दाम्पत्य संबंधों पर तनाव का नकारात्मक असर! 2 अक्टूबर 2014

कल मैंने बताया था कि 'आवश्यक कार्यों' की सूची आपको तनावग्रस्त कर सकती है। आजकल बहुत से लोगों की शिथिलता और काम पर न जा सकने का मुख्य कारण उनका तनावग्रस्त होना है। उसका नकारात्मक प्रभाव कार्यालय में या काम करते समय कम नहीं हो जाता। कई सर्वेक्षण यह बात स्पष्ट करते हैं कि ज़्यादातर दम्पतियों की समस्याओं का कारण पति या पत्नी का तनावग्रस्त होना या किसी दबाव में होना होता है। तनाव के कारण सम्बन्ध पूरी तरह टूटकर बिखर भी सकते हैं!

यह साधारण बात है कि काम के समय या कार्यालय में लोग तनावग्रस्त हों। आपका अधिकारी आपसे ज़्यादा से ज़्यादा की अपेक्षा करता है और आप पाते हैं कि समय बहुत कम है, महत्वपूर्ण व्यावसायिक मीटिंगों में शामिल होना है, बहुत बड़ी रकम का सवाल है या आपकी प्रतिष्ठा का मामला है और हर चीज़ आजकल इतनी तेज़ गति से भाग रही है कि सारे काम निपटाने का आपको वक़्त ही नहीं मिल पाता।

यह समझना थोड़ा कठिन हो सकता है कि आखिर यह तनाव पत्नी या पति के साथ आपके प्रेम सम्बन्धों को किस तरह नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है या तहस-नहस कर सकता है। लेकिन यह पूरी तरह संभव है-क्योंकि आपके दिमाग में घर कर गया यह तनाव सिर्फ ऑफिस तक ही महदूद नहीं रहता! आप इस तनाव को घर ले आते हैं!

अधिकतर लोग आजकल उनके निजी वक़्त में भी काम करने के लिए उपलब्ध होते हैं। उनका फोन ईमेल तथा वार्तालाप के ज़रिए उन्हें अपने काम के साथ अद्यतन रखता है। कुछ नियोक्ता उन्हें 24/7 उपलब्ध रहने के लिए मजबूर करते हैं। स्वाभाविक ही, अगर आप ऑफिस में या काम के कारण तनावग्रस्त हैं तो पत्नी या पति के प्रति सामान्य, स्नेहिल व्यवहार के लिए आपको कुछ देर आराम और सुकून की ज़रुरत है और अच्छे अभिभावक बनने के उद्देश्य से भी।

निश्चय ही पत्नी या पति आपके साथ अच्छा, रचनात्मक समय बिताना चाहते हैं लेकिन काम के लम्बे और तनावपूर्ण दिन के पश्चात संभावना यही होती है कि आप ज्यादा कुछ नहीं करना चाहते! यहाँ तक कि, हो सकता है, आप ज़्यादा बात भी करना पसंद न करें! बल्कि आप चाहेंगे कि कोई आपकी मालिश कर दे, नहा लें, बढ़िया भोजन किया जाए और सोफे पर पसरकर शांति के साथ वक़्त गुज़ारा जाए। लेकिन हो सकता है आपसे ही कोई मालिश की अपेक्षा कर रहा हो, चाहता हो कि लोगों से मिला-जुला जाए, बाहर चलकर थोड़ा नाच-गाना हो या साथ बैठकर कुछ अलग सा किया जाए।

इसके विपरीत, क्योंकि अभी आप थोड़ा आराम करके तनावमुक्त नहीं हो पाए हैं, आपकी प्रतिक्रिया सामान्य से बहुत अलग होती है। लगातार तनाव आपको चिड़चिड़ा बना देता है और आप असंयमित व्यवहार करने लगते हैं, बात-बात पर गुस्सा होते हैं। अपने साथी के साथ आपका यह व्यवहार कतई स्नेहपूर्ण नहीं कहा जा सकता!

आप में इतनी ऊर्जा नहीं बची होती कि आप अपने संबंधों पर अपेक्षित ध्यान दे सकें। आपके प्रेम में कोई कमी नहीं आई है, कतई नहीं, और शायद यह बात आपका साथी भी जानता है लेकिन एक स्नेहपूर्ण सम्बन्ध आपसे थोड़ी सी अतिरिक्त अपेक्षा करता है। आपको ऐसा समय चाहिए, जिसमें दिन भर के काम के चलते ऊँघते हुए सुप्त मस्तिष्क की जगह तनाव मुक्त और चैतन्य मन के साथ आप कुछ देर एक साथ बैठ सकें। सिर्फ काम से हुई थकान से मुक्ति के लिए ही नहीं बल्कि यूँ ही बातचीत करने, हँसने-खिलखिलाने और एक साथ मौज-मस्ती करने के लिए भी आपमें इच्छा और शक्ति होनी चाहिए। यही कारण है कि कई लोग हफ्ते भर की छुट्टियों में भी पूरा विश्राम और सुकून प्राप्त नहीं कर पाते: उन्हें कुछ दिन अपने आपको शांत करने में लगते हैं और उसके बाद ही वे छुट्टियों का आनंद उठा पाते हैं!

तो, इससे पहले कि आपका साथी ऐसी अवस्था को प्राप्त कर ले कि नाराज़ होने लगे कि आप इतने तनावग्रस्त क्यों हैं, ऐसी कोई बात हो इससे पहले: कुछ बदलिए। जीवन में प्रेम से बढ़कर कुछ नहीं है। काम नहीं, पैसा नहीं। मैं जानता हूँ कि जीने के लिए काम आपको करना है, पैसा भी आपको कमाना है लेकिन अपने तनाव की सीमा को कुछ कम कीजिए!

यह नितांत आवश्यक है-आपके लिए, आपके जीवन के लिए और आपके प्रेम के लिए!

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