दो इंच की बिकनी से क्या फर्क पड़ता है? 22 अक्टूबर 2014

पिछली बार जर्मनी में मैं और रमोना जब एक समुद्री बीच पर टहल रहे थे तो हम न्यूडिस्ट बीच की 'सीमा रेखा' पर पहुँच गए थे। जर्मनी में बीचों पर सूचना-पट्ट लगे होते हैं, जिन पर साफ़ लिखा होता है कि इसके आगे वह इलाका है, जहाँ नग्न घूमने-फिरने की छूट है। मैंने कहा कि यह बड़ी हास्यास्पद बात है- आखिर बिकनी भर पहन लेने से कितना फर्क पड़ता है? वह शरीर का सिर्फ कुछ इंच हिस्सा ही तो ढँकती है!

कुछ देर बाद भी वे वाक्य मेरे दिमाग में गूँज रहे थे। मैं जानता हूँ, मुझे यह कहता देखकर कुछ लोगों को मेरे बारे में ग़लतफ़हमी हो सकती है। वे सोच सकते हैं कि मैं बिकनी पहनने के खिलाफ हूँ बल्कि उससे बढ़कर, वे सोच सकते हैं कि कि मैं शरीर को ज़्यादा से ज़्यादा ढँककर रखने के पक्ष में हूँ! विश्वास कीजिए, ऐसा कुछ मैं बिल्कुल नहीं सोच रहा हूँ!

न तो मैं न्यूडिस्ट हूँ और न ही शरीर का हर इंच कपड़ों से ढँककर रखने का समर्थक हूँ। वास्तव में मैं स्वाभाविक जीवन जीने का समर्थक हूँ और अगर लोग तैरने वाले कपड़ों में बीचों पर घूमते हैं या वहाँ नंगे बैठे या लेटे रहते हैं तो इसमें मुझे कुछ भी गलत नहीं लगता। भले ही मैं स्वयं इतने सारे लोगों के सामने नंगा नहीं बैठता लेकिन अगर कोई दूसरा ऐसा करना चाहता है तो मुझे कोई एतराज़ भी नहीं है।

लेकिन शरीर के प्रदर्शन के सम्बन्ध में एक बात मुझे पसंद नही है: जब महज दिखावा करने की नीयत से ऐसा किया जाता है, दूसरों का ध्यान अपनी ओर खींचने के उद्देश्य से अपने शरीर को उघाड़कर दिखाया जाता है और फिर दूसरों से एक ख़ास तरह की प्रतिक्रिया की अपेक्षा की जाती है। यह सहज-स्वाभाविक नहीं है, नैसर्गिक नहीं है और इसलिए मुझे यह प्रदर्शन अक्सर थोड़ा अजीब सा लगता है।

यह ऐसा विषय है, जिस पर बात करते समय अपने शब्दों को लेकर बड़ी सतर्कता बरतनी चाहिए: मैं आपसे यह नहीं कह रहा हूँ कि अपने वक्ष के ऊपरी हिस्से को खुला मत रखिए या छोटी स्कर्ट मत पहनिए- लेकिन अपने अंगों का प्रदर्शन सिर्फ इस उद्देश्य से मत कीजिए कि…कि जैसे, सिर्फ अंग प्रदर्शन के लिए ही आपने ऐसे कपड़े पहने हों! मेरी इस बात से कहीं भी यह अर्थ नहीं निकलता कि मेरे विचार में आपको अपना शरीर पूरी तरह ढँककर रखना चाहिए, जिससे पुरुष आपका सम्मान करें या आपके साथ छेड़-छाड़ न करें! मेरे विचार में होना तो यह चाहिए कि आप बिना कपड़ों में बाहर निकलें और उसके बाद भी आपको सम्मान की नज़रों से देखा जाए और आपको परेशान करने की किसी की हिम्मत न हो! यह आपके सम्मान की बात है कि आप अपने शरीर का इस्तेमाल इस तरह न करें कि खुद ही अपने शरीर तक महदूद रह जाएँ! सहज, स्वाभाविक रहें!

प्रसंगवश कहना चाहूँगा कि यह बात पुरुषों के लिए भी उतनी ही सच है! यह अच्छी बात है कि आपने घंटों जिम में मेहनत की है, कसरत करके बदन बनाया है, शानदार मांसपेशियाँ और खूबसूरत सिक्स-पैक्स तैयार किए हैं। यह भी बड़ी अच्छी बात है कि आपने अपनी खुराक का ध्यान रखा, खाया कम और प्रोटीन युक्त पेय ग्रहण करते रहे। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि आप शर्ट उतारकर, कहीं भी, कभी भी, इधर-उधर घूमें!

अंत में बिकनी पर वापस आते हुए कहना चाहूँगा कि मुझे आश्चर्य होता है कि समाज में ऐसा कब और कैसे हो गया कि महिलाओं की गरिमा या प्रतिष्ठा को इतना गिरा दिया गया कि वह इतने छोटे से आकार में सिमट गई, जिसे दो इंच के कपड़े से ढँका जा सकता है- हालांकि पुरुषों के मामले में थोड़े बड़े कपड़े की ज़रुरत होगी! उस छोटी सी चिंदी के बगैर वह एक लांछन जैसा होगा- और उसके साथ, तैरते वक़्त पहना जाने वाला साधारण कपड़ा!

मानव मात्र की गरिमा यानी एक खासा नाज़ुक मसला!

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