सुन्दर द्वीप, ग्रान कनारिया को बिदाई – 30 जून 2014

यात्रा

आज हम ग्रान कनारिया से बिदा ले रहे हैं। बल्कि इस वक़्त जबकि मैं ये पंक्तियाँ लिख रहा हूँ, हम लोग जर्मनी वापस जाने के लिए हवाई जहाज़ पर सवार हो चुके हैं। अपरा मेरे साथ वाली सीट पर लेटी हुई है और उसके पैर मेरी गोद पर टिके हुए हैं। दरअसल वह नींद की गोद में समा चुकी है। इस सुन्दर द्वीप पर हमने बहुत शानदार वक़्त गुज़ारा और हमारी मित्र बेट्टी के सौजन्य से हम लोग बड़ी संख्या में कनारिया के बाशिंदों से मिल सके, बल्कि कहें, उन्हें और उनकी संस्कृति को करीब से जान-समझ सके। बेट्टी की बदौलत हम जान सके कि किसी द्वीप पर लोगों का जीवन हमसे बिलकुल अलग होता है!

स्वाभाविक ही, पहली बात तो यह कि आप हर वक़्त समुद्र के बहुत करीब होते हैं। ग्रान कनारिया पर इसका अर्थ यह है कि यहाँ आप कहीं पर भी हों, कार में एक घंटा किसी भी दिशा में निकल जाएँ, आप समुद्र किनारे होंगे-या तो वह खूबसूरत, रेतीला, मंथर लहरों वाला समुद्री बीच होगा या सीधे समुद्र में उतरने वाला पथरीला, सीढ़ीदार समुद्र किनारा या फिर काले गोल पत्थरों (पेबल्स) वाला बीच।

विशेषकर ग्रान कनारिया में, जोकि महाद्वीपों का लघुरूप है, आप लगभग सभी मौसमों और तरह-तरह के भूदृश्यों का आनंद ले सकते हैं: पहाड़ों पर चले जाइए, एक तरफ आल्प्स जैसा दृश्य होगा तो दूसरी तरफ चट्टानें होंगी, जो विशाल पथरीले पहाड़ों की याद दिलाएँगी। और बाकी जगहों में आपको लगेगा, आप ज्वालामुखी के द्वीपों पर खड़े हैं क्योंकि वहाँ आप लावा से बने हुए पहाड़ों को देखेंगे, जो आपको पिघलते आइसक्रीम जैसे नज़र आएँगे। मैंने सुना है कि यहाँ के एक द्वीप पर एक ज्वालामुखी दो साल पहले तक सक्रिय था!

लेकिन अगर आप कुछ अधिक दूर तक जाना चाहते हैं, आप किसी दूसरे देश की यात्रा करना चाहते हैं और अगर आप सीमा पार करके लम्बी यात्रा पर निकलना चाहते हैं तो आपको पानी का जहाज़ या हवाई जहाज़ लेना होगा। कोई दूसरा उपाय नहीं है। यहाँ जर्मनी की तरह नहीं है, जहाँ आप एक ही कार में सफ़र करते हुए कुछ घंटों में फ़्रांस, स्विट्ज़रलैंड, डेनमार्क और यहाँ तक कि इटली की यात्रा कर सकते हैं! यहाँ आपको हवाई जहाज़ या पानी का जहाज़ पकड़ना होगा। इस कारण आपको न सिर्फ अधिक पैसा खर्च करना होगा बल्कि समय का तालमेल भी रखना होगा, जिससे समय के अपव्यय से भी आप बच नहीं सकते। यहाँ पिछले हफ्ते हमें पता चला कि इसी कारण कनारिया निवासी सप्ताहांत अपने द्वीपों में गुज़ारना ही ठीक समझते हैं!

जी हाँ, यह सच है और हमें यह दिलचस्प लगा। दरअसल जर्मनी में भी आजकल इसका चलन शुरू हो गया है: अपने ही देश में छुट्टियाँ मनाने का चलन। लेकिन इसका अर्थ यह होता है कि आप आठ घंटे की सड़क-यात्रा करके उत्तरी समुद्र पहुँचिए और बीच के किनारे कोई होटल ले लीजिए। या इसके विपरीत, दक्षिण में एल्प्स की चोटियों पर स्कीइंग कीजिए! भारत में तो खैर तीन घंटे की हवाई यात्रा के बाद भी आप उसी देश में होते हैं!

ग्रान कनारिया द्वीपों पर लोगों को लम्बी सड़क यात्रा नहीं करनी पड़ती: वे सिर्फ अपनी कार निकालते हैं और एक या डेढ़ घंटे में किसी मनपसंद जगह पहुँचकर एक फ़्लैट किराए पर ले लेते हैं! यह जगह राजधानी में ही कहीं हो सकती है या सूर्य-किरणों से रोशन किसी समुद्री बीच पर या द्वीप के उत्तरी भाग में तूफानी समुद्र के किनारे स्थित मछुआरों की बस्ती में या पहाड़ की किसी चोटी पर, वहाँ के अद्भुत नज़ारों के बीच।

वे घर से बाहर रहते हैं इसलिए उसे छुट्टियाँ कहा जा सकता है। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि भारत में और यहाँ जर्मनी में भी, जहाँ मैं खुद को अजनबी नहीं समझता, दो घंटे की दूरी पर होने पर भी शाम को आप घर लौटना ही ठीक समझेंगे! यह सोचने का अपना-अपना तरीका है। इसके अलावा यह परिस्थितिजन्य भी है। यह सब आपके मस्तिष्क में घटित होता है। और इस तरह सोचने पर कहा जा सकता है कि आप अपने घर में भी छुट्टियाँ मना सकते हैं, बिस्तर से कदम नीचे रखे बगैर!

बस अपने नज़रिये को बदलने की ज़रूरत है-शायद दिमाग को ‘द्वीप-दृष्टि’ से देखना होगा! 🙂

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