अकेले भारत भ्रमण पर आई पश्चिमी महिलाओं के लिए कुछ सुझाव! भाग 1 – 29 जनवरी 2014

यात्रा

भारत में होने वाले यौन उत्पीड़न और बलात्कार संबंधी अपने ब्लॉगों की अगली कड़ी प्रस्तुत है। उपसंहार करते हुए छुट्टियों में भारत भ्रमण पर अकेले घूमने निकली पश्चिमी महिला पर्यटकों के लिए मैं अब अपने कुछ यात्रा-सुझाव प्रस्तुत करना चाहता हूँ। क्योंकि इस विषय पर सुझाव बहुत से हैं इसलिए कुछ सुझाव कल के ब्लॉग में लिखूंगा:

अगर आप एक गैर-भारतीय हैं, तो यात्रा के दौरान यहाँ आपको किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

1- अपनी सहज बुद्धि का उपयोग करें।

यह सबसे पहली और सबसे मुख्य बात है, जो मैं उन सभी से कहना चाहूँगा जो भारत की यात्रा पर हैं। बल्कि यह बात सभी के लिए, सदा-सदा के लिए ध्यान रखने योग्य है। आपके पास सहज-बुद्धि है, उसका प्रयोग कीजिए। यह नीचे दिये जा रहे सभी बिन्दुओं पर लागू होता है और कल मैं जिन बिन्दुओं पर लिखूंगा उन पर भी और उन पर भी, जिन्हें संभव है मैं भूल रहा होऊँ! 🙂

2- हमेशा याद रखिए कि आप ठीक-ठीक किस जगह पर हैं, विशेष रूप से तब, जब अंधेरा हो चुका हो।

आप भारत के किसी शहर में हों या दुनिया के किसी भी देश के शहर में, यह महत्वपूर्ण है कि हर वक़्त आपको ध्यान रहे कि आप कहाँ जा रहे हैं। आपको पता होना चाहिए कि कुछ जगहें सुरक्षित होती हैं और कुछ ज़्यादा ही खतरनाक। अगर आप सड़क पर अकेले पैदल कहीं जा रही हैं और नहीं जानतीं कि किधर जा रही हैं तो संभव है आप भटकते हुए किसी ऐसे खतरनाक इलाके में पहुँच जाएँ, जहां अकेले होना आपके लिए ठीक नहीं है।

खासकर रात के वक़्त, जब ऐसी जगहों का माहौल बिगड़ने लगता है, आपको अपने गंतव्य का ठीक-ठीक पता होना चाहिए और वहाँ पहुँचने का रास्ता भी।

3- अगर कोई भारतीय मित्र हो तो उसका हवाला दें।

अगर आप किसी अजनबी के साथ बात कर रही हैं तो उस पर यह ज़ाहिर करें कि आप पूरी तरह अकेली नहीं हैं, कि आपके घर के लोग, आपका परिवार और मित्र जानते हैं कि आप कहाँ घूमने गई हैं और यह भी कि भारत में भी आपके बहुत से जान पहचान के लोग हैं। अगर दिल्ली, मुंबई या और किसी जगह पर आपके कोई भारतीय मित्र हों तो उनका ज़िक्र करें। इससे उस अजनबी को पता चलेगा कि आप कई भारतीयों से भी अच्छी तरह परिचित हैं। सामने वाले पर इसका बड़ा मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है!

आश्रम आने से पहले या आश्रम छोडने के बाद हमारे जो विदेशी मेहमान भारत भ्रमण कर रहे होते हैं, उनसे यह बात हम हमेशा कहते हैं: हम आपकी सहायता के लिए सदैव प्रस्तुत हैं और आप खुशी-खुशी किसी को भी हमारा संदर्भ दे सकते हैं। अर्थात, अगर ट्रेन में या कहीं और, किसी अजनबी से आप कहें कि आप हमारे आश्रम आ रहे हैं और यह कि हम लोग उनका इंतज़ार कर रहे होंगे तो इतनी सी बात काफी होती है!

4- अपने समय का पूरा आनंद उठाएँ।

इस संदर्भ में आपको यह बात शायद कुछ अजीब सी लगे लेकिन मेरा मतलब अक्षरशः यही है। मैंने कई बार पढ़ा है कि महिला पर्यटकों को यह सलाह दी जाती है कि चलते समय अपनी नज़र नीची रखें या किसी के साथ आँख न मिलाएँ। वे मुस्कुराएँ या हंसे नहीं और अच्छा होगा यदि वे लोगों के मुंह की तरफ बिल्कुल न देखें। मैं इससे सहमत नहीं हूँ।

जिस फुटपाथ या सड़क पर आप चल रही हैं, सिर्फ उन्हें देखने के लिए कृपया भारत न आएँ! आप यहाँ आई हैं तो खुलकर भारत का नज़ारा करें, यहाँ की संस्कृति का अनुभव लें, मौज–मस्ती करें, घूमे-फिरें और हँसते-खिलखिलाते रहें, प्रसन्न रहें!

स्वाभाविक ही, यहाँ भी टिप नंबर 1 का इस्तेमाल करें: जब बीस-पच्चीस साल के लड़कों का समूह आप पर फब्तियाँ कस रहा है तो उनकी तरफ देखना, उनकी तरफ देखकर मुस्कुराना ठीक नहीं होगा। उससे उन्हें ऐसा करने का प्रोत्साहन मिलता है। लेकिन ऐसा तो आप अपने देश में भी नहीं करती होंगी? है न?

मेरा मतलब है कि जब आप दिन के उजाले में, किसी व्यस्त सड़क पर, सैकड़ों लोगों के बीच हैं तो भारत के लोगों के दोस्ताना रवैये का लुत्फ उठा सकती हैं। जब कोई आपका अभिवादन करे तो उसका उत्तर अवश्य दें। उस बुजुर्ग के मन में कोई गलत मंशा नहीं हो सकती, जो आपकी तरफ देखकर मुस्कुरा रहा है और बच्चे के साथ खड़ी वह महिला सिर्फ उत्सुकतावश आपसे पूछ रही है कि आप कहाँ की रहने वाली हैं-फर्श की तरफ देखने की यहाँ कोई आवश्यकता नहीं है!

कल और अगले हफ्ते इस विषय पर मैं कुछ और सुझावों के साथ हाजिर होऊंगा।

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