तनाव कैसे कम करें: अपने काम से प्रेम करके – 11 नवंबर 2014

आश्रम में चलने वाली रिट्रीट्स, रोज़ सैकड़ों की संख्या में आने वाले ईमेल और दूसरे संदेश, स्कूल का काम आदि जैसी रोज़मर्रा की व्यस्तताओं के साथ ही हम सब इस वक़्त आयुर्वेदिक रेस्तराँ के ज़ोर-शोर से चल रहे निर्माण कार्य में बहुत व्यस्त हैं। शाम को शांत बैठकर आज के अपने ब्लॉग में क्या लिखूँ, यह सोचते हुए मुझे महसूस होता है कि जीवन के विभिन्न अंतरालों में समय का एहसास भी अलग-अलग होता है!

जब आपके पास करने के लिए कुछ नहीं होता, समय जैसे लंबा खिंचता चला जाता है, जैसे बहुत धीरे-धीरे बीत रहा हो और जब आप बहुत से कामों में व्यस्त होते हैं और चाहते हैं दिन में 24 घंटे से ज़्यादा समय उपलब्ध तो जैसे वह पंख लगाकर उड़ने लगता है! जब आप अपने काम में डूबे हुए होते हैं तो हर बार घड़ी देखकर आश्चर्य में पड़ जाते हैं-घड़ी हमेशा आपके अनुमान से आगे का समय बता रही होती है!

यह आपके तनाव का कारण बन सकता है। समय भाग रहा होता है, आपके पास निपटाने के लिए बहुत से काम पड़े होते हैं और कामों की सूची छोटी होने का नाम नहीं लेती बल्कि बहुत से काम हर बार लंबित रह जाते हैं! इसके विपरीत, बार-बार कोई न कोई मामला दरपेश होता है, कोई नई समस्या मुँह बाए सामने खड़ी रहती है या अचानक आपको महसूस होता है कि आप कोई काम भूल गए हैं और अब उसे अंजाम देने में दूनी मेहनत करनी पड़ेगी! उन अतिरिक्त कामों को निपटाना, उनके लिए व्यर्थ ही अतिरिक्त श्रम करना, भले ही काम कोई सा भी हो, आपको अखरता है। उसके कारण आपका काम बढ़ गया, आपको अतिरिक्त श्रम करना पड़ा और नतीजतन, आपके तनाव में भी इज़ाफ़ा हुआ-इसलिए यह काम अब आपको पसंद नहीं आता।

इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि काम का यह माहौल आपको चिड़चिड़ा और गुस्सैल बना देता है। दूसरा कोई बताता है कि फलाँ काम अब तक नहीं हुआ है तो आप तुरंत और तीखा जवाब देने को उद्यत होते हैं, भले ही बाद में आपको खुद इस पर पछतावा हो। लेकिन यह भी संभव है कि आप अपनी प्रतिक्रिया को जायज़ ठहराएँ और सोचें: ये नहीं जानता कि पहले ही आप पर काम का कितना अधिक बोझ है और उसे निपटाने के लिए समय कितना कम?

दुर्भाग्य से, इसका परिणाम यह होता है कि काम ठीक तरह से हो नहीं पाता। इस तनाव के चलते आप काम की महत्वपूर्ण बारीकियाँ मिस कर जाते हैं, उसे अच्छी तरह नहीं कर पाते और अंततः काम पूरा होने के बाद आप उससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो पाते और दुखी रहते हैं कि काश आपके पास पर्याप्त समय होता और आप उसे पूरे मन से, अच्छी तरह कर पाते।

मैं अपने कामों के साथ यह नहीं होने देता। मैं तनाव को दूर से ही सलाम करता हूँ, सिर्फ इसलिए नहीं कि वह स्वास्थ्य के लिए हानिकर है बल्कि इसलिए भी क्योंकि मैं जो भी करता हूँ उससे प्रेम करता हूँ। मैं चाहता हूँ कि वह अच्छा हो और उसे करते हुए मुझे मज़ा आता है। इसलिए मैं तनाव जैसे फालतू कारण से न तो उसके निर्माण की प्रक्रिया को बरबाद होता देख सकता हूँ और न ही काम पूर्ण होने के बाद उससे असंतुष्ट रह जाने का खतरा मोल ले सकता हूँ।

कहा जाता है कि एकाग्रता तनाव के प्रतिकूल है। मैं भी यही मानता हूँ मगर अलग तरह से। प्रतिवाद में आप कह सकते हैं कि इतनी व्यस्तता के बीच आपके पास इतना समय नहीं होता कि आप एक जगह ध्यान लगाकर बैठ सकें। लेकिन ध्यान के मेरे तरीके में आपको यह करने की ज़रूरत ही नहीं है।

मेरा विचार यह है कि ध्यान तब सम्पन्न होता है जब आप अच्छी तरह जान रहे होते हैं कि आप क्या कर रहे हैं। अक्सर मैं दिन भर ही इस तरह का ध्यान लगाना पसंद करता हूँ। मैं जो कर रहा होता हूँ, उससे प्रेम करता हूँ और इस तरह मैं पूरे होशोहवास के साथ उसमें लिप्त रहता हूँ। भले ही बहुत से और भी काम करने हों, जो भी काम सामने आता जाता है, मैं उसी संलग्नता के साथ एक के बाद उन्हें निपटाता रहता हूँ। शाम होने पर जब मुझे पता चलता है कि अभी भी बहुत से काम बकाया है तो मैं उन्हें भी पूरी संलग्नता और उसी आनंद के साथ निपटाता चला जाता हूँ।

मैं आपको भी यही करने की सलाह दूँगा। जो भी आप करें पूरे प्रेम के साथ करें। उन्हें अच्छी तरह सम्पन्न करने के लिए उन पर पूरा समय लगाएँ। काम करते हुए आनंद का अनुभव करें!

Related posts

एक बच्चे की आँख से दुनिया को देखें और अपना तनाव शांत करें - 17 अगस्त 2015

एक बच्चे की आँख से दुनिया को देखें और अपना तनाव शांत करें – 17 अगस्त 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे ज़्यादा से ज़्यादा बच्चे बनकर वे चिंतामुक्त रह सकते हैं और जीवन का ...
हम बिना किसी तनाव, परेशानी या शिकायत के व्यस्त रहने का मज़ा ले रहे हैं! 19 जनवरी 2015

हम बिना किसी तनाव, परेशानी या शिकायत के व्यस्त रहने का मज़ा ले रहे हैं! 19 जनवरी 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि पिछले कुछ महीने वे बहुत व्यस्त रहे लेकिन न तो उन्हें इसका कोई मलाल ...
दाम्पत्य संबंधों पर तनाव का नकारात्मक असर! 2 अक्टूबर 2014

दाम्पत्य संबंधों पर तनाव का नकारात्मक असर! 2 अक्टूबर 2014

आजकल लोग तनावग्रस्त होते हुए भी कड़ी मेहनत करते हैं। किस तरह यह दाम्पत्य संबंधों के लिए मर्मान्तक हो सकता ...
'आवश्यक कार्यों' की सूची द्वारा पैदा तनाव को कैसे कम करें! 1 अक्टूबर 2014

‘आवश्यक कार्यों’ की सूची द्वारा पैदा तनाव को कैसे कम करें! 1 अक्टूबर 2014

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों ‘आवश्यक कार्यों’ की सूची एक तरफ व्यवस्थित और सुनियोजित बने रहने में आपकी ...
दूसरों के साथ अपनी तुलना मत कीजिए और खुश रहिए! 26 अगस्त 2013

दूसरों के साथ अपनी तुलना मत कीजिए और खुश रहिए! 26 अगस्त 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे दूसरों से अपनी तुलना करने पर कई लोग तनावग्रस्त और दुखी हो जाते ...
गहरे अवसाद और बर्न आउट के बाद वापस सामान्य होने की लम्बी और थका देने वाली प्रक्रिया- 22 अगस्त 2013

गहरे अवसाद और बर्न आउट के बाद वापस सामान्य होने की लम्बी और थका देने वाली प्रक्रिया- 22 अगस्त 2013

स्वामी बालेंदु उन लोगों के बारे में लिख रहे हैं, जो शारीरिक और मानसिक क्षय से पीड़ित हैं और अब ...
सफलता और शिखर पर पहुँचने की महत्वाकांक्षा कहीं तनाव, अवसाद और पतन की राह पर न ले जाए! 21 अगस्त 2013

सफलता और शिखर पर पहुँचने की महत्वाकांक्षा कहीं तनाव, अवसाद और पतन की राह पर न ले जाए! 21 अगस्त 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि किस तरह कई लोग समय से पहले बूढ़े हो जाते हैं। हर तरह का ...
ध्यान रखें, जीवन की घड़ी आपको तनावग्रस्त न कर दे!- 12 अगस्त 2013

ध्यान रखें, जीवन की घड़ी आपको तनावग्रस्त न कर दे!- 12 अगस्त 2013

Swami Balendu describes the most common life plan with its particular time limits and explains why this can create an ...

Leave a Reply