कुछ समय पहले मैंने आपको मेरी पत्नी की आवश्यक कार्यों की सूची बनाकर काम करने की आदत के बारे में बताया था। व्यवस्थित बने रहने और अपने आवश्यक और इच्छित कामों को न भूलने का यह एक अच्छा तरीका है। लेकिन इस आदत में मैं इस बात का खतरा भी देखता हूँ कि वह आपके मस्तिष्क को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है। जी हाँ, ‘आवश्यक कार्यों’ की सूची आपको तनाव से भर सकती है!
ऐसी सूची बनाने वाले सभी लोग जानते हैं कि इस सूची में ज़्यादा और कम महत्वपूर्ण काम एक साथ दर्ज होते हैं। कंप्यूटर पर आप ऐसी एक से एक बेहतरीन सूचियाँ बना सकते हैं, जिसमें विभिन्न रंगों का, याद रखने के लिए सुंदर-सुंदर निशानों का और कामों की प्रगति का जायजा लेने हेतु चिप्पियों आदि का उपयोग करके सूची को सुंदर और दर्शनीय बनाया जा सकता है। या फिर एक ‘आवश्यक कार्य’ बोर्ड बना सकते हैं, जो सदा आपके सामने भौतिक रूप से उपलब्ध होगा और जिसमें आप विभिन्न रंगों से अपने कामों को क्रमवार सजाकर लिख सकते हैं। कैसे भी बना लें, आप सामान्यतः महत्वपूर्ण कामों को पूरा करने की तरफ पहले ध्यान देंगे और कम महत्वपूर्ण कामों को बाद में करने का विचार करते रहेंगे।
इनमें से कुछ आसान काम होते हैं और उन्हें निपटाने में आपको आनंद मिलता है-जब भी आपके पास कुछ खाली समय होता है, उन्हें तुरंत निपटाया जाता है। लेकिन कुछ काम ऐसे होते हैं, जिन्हें करने की आपकी इच्छा नहीं होती। जब भी आप उन कामों की ओर देखते हैं, आप नाक भौं सिकोड़ने लगते हैं और सोचते हैं कि इससे ज़्यादा महत्वपूर्ण बहुत से काम हैं, जिन्हें निपटाना ज़रूरी है। या सोचते हैं, अभी आपको थोड़े विराम की ज़रूरत है और उस काम को हाथ लगाने से पहले कुछ देर आराम कर लेना चाहिए। आप हीला-हवाला करते हैं, उसे टालते हैं, स्थगित करते जाते हैं और अंततः लंबे समय तक उन्हें अपनी ‘आवश्यक कार्यों’ की सूची में बने रहने देते हैं, कई बार सालों तक।
एक बार जब कोई काम आवश्यकता से अधिक समय तक आपकी इस सूची में बना रहता है और पुराना पड़ जाता है तो फिर आप भूल जाते हैं कि उस काम को निपटाने में कितनी मशक्कत करनी होगी। आपके मन में अस्पष्ट सा विचार तो होता है कि इस संबंध में क्या किया जाना है मगर जितनी बार आप उसे टालते हैं, उसे स्थगित करते जाते हैं, उतना ही वह दुष्कर होता जाता है और फिर उसे निपटाने में उत्तरोत्तर अधिक से अधिक प्रयास करना पड़ता है।
धीरे-धीरे आपकी ‘आवश्यक कार्यों’ की सूची लंबी होती चली जाती है। जब भी आप निश्चित रूप से करने के लिए उसमें कोई नया काम जोड़ते हैं, ऐसे कामों की सूची कुछ लंबी दिखाई देती है। काम, जिन्हें अंजाम तक पहुँचाना ही है। काम, जिन्हें आपको निपटाना चाहिए! कोई न कोई काम हमेशा रहा आता है, सूची कभी समाप्त नहीं होती!
आप समझ रहे होंगे, मैं किस तरफ इशारा कर रहा हूँ-इन कामों का हमेशा हमेशा के लिए दिमाग में बने रहना आपकी दिमागी सेहत के लिए ठीक नहीं है! कब होगा कहना मुश्किल है मगर कभी न कभी आपके मन में यह एहसास घर करने लगेगा कि आप अपने काम कभी भी समाप्त नहीं कर पाएँगे। फिर आपको अपने लिए पूरी तरह उन्मुक्त समय कभी नहीं मिल पाएगा क्योंकि ऐसा समय तो सिर्फ ‘आवश्यक कार्यों’ के बीच ही उपलब्ध होगा!
मुझे लगता है कि यह तनाव पैदा करता है। यह बहुत धीरे-धीरे होता है और शायद इतने सूक्ष्म स्तर पर काम करता है कि आपको उसका एहसास ही नहीं हो पाता। आप सोचते हैं कि आप कंप्यूटर बंद करके इस सूची से मुक्त हो जाएँगे। लेकिन वह वहाँ मौजूद रहती है। यह एहसास कि काम निपटाने के लिए आपने पर्याप्त प्रयास नहीं किए, कि अभी भी आपको कोई न कोई काम निपटाना है।
इसलिए इस ‘आवश्यक कार्यों’ की सूची के संबंध में मैं एक सलाह दूँगा: उन कामों को निपटाने का एक समयबद्ध कार्यक्रम भी उन कामों के साथ दर्ज कीजिए। लिखिए कि कोई काम आप कब तक पूरा कर लेंगे-और उस कार्यक्रम पर अटल रहिए! अगर कुछ काम ऐसे हैं, जिन्हें आप कर सकते हैं तो ‘आइडिया’ नामक एक और सूची बनाइए और उन्हें वहाँ लिख लीजिए। यह आप पर कोई दबाव नहीं डालेगा और जब भी समय मिलेगा, उन्हें आप निपटा सकेंगे। या फिर, इस सारे झमेले को ही दिमाग से बाहर निकाल रद्दी की टोकरी में झोंक दीजिए और अपने महत्वपूर्ण कामों को याद रखना और उन्हें समय पर निपटाना सीखिए। इतना भर कीजिए कि उसके कारण जीवन भर का तनाव न हो!
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