एक और अंधविश्वास – बृहस्पतिवार को बीमारों या घायलों को देखने न जाएं – 7 मार्च 13

अन्धविश्वास

मैं आपको पहले बता चुका हूं कि कई लोगों को हैरानी हो रही थी कि गोविंद के साथ मंगलवार जैसे शुभ दिन दुर्घटना क्यों घटी। आज मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि क्यों ये सब लोग नहीं चाहते थे कि गोविंद की सर्जरी बृहस्पतिवार को हो। दुर्घटना के तुरंत बाद जब हम गोविंद को अस्पताल ले आए तो डॉक्टरों ने उसका एक्स – रे करवाया। रिपोर्ट आने पर उन्होंने बताया कि यह कोई छोटा मोटा फ्रैक्चर नहीं है बल्कि हड्डियां पूरी तरह टूट चुकी हैं। कहने का मतलब यह कि टांग पर प्लास्तर चढ़ा देने मात्र से बात बनने वाली नहीं है। टूटी हड्डियों के दोनों सिरे जोड़ने के लिए टांग की सर्जरी करनी पड़ेगी। गोविंद के परिवारजन एवं अन्य रिश्तेदार जो वहां इकठ्ठे थे, सब के सब इस बात पर एकमत थेः डॉक्टरों को जो करना है करें, लेकिन गुरुवार को सर्जरी न करें।

मैं शाम को उस बात को समझ नहीं पाया। मैं इस बात को भूल भी गया था लेकिन जब मैं बुधवार को वापिस अस्पताल आया तो गोविंद के पास बैठे एक सज्जन, जो जाने के लिए बस तैयार ही थे, बोले, "मैं तुम्हें देखने रोज आया करूंगा, कल को छोड़कर" उनके जाने के बाद मैंने गोविंद से पूछा – तुम गुरुवार को ऑपरेशन क्यों नहीं करवाना चाहते हो और ये सज्जन गुरुवार को क्यों नहीं आ सकते?

तब कहीं जाकर गोविंद ने मुझे इस अंधविश्वास के बारे में बताया। गुरुवार एक शुभ दिन नहीं माना जाता। इस दिन जो भी काम करेंगें, वह पूरा नहीं होता और अग़र यह कोई अशुभ काम है तो निश्चित ही इसकी पुनरावृत्ति होगी।

इसका अर्थ इस प्रकार समझें कि वे सब लोग बृहस्पतिवार को सर्जरी इस कारण से नहीं चाहते थे कि इस दिन की गई सर्जरी असफल होगी और डॉक्टरों को यह ऑपरेशन दोबारा करना पड़ेगा। गोविंद और वहां मौजूद परिवारजनों ने बताया कि बहुत से डॉक्टर भी गुरुवार को सर्जरी नहीं करते।

यह बात सुनकर मैं अपने परिचित डॉक्टरों के बारे में सोचने लगा और एक सच मेरे सामने आयाः उनमें से बहुत से डॉक्टर गुरुवार को अपना क्लीनिक बंद रखते हैं! ऐसा नहीं है कि केवल आम लोग अंधविश्वास के चलते इस दिन डॉक्टर के पास नहीं जाते बल्कि स्वयं कई डॉक्टर भी अंधविश्वासी हैं। मैंने कई डॉक्टरों के क्लीनिक के मुख्य दरवाजे पर बुरी नज़र से बचाने वाले टोटके लटकते हुए देखे हैं। अस्पतालों में लिखा रहता है "हम सेवा करते हैं, इलाज तो 'वह' करता है" मैं सोचने लगा कि इन डॉक्टरों ने विज्ञान का अध्ययन किया है तथा शरीर, उसमें होने वाली बीमारियों एवं उनके इलाज के बारे में जानते हैं। इसके बावजूद ये इस बात में विश्वास क्यों करते हैं कि गुरुवार एक अशुभ दिन होता है!

और ये मिजाज़पुर्सी के लिए आने वाले लोग बृहस्पतिवार को क्यों नहीं आयेंगें, भई? यहां भी वही अंधविश्वास हावी है: यदि आप किसी ऐसे घर में जाते हैं जहां गुरुवार को कोई मौत हुई है तो आपको दोबारा फिर किसी और की मातमपुर्सी के लिए उस घर में आना पड़ेगा – मतलब आपने पहले से ही सोच लिया कि इस घर में एक मौत और होगी। इसी तरह किसी बीमार का हाल पूछने के लिए गुरुवार को नहीं जाना चाहिए। गोविंद ने मुझे बताया कि मैं उसके परिवार के सदस्य जैसा हूं इसलिए कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन जो लोग इस बात में विश्वास रखते हैं, उनके यहां अग़र आप गुरुवार को मरीज़ का हाल पूछने जाते तो वे लोग आप पर बहुत नाराज़ होते। वे सोचते कि मैं उनका शुभचिंतक नहीं हूं और चाहता हूं कि ऐसी दुर्घटना दोबारा घटे।

मैंने इस बात का विरोध किया और पूछा कि मेरे जैसे लोगों का क्या जो इन अंधविश्वासपूर्ण नियम – कायदों से परिचित नहीं हैं। वह मुस्कराकर बोला, "आप समाज में रहते है । क्या समाज के नियम – कायदों की जानकारी आपको नहीं होनी चाहिए?"

मैं इन सब बातों से अनजान हूं और आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि जिस दिन को आप अशुभ मानते हैं, उस दिन यदि मैं आपके यहां आ जाऊं तो बुरा न मानिएगा। मैं इस बात से अनभिज्ञ हूं और आपका बुरा बिल्कुल नहीं चाहता हूं। गोविंद और उसके परिवार वालों की तरह आप भी मेरे इस अधार्मिक भोलेपन का बुरा न मानना।

आज मैंने गोविंद से फोन पर बात की और पूछा कि उसे अस्पताल से छुट्टी कब मिलेगी। डॉक्टर शाम को आया था और उसने नया एक्स – रे देखा था। दो दिन पहले भी हम इस बारे में चर्चा कर रहे थे कि वह अस्पताल से कब घर लौटेगा। वहां आए हुए रिश्तेदारों ने साफ कह दिया था, "अग़र बुधवार को छुट्टी मिलती है तो ठीक है। लेकिन यदि डॉक्टर गुरुवार को छुट्टी देता है तो हम एक दिन और यहां रुकेंगें और अगले दिन शुक्रवार को घर ले जाएंगें।" वे नहीं चाहते कि गोविंद गुरुवार को घर जाए। अगर ऐसा होता है तो उसे दोबारा अस्पताल आना पड़ेगा। मैंने फिर विरोध करते हुए कहा, "वह यहां रहकर ऊब चुका है। पिछले एक हफ्ते से वह इस छोटे से कमरे में पड़ा हुआ है। उसे घर जाने की इजाज़त मिल गई है तो फिर आप लोग एक दिन और क्यों रखना चाहते हैं यहां? क्या आप लोग अपने इस अंधविश्वास की वजह से अस्पताल का एक दिन का खर्चा और बर्दाश्त करोगे?" जवाब बड़ा चौंकाने वाला था, "जब किसी बृहस्पतिवार को आपको कोई बुरा अनुभव होगा, तब आप भी इसमें विश्वास करने लगेंगें।" इसी तरह धर्म का व्यापार चलता है: वे डरा – धमकाकर आपको अपने अंधविश्वास में शामिल कर लेते हैं। मैं उन लोगों से आगे बहस नहीं करना चाहता था जिन्होंने अपनी बुद्धि को धर्म को बेच दिया है। ऐसी परिस्थिति में गोविंद बीच का रास्ता पकड़ना चाहता था। वह कहने लगा, "बालेन्दु, मैं जानता हूं कि तुम बिल्कुल सही कह रहे हो लेकिन हमें रीति – रिवाजों का पालन करना पड़ता है और हम अपने बड़ों की बात को टाल नहीं सकते।" और आज सुबह जब मैंने यह सुना, उसे अस्पताल घर जाने की अनुमति तो मिल गई है लेकिन वह आज नहीं बल्कि कल शुक्रवार के शुभ दिन घर जाएगा, तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ।

Leave a Comment