अंधविश्वासियों की किस्में – 5: वैज्ञानिक, डॉक्टर या ऐसे ही अतिउच्चशिक्षित लोग – 15 मार्च 13

अन्धविश्वास

पिछले कुछ दिनों से मैं अंधविश्वासी लोगों की किस्मों के बारे में लिख रहा हूं। उसी क्रम में आज अंधविश्वासी वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और ऐसे ही अतिउच्चशिक्षित लोगों की बारी है।

मेरा आरोप है कि ये वो लोग हैं जो लोगों के बीच बेहूदे अंधविश्वास फैलाने के लिए उत्तरदायी हैं। ये वे लोग हैं जिनके पास अंधविश्वासों को झूठा सिद्ध करने के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं उसके बावजूद ये उनमें न केवल विश्वास करते हैं अपितु खुलेआम उसका प्रदर्शन भी करते हैं। इन लोगों ने अपने जीवन के कई वर्ष इस बात की खोज करने में बिताए हैं कि यह दुनिया कैसे चलती है, तथाकथित चमत्कारों के पीछे की वास्तविकता क्या है और अपने इस ज्ञान को लोगों के साथ साझा किया है। इन डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में शिक्षा पाई है। आम आदमी की तुलना में इन्हें जीवन के रहस्यों का अधिक ज्ञान है। लेकिन फिर भी ये अंधविश्वासों से चिपके हुए हैं।

ऐसे उच्चशिक्षित लोगों के अनगिनत उदाहरण हैं जो अंधविश्वासी हैं। चलिए, डॉक्टरों से ही शुरु करते हैं। उनके क्लीनिक के प्रवेशद्वार पर ही अकसर आपको बुरी नज़र से बचाने वाले टोटके लटके हुए मिल जाएंगें। अस्पतालों में जगह जगह लिखा रहता है "हम सेवा करते हैं, इलाज तो 'वह' करता है"। बहुत से डॉक्टर गुरुवार को अपना क्लीनिक नहीं खोलते क्योंकि उनका मानना है कि लोग इस दिन डॉक्टर के पास नहीं जाते और अगर गए भी तो दोबारा अवश्य वापिस आना पड़ेगा यानी गुरुवार का दिन डॉक्टर से मिलने के लिए अशुभ होता है।

यह देखकर मुझे तो ऐसा लगता है कि खुद डॉक्टरों को ही चिकित्सा विज्ञान में विश्वास नहीं है। अगर लोग उनके इलाज से ठीक न हों तो संभव है कि वे इसके लिए बुरी ताक़तों को जिम्मेदार ठहराने लगें और उनके निवारण के लिए टोने – टोटके भी बताने लगें! हो सकता है कि यह बात अंधविश्वासियों का आत्मविश्वास बढ़ाती हो लेकिन ऐसे डॉक्टरों की काबिलियत पर मेरा भरोसा तो कम हो जाता है। यदि वह रोग के इलाज के लिए किसी अंधविश्वास का सहारा लेता है और बीमारियों के लिए अस्वच्छता के बजाए ईश्वरीय प्रकोप को जिम्मेदार ठहराता है तो मैं उससे अपना इलाज नहीं करवाऊंगा। मैं ऐसे सभी भारतीय डॉक्टरों से कहना चाहता हूं कि वे बीमारी की वजह किसी अंधविश्वास में न ढूंढकर चिकित्साशास्त्र में ढूंढें। गंदगी में बीमारियां आसानी से फैलती हैं अतः डॉक्टरों को चाहिए कि वे अपने क्लीनिक में सफाई का विशेष ध्यान रखें।

ऐसा नहीं है कि उच्चशिक्षितों की जमात में केवल डॉक्टर ही अंधविश्वासी पाए जाते हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ईसरो) के वैज्ञानिक हर बार अंतरिक्ष में रॉकेट छोड़ने से पहले उसकी सफलता के लिए मंदिरों में हाजरी लगाते हैं। इतना ही नहीं वे अपने साथ उस रॉकेट का एक अति लघु प्रतिरूप भी ले जाते हैं ताकि भगवान को ज्ञात हो जाए कि वे किसकी सफलता की कामना लेकर मंदिर में आए हैं।

और तो और रॉकेटों के नामकरण में यही अंधविश्वास पैर फैलाए रहता है। एक PSLV-C12 और एक PSLV-C14 है मगर बीच का PSLV-C13 गायब है। क्यों? क्योंकि 13 एक अशुभ अंक है। क्या आपने नासा (NASA ) में इस तरह की ढकोसलेबाजी देखी है?

हमारे देश के श्रेष्ठतम वैज्ञानिक जो चंद्रमा पर पहुंचने की तकनीक जानते हैं और मंगल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं, क्या उन्हें अपने काम पर भरोसा नहीं है जो भगवान से मदद की गुहार लगा रहे हैं! जानबूझकर अशुभ अंकों की अनदेखी की जाती है। डॉक्टर बुरी ताकतों से डरते हैं। मैं तो कहता हूं कि यह हमारा दुर्भाग्य है कि ये सभी केवल साक्षर हैं शिक्षित नहीं। ये शिक्षित होने के बावजूद ढकोसलों की चपेट में आ जाते हैं। सारा देश उनकी तरफ आशा भरी निगाहों से देखता है और अपनी संतति से कहता है "देखो, तुम्हें भी उन जैसा बनना है।" मैं अपने बच्चों को ऐसे बेहूदा अंधविश्वासों में कदापि नहीं पड़ने दूंगा।

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