कंप्यूटर आपके जीवन को आसान बना सकते हैं, अगर वे ठीक तरह से काम करते रहें! 20 जनवरी 2016

तकनीक

पिछले कुछ समय से रमोना अपने कंप्यूटर के साथ बुरी तरह जूझ रही थी और अब ऐसा लग रहा है कि इस संघर्ष में अंततः उसने कंप्यूटर पर विजय पा ली है- और इसलिए इस विजय-गाथा के बारे में आपको बताने का लोभ मैं संवरण नहीं कर पा रहा हूँ!

समस्या एक नए सॉफ्टवेअर खरीदने के साथ शुरू हुई, जो हमारे जर्मन चैरिटी संगठन को मिलने वाली सहयोग-राशियों की रसीदें सीधे उनके पास भेजने के काम में प्रयुक्त होता। इस साल के अंत में जब प्रविष्टियाँ करने के लिए रमोना ने सॉफ्टवेअर इंस्टॉल किया तो उसके कंप्यूटर ने भी अपने सॉफ्टवेअर को न्यू ऑफिस वर्जन के मुताबिक़ अपडेट कर लिया।

जब नए सॉफ्टवेअर पर वह काम करने लगी तो उसे पता चला कि चीजें उस तरह काम नहीं कर रही हैं जैसा, सामान्य रूप से उन्हें करना चाहिए। गलतियाँ हो रही थीं उसके स्क्रीन पर बार-बार ‘errors’ का संदेश दिखाई देता और उसका आगे काम करना असंभव हो जाता। आखिर उसे एक सॉफ्टवेअर डेवलपर की मदद लेनी पड़ी। रिमोट कंट्रोल के ज़रिए उसने रमोना के कंप्यूटर पर कुछ और सॉफ्टवेअर इंस्टॉल किए तथा कुछ फाइलें जोड़ीं, जिससे सारी चीजें पुनः सुचारू रूप से काम करने लगीं। रमोना खुश हुई कि, देर से ही सही, आखिर अब वह अपने सारे काम निपटा लेगी!

लेकिन दूसरे दिन एक और नाटक शुरू हो गया: उसका ‘आउटलुक’, जिसके ज़रिए वह सामान्यतः अपने ईमेल भेजती है, काम ही नहीं कर रहा था! अगले चार दिनों तक वह माइक्रोसॉफ्ट के कस्टमर सपोर्ट के साथ घंटों फोन पर उलझी रही! उसके पिता भी उसके साथ बैठकर देखते रहे कि कैसे तकनीकी कर्मचारी उसके कंप्यूटर पर कब्ज़ा जमाए इस कोशिश में लगे हुए हैं कि किसी तरह उसके ईमेल्स का आना-जाना पुनः शुरू हो सके!

अंततः, अपरा के जन्मदिन के एक दिन पहले रात साढ़े नौ बजे आशा की किरण दिखाई दी और समस्या का समाधान हुआ: उसका ‘आउटलुक’ फिर काम करने लगा और वह पुनः इमेल्स भेजने और आए हुए इमेल्स पढ़ने में कामयाब हो सकी!

न जाने क्यों, इस सब के बीच कोई यह नहीं समझ पाया कि समस्या के साथ नए सॉफ्टवेअर का क्या संबंध हो सकता है जबकि सॉफ्टवेअर को पिछले ‘ऑफिस’ वर्जन के साथ काम करते रहना चाहिए था, न कि इस वर्जन के साथ! क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि जब रमोना ने सॉफ्टवेअर खोला और उस पर काम करना शुरू किया तो क्या हुआ? बिल्कुल ठीक: ‘आउटलुक’ ने फिर से काम करना बंद कर दिया!

लेकिन इस बिंदु पर आकर रमोना को पता चल गया कि क्या हुआ है और दो-चार बार कोशिश करने के बाद वह पुनः ईमेल की समस्या हल करने में सफल हो गई। लेकिन सॉफ्टवेअर का क्या किया जाए? उसने सोचा, चलो, एक बार फिर सॉफ्टवेअर डेवलपर से ही पूछते हैं!

संक्षेप में, पिछले दस दिनों में रमोना चार अलग-अलग कंप्यूटरों पर उस सॉफ्टवेअर को चलाने की कोशिश कर चुकी है और हर बार यही पता चलता है कि किसी न किसी सेटिंग में कोई न कोई दिक्कत पेश आ ही रही है-या फिर वह कंप्यूटर ही उस नए सॉफ्टवेअर को चलाने के लिहाज से बहुत पुराना पड़ चुका है। और अंत में, आखिरकार, वही व्यक्ति, जिसने वह सॉफ्टवेअर बनाया था और उसे बनाने में घंटों मेहनत की थी, पुनः उसकी सारी सेटिंग्ज़ ठीक करके उसे काम करने लायक बनाने में कामयाब हुआ।

गज़ब! आधुनिक तकनीकों का जवाब नहीं! कभी-कभी आप उन्हें बहुत पसंद करते हैं क्योंकि वे आपके जीवन को आसान बनाती हैं। इसके विपरीत, कभी-कभी लगता है, उसके बगैर ही ठीक था! लेकिन नहीं, अंततः नई तकनीकें आपके शारीरिक श्रम को कम ही करती हैं-इसलिए उस पर काम करते रहना कतई व्यर्थ नहीं कहा जा सकता!

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