ज्योतिषशास्त्र – दुनिया के लिए अंधविश्वास, भारत के विश्वविद्यालयों में पठन – पाठन का विषय! – 18 मार्च 13

अन्धविश्वास

पिछले सप्ताह मैंने अपनी डायरी में पांच विभिन्न प्रकार के अंधविश्वासियों के बारे में लिखा। जब मैं डायरी के वे पन्ने लिख रहा था तो मुझे विचार आया कि क्या ज्योतिषशास्त्र में विश्वास रखने वाले लोगों को भी इस श्रेणी में शामिल करना चाहिए। अंततः मैंने उनके लिए अलग से एक नया पन्ना लिखने का निर्णय लिया जिसमें आज मैं भारत में ज्योतिषशास्त्र की स्थिति के बारे में चर्चा करूंगा।

भारत एक धर्मप्रधान देश है और यहां धर्म के नाम पर अनेकों प्रकार के अंधविश्वासों को सत्य बनाकर प्रचारित किया जाता रहा है। यही कारण है कि लोग अंधविश्वासों के बारे में भ्रमित रहते हैं और यह निर्णय नहीं कर पाते कि ये सच हैं या झूठ। बहुत लोग अब यह समझने लगे हैं कि उनके माता – पिता या नाना – दादा जिन पुरानी परम्पराओं और आस्थाओं का पालन करते थे, वे हमेशा सही हो भी सकती हैं और नहीं भी। यही बात ज्योतिषशास्त्र पर भी लागू होती है। युगों से लोग इसे मानते आ रहे हैं। कुछ के लिए यह मिथ्या है और कुछ के लिए सत्य।

सदियों से हिंदू धर्म लोगों को यह समझाता आ रहा है कि ज्योतिषशास्त्र शुद्ध गणनाओं और तथ्यों पर आधारित विज्ञान है। अब स्थिति यह आ गई है कि अग़र काली बिल्ली रास्ता काट जाए तो लोग इसे हंसी में उड़ा देते हैं लेकिन यदि कोई ज्योतिषी उनकी जन्मकुंडली में किसी एक अशुभ दिन के बारे में चेतावनी दे दे तो वे इसे पूरी गंभीरता से लेते हैं।

मैंने आपको शुभमुहूर्त के बारे में बताया था और साथ ही यह भी बताया था कि किस प्रकार भारत में सिज़ेरियन प्रसवों की संख्या में भारी इज़ाफा हो रहा है। इस प्रकार के प्रसव में किसी एक विशेष शुभ घड़ी का चुनाव करके सिज़ेरियन के द्वारा समय से पूर्व बच्चे का जन्म कराया जाता है ताकि उसकी जन्मकुंडली अच्छी बने। समस्या तो यह है कि लोग वास्तव में यह मानते हैं कि ज्योतिष महज़ एक धार्मिक अंधविश्वास नहीं अपितु एक विज्ञान है।

यहां मैं एक बात और स्पष्ट कर दूं कि खगोलशास्त्र वास्तव में एक विज्ञान है जिसमें ग्रहों की चाल का अध्ययन किया जाता है और इसी विज्ञान की बदौलत हम यह जान पाए हैं कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है, सौरमंडल में कितने ग्रह हैं और पृथ्वी से कौन सा सितारा किस स्थान पर दिखाई देता है।

वहीं दूसरी तरफ ज्योतिषशास्त्र भविष्य में होने वाली घटनाओं की भविष्यवाणी करता है और बताता है कि ग्रह – नक्षत्रों का आपके व्यक्तित्व एवं जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा। ज्योतिषी मानते है कि वे ग्रहस्थिति की मदद से गणना करके यह बता सकते हैं कि आपके जीवन में प्रेम के लिए कौन सा समय अच्छा रहेगा, व्यापार के लिए कौन सा दिन लाभदायक रहेगा। वे यह भी बताते हैं कि कौन सा समय कुछ खास काम करने के लिए उचित नहीं है। कोई विघ्न – बाधा है तो वे उसके निवारण के उपाय भी बताते हैं। इसी प्रकार ज्योतिष का धंधा चलता है। भारत के हर कोने में ज्योतिषी मौजूद हैं। जीवन में जब भी कोई बड़ा निर्णय लेना होता है तो आम धार्मिक भारतीय ज्योतिषियों की सेवाएं लेता है। मिसाल के लिए, जब आप कोई नया व्यापार शुरु करते हैं या फिर नया घर खरीदते हैं। जब आपके यहां बच्चे का जन्म होता है तो आप ज्योतिषी से उसकी जन्मकुंडली बनवाते हैं और हर कदम पर उसकी सलाह लेते हैं।

अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि क्यों खगोलशास्त्रियों को बुरा लगता है जब उन्हें लोग ज्योतिषी समझकर अपना भविष्य पूछने लगते हैं। उन्होंने कई बार इस प्रचलित विश्वास को तोड़ने की कोशिश की कि ज्योतिष एक विज्ञान है, लेकिन सफल नहीं हुए। सन 2011 में बॉम्बे हाइकोर्ट ने 2004 के एक फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि ज्योतिष एक विश्वसनीय विज्ञान है और इसे विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जा सकता है। कहने का मतलब यह कि अब आप निराधार गणना के आधार पर भविष्यवाणी करने तथा अंधविश्वास में डिग्री हासिल कर सकते हैं।

भारत एक अनूठा देश है। चौंकिए मत, यहां ज्योतिष जैसा अंधविश्वास भी अध्ययन का विषय हो सकता है। दुर्भाग्य से वह समय अभी बहुत दूर है जब लोग इसे कोरी बक़वास मानने लगेंगे।

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