मनी में रोटी नहीं खाएँगे, ब्रेड खाएँगे। वह अपने खिलौनों को रोज़ गौर से देखती है और तय करती है कि कौन से खिलौने ले जाने हैं और किन्हें यहीं छोड़ना है। नए कपड़े पहनना उसने बंद कर दिया है क्योंकि उन्हें हमने जर्मनी में पहनने के लिए खरीदा था। और सबसे बड़ी बात, उन गतिविधियों की लंबी फेहरिस्त बनाई जा रही है कि जर्मनी जाकर क्या-क्या मस्ती करनी है, कहाँ कहाँ जाना है, इत्यादि, इत्यादि!

पिछले दो दिनों से अपरा थोड़ी थकी-थकी सी लग रही थी, उसे ठंड लग गई थी और तेज़ सर्दी और ख़ासी से वह बहुत परेशान थी। कल उसे बुखार भी था लेकिन आज वह ठीक लग रही है। रमोना और मुझे इस बात की ख़ुशी है कि हमें बीमार बच्चे के साथ हवाई यात्रा का पहले से अनुभव है लेकिन निश्चित ही मैं ऐसी यात्रा बार-बार नहीं करना चाहूँगा!

लेकिन क्योंकि वह अब काफी ठीक है, हमें विश्वास है कि कल वह हवाई यात्रा का पूरा आनंद ले पाएगी और क्योंकि यह फ्लाइट दिन में है तो वह आसपास के वातावरण को भी मन भर देख सकेगी और उसे अधिक से अधिक जज़्ब कर सकेगी!

मैं अब आपसे यहीं बिदा लेता हूँ और कल जब मैं सुरक्षित जर्मनी पहुँचूँगा, तभी मैं अपना अगला ब्लॉग लिखूँगा!

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