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एक बच्चे की आँख से दुनिया को देखें और अपना तनाव शांत करें – 17 अगस्त 2015

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स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे ज़्यादा से ज़्यादा बच्चे बनकर वे चिंतामुक्त रह सकते हैं और जीवन का आनंद ले सकते हैं। कैसे अपना नजरिया बदलें? कुछ टिप्स यहाँ पढ़ें।

हम बिना किसी तनाव, परेशानी या शिकायत के व्यस्त रहने का मज़ा ले रहे हैं! 19 जनवरी 2015

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स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि पिछले कुछ महीने वे बहुत व्यस्त रहे लेकिन न तो उन्हें इसका कोई मलाल है और न ही इससे किसी प्रकार की मानसिक या शारीरिक थकान महसूस हो रही है-इसके विपरीत वे बहुत अच्छा महसूस कर रहे हैं!

तनाव कैसे कम करें: अपने काम से प्रेम करके – 11 नवंबर 2014

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स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि इस वक्त उनके यहाँ बहुत सी परियोजनाओं पर काम चल रहा है और लगातार उनमें व्यस्त होने के बावजूद उन्हें कोई तनाव नहीं होता। क्यों और कैसे? उनके शब्दों में पढ़ें।

दाम्पत्य संबंधों पर तनाव का नकारात्मक असर! 2 अक्टूबर 2014

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आजकल लोग तनावग्रस्त होते हुए भी कड़ी मेहनत करते हैं। किस तरह यह दाम्पत्य संबंधों के लिए मर्मान्तक हो सकता है, समझिए, स्वामी बालेन्दु के शब्दों में!

‘आवश्यक कार्यों’ की सूची द्वारा पैदा तनाव को कैसे कम करें! 1 अक्टूबर 2014

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों ‘आवश्यक कार्यों’ की सूची एक तरफ व्यवस्थित और सुनियोजित बने रहने में आपकी सहायता करती है तो दूसरी तरफ वह आपके भीतर तनाव भी पैदा कर सकती है। ऐसा न हो, इसके लिए आप क्या कर सकते हैं, यहाँ पढ़ें!

दूसरों के साथ अपनी तुलना मत कीजिए और खुश रहिए! 26 अगस्त 2013

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे दूसरों से अपनी तुलना करने पर कई लोग तनावग्रस्त और दुखी हो जाते हैं। इस आदत पर काबू पाने के लिए आप क्या कर सकते हैं, यहाँ पढ़िये!

गहरे अवसाद और बर्न आउट के बाद वापस सामान्य होने की लम्बी और थका देने वाली प्रक्रिया- 22 अगस्त 2013

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स्वामी बालेंदु उन लोगों के बारे में लिख रहे हैं, जो शारीरिक और मानसिक क्षय से पीड़ित हैं और अब उससे उबरना चाहते हैं। ऐसे लोगों को क्या चाहिए और उन्हें क्या करना चाहिए, इस विषय पर एक सलाह।

सफलता और शिखर पर पहुँचने की महत्वाकांक्षा कहीं तनाव, अवसाद और पतन की राह पर न ले जाए! 21 अगस्त 2013

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि किस तरह कई लोग समय से पहले बूढ़े हो जाते हैं। हर तरह का तनाव और दबाव उन्हें ध्वस्त कर देता है-और अंत में जब जीवन का उन्हें कोई अर्थ नज़र नहीं आता तो अवसादग्रस्त हो जाते हैं।