मंगलवार को भगवान आपकी रक्षा करते हैं – बेवकूफाना अंधविश्वास! – 5 मार्च 13

अन्धविश्वास

कल मैंने आपको बताया था कि पिछले एक हफ्ते से मैं रोज आगरा जा रहा हूं अपने मित्र गोविंद से मिलने के लिए। पिछले मंगलवार को हुई एक सड़क दुर्घटना में पैर की हड्डी टूटने के बाद से वह आगरा के एक अस्पताल में दाखिल है। मेरी तरह और भी बहुत लोग गोविंद से मिलने आते हैं। आनेवालों की बातचीत का एक हिस्सा मैंने सुना तो मैं भी बीच में बोल पड़ा क्योंकि बातचीत मेरे प्रिय विषय पर हो रही थीः धार्मिक अंधविश्वास!

यह चर्चा तब छिड़ी जब आगंतुकों में से एक ने गोविंद से पूछा कि यह दुर्घटना किस दिन हुई थी। वह मंगलवार का दिन था और साथ ही गोविंद ने यह भी जोड़ा, "जबकि मंगलवार तो बड़ा शुभ दिन होता है" अधिकांश हिंदू इस बात में विश्वास करते हैं कि मंगलवार एक पवित्र दिन होता है, यह भगवान का दिन होता है और वे इस दिन विशेष प्रार्थनाएं करते हैं। आम तौर पर वे ऐसा मानते हैं कि इस दिन सब कुछ शुभ ही होता है।

बड़ा प्रश्न यह थाः तो फिर यह दुर्घटना मंगलवार को क्यों घटी? मुझे उम्मीद थी कि धर्मभीरू लोग अपने अंधविश्वास की पुष्टि करने के लिए कोई न कोई उत्तर ढूंढ ही लेंगें – और मुझे निराशा नहीं हुई। ईश्वर की कृपा से, जो मंगलवार को विशेष रूप से कृपालु हो जाता है, बहुत ज्यादा बुरा नहीं हुआ। केवल टांग की हड्डी टूटी। अग़र यह दुर्घटना मंगलवार को न होती तो न जाने और क्या बुरा होता!

अब मैं स्वयं को रोक नहीं पाया और उन लोगों से पूछा,"भगवान ने उसे इस आफत में डाला ही क्यों?"

जवाब मिला कि भगवान तो हमेशा हमारा भला ही करते हैं और जो कुछ भी बुरा हमारे साथ होता है वह हमारे कर्मों का फल होता है। वाह! धार्मिक विश्वासों का यह लचीलापन बड़ा दिलचस्प लगता है मुझे! आप अनापशनाप बोलते रहिए और अपनी बक़वास की पुष्टि के लिए आपको कोई न कोई धार्मिक तर्क अवश्य मिल जाएगा। मेरे विचार से भाग्य और भगवान एक साथ नहीं चल सकते। यदिं अच्छी बातों का श्रेय आप भगवान को देते हैं तो बुरी बातों का ठीकरा कर्मों के ऊपर क्यों फोड़ते हैं? क्या आपके अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के कर्मों के लिए भगवान को जिम्मेदार नहीं होना चाहिए? जब मैं पूछता हूं कि दुनियाभर में बच्चे भूख से क्यों मर रहे हैं तो यही कर्मों का लचर सा तर्क दिया जाता है। ये लोग कहते हैं कि ये उन बच्चों के कर्मों का फल है कि भगवान उन्हें नहीं बचाता। उन्हें अपने कर्मों का फल भुगतना ही होगा। भगवान यह पक्षपात क्यों करता है कि कुछ लोगों को तो उनके दुर्भाग्य से बचा लेता है और कुछ को नहीं?

आप मानते हैं कि आपने पाप किया है इसलिए आपका भाग्य बुरा है। आपके दुर्भाग्य आपके साथ दुर्घटना घटी लेकिन ईश्वर ने आपका जीवन बचा लिया। उसने आपका जीवन तो बचा लिया लेकिन आपकी टांग नहीं बचा पाया वह। यदि भगवान आपका सिर जमीन से टकराने से बचा सकता है, यदि टेंपो से उछलकर बाहर गिरने पर वह आपको ऐसे स्थान पर गिरने से बचा लेता जहां कांच या ऐसी ही कोई खतरनाक वस्तु पड़ी हुई होती, यदि उसने सड़क पर दौड़ती हुई अन्य कारों के नीचे आने से आपको बचा लिया तो क्यों नहीं वह आपकी हड्डियों को टूटने से बचा पाया? उसने उस कार को टेंपो से टकराने ही क्यों दिया? उसने आपको टेंपो से बाहर गिरने ही क्यों दिया?

क्या उस वक़्त भगवान किसी और काम में व्यस्त था और आपका ख्याल उसे तब आया जब आपकी टांग टूट चुकी थी? कहीं वह ऐसा तो नहीं सोचता कि आप नीचे गिरें मग़र आपकी हड्डियां सही सलामत रहें, तो क्या यह कुछ अटपटा नहीं लगेगा? या फिर वाकई भगवान ने सोचा हो 'सुन रे गोविंद, उस वक़्त तेरा नसीब खराब था। लेकिन इतना भी खराब नहीं था तेरे दिमाग़ में कोई गंभीर चोट आती। खैर मना कि बात हड्डी पर टल गई।'

न तो वे लोग मुझे समझा पाए और न ही मैंने उन्हे अपनी बात समझाने की कोशिश की। वे तो बस इस बात में विश्वास करना चाहते थे कि भगवान ने उसे बचा लिया। वे आज फिर भगवान से प्रार्थना कर रहे होंगें कि उसकी सर्जरी सकुशल हो जाए, आखिरकार आज मंगलवार जो है! लेकिन आज मैं भी अस्पताल जाऊंगा और कामना करूंगा कि डॉक्टर के हाथ से उसकी सर्जरी अच्छी तरह संपन्न हो जाए। सर्जरी खत्म होने के बाद मैं अस्पताल में उसके साथ रहूंगा। यह बात कतई मायने नहीं रखती कि आप ईश्वर में विश्वास करते हैं या नहीं। मायने रखता है आपका स्नेह और सहयोग जो एक मित्र को उसके संकट की घड़ी से उबरने में मदद करता है।

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