ध्यान रखें, जीवन की घड़ी आपको तनावग्रस्त न कर दे!- 12 अगस्त 2013

तनाव

कुछ दिन पहले मेरी पत्नी, रमोना और मैं उम्र और अपनी अंदरूनी घड़ी के बारे में बात कर रहे थे। जैसा कि आजकल अक्सर होता है, हमारी बातचीत अपरा को लेकर शुरू हुई कि कैसे महज डेढ़ साल में ही वह इतनी बड़ी लगने लगी है। हमने एक दूसरे से कहा कि उसे पाकर हम दोनों कितने खुश हैं। कुछ पलों के मौन के बाद रमोना ने कहा, "इससे पूर्णता का एहसास होता है, है न?" इसके बाद हमारे बीच और भी बहुत सी बातचीत हुई, जिसके कुछ बिन्दुओं को मैं यहाँ आपके साथ साझा करना चाहता हूँ।

सबके पास, सजग रूप में या अवचेतन में, अपने भावी जीवन की एक बुनियादी रूपरेखा होती है। इस रूपरेखा का विस्तृत स्वरूप हर व्यक्ति के लिए अलग होता है लेकिन मोटे तौर पर रूपरेखा सबके लिए एक जैसी ही होती है: बारहवीं तक स्कूल जाइए, फिर कोई ट्रेनिंग लीजिए या विश्वविद्यालय जाइए और नौकरी ढूँढ़िये। इसके साथ ही या इसके बाद, अपने लिए कोई लड़की देखकर शादी कीजिए, बच्चे पैदा कीजिए, अपने परिवार के साथ सुकून के साथ जीवन बिताइए। एकाध घर या कोई फ्लॅट खरीद लीजिए।

कुछ लोग इन समय सीमाओं की रूपरेखा बड़ी बारीकी से बनाते हैं, जिसमें हर लक्ष्य के लिए वे कुछ छोटी समय सीमाओं का निर्धारण करते हैं, जिससे एक खास काम उन वर्षों के भीतर पूर्ण कर लिया जाए। यह सामान्य सी बात है, आम तौर पर सभी ऐसा करते हैं। इस समय सीमा का निर्धारण करते वक़्त महिलाओं को अपनी शारीरिक सीमाओं का ध्यान भी रखना होता है: 35 साल के बाद, बच्चे पैदा करना मुश्किल या जोखिम भरा होता जाता है, हालांकि, मैंने सुना है, आधुनिक दवाइयों और इलाज की सुविधाओं के चलते यह सीमा 42 साल या 45 तक भी बढ़ाई जा सकती है। अगर उन्होंने इस समय सीमा में यह काम नहीं निपटाया तो फिर इस समय सीमा वाली उनकी योजना फेल हो जाती है। टिक-टैक, टिक-टैक…

बहुत से लोग होते हैं, जो अपनी इस समय सीमा को अच्छी तरह जानते हैं और इसके चलते अपने आपको बहुत तनावग्रस्त कर लेते हैं। कुछ दूसरे ऐसे होते हैं, जो ऐसे दबावों को अपने ऊपर नहीं लेते और उसके बारे में सोचते तक नहीं। लेकिन, इस दूसरे लोगों में भी बहुत से ऐसे होते हैं, जो अवचेतन में वही तनाव महसूस करते हैं! क्योंकि महिलाएँ पुरुषों के मुक़ाबले इस बात को अधिक तीव्रता के साथ महसूस करती हैं, मैं एक महिला का उदाहरण लूँगा, लेकिन याद रखें, पुरुष भी इस समस्या से मुक्त नहीं हैं!

अगर एक महिला बच्चों के बीच दो या तीन साल के अंतर के साथ, दो या तीन बच्चे पैदा करना चाहती है तो उसे कम से कम 30 से 35 साल की उम्र के बीच पहला बच्चा पैदा कर लेना चाहिए। अगर वह अपने जीवन-साथी के साथ कुछ समय बिताना चाहती है तो उसे कम से कम 25 और 30 साल के बीच ‘सही जीवन-साथी’ तलाश लेना चाहिए। इसके अलावा, बहुत से लोग कोई काम या नौकरी करना चाहते हैं और 25 साल की उम्र तक अधिकांश लोग विश्वविद्यालय की पढ़ाई पूरी करते हैं। वे थोड़ा-बहुत काम का अनुभव भी लेना चाहते हैं और इसलिए किसी संबंध में बंधना नहीं चाहते। तो फिर वही, तनाव, क्लेश, टिक-टैक, टिक-टैक…

जब एक बार इतना काम पूर्ण हो जाता है, जब आप अपना जीवन-साथी चुन लेते हैं और जब आप दो या तीन बच्चे भी पैदा कर लेते हैं तो काम खत्म हो जाता है! आप आराम से, शांति पूर्वक ज़िंदगी बसर कर सकते हैं, आपने अपनी योजना को कार्यान्वित कर दिया, हो गया।

मैं अच्छी तरह से समझ सकता हूँ कि, क्योंकि आपने अपने जीवन में प्रेम प्राप्त कर लिया और साथ ही देखभाल करने के लिए छोटे-छोटे बच्चे पैदा कर लिए हैं, आप अपने जीवन से संतुष्ट हैं। मगर इसी कारण मैं आपकी परेशानी, क्लेश और तनाव को, जिसे आप स्वयं अपने ऊपर ओढ़ लेते हैं और जिसे समाज की भी शह मिली होती है, किसी तरह भी उचित नहीं समझता।

आप प्रेम को जबर्दस्ती पैदा नहीं कर सकते और यह बात ही बहुत से ऐसे लोगों की सबसे बड़ी समस्या बन जाती है, जो बंधे बंधाए घेरे में, योजनाबद्ध तरीके से जीवन बिताना चाहते हैं। अपने जीवन के विषय में आप कितनी भी योजना बना लें, आप दूसरों के लिए योजना नहीं बना सकते! यही बात है, जो इस मामले को इतना परेशानकुन, क्लेशमय और तनावग्रस्त बना देती है। आपको यह प्रयास छोड़ देना चाहिए। अपनी कार्य-योजना के पीछे मत पड़िए, अपने आपको उस योजना के बारे में बार-बार याद मत दिलाइए। भरोसा रखिए कि ऐसा मौका आएगा और सहजता के साथ अपना जीवन बिताइए। कोशिश कीजिये कि अपने लिए जी सकें, जैसा चाहें, जी सकें। अपने आसपास के लोगों के लिए प्रेम से लबालब, ईमानदार, अपने लिए और दूसरों के लिए खुशी का बायस (कारण!)! बाकी चीज़ें अपने समय पर, आपके पास खुद-ब-खुद खिंची चली आएंगी। ऐसे लोगों की परवाह मत करिए जो कहते हैं कि "देर हो रही है, कुछ कीजिए!" अपनी रफ्तार और मर्ज़ी से अपना जीवन व्यतीत कीजिए!

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