देशों और संस्कृतियों की तुलना करनी चाहिए मगर यह काम बहुत मुश्किल है – 15 जुलाई 2013

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

बच्चों की परवरिश के विषय में पिछले हफ्ते मैंने बहुत कुछ लिखा था और लोगों से अपनी महत्वाकांक्षाओं पर लगाम रखने की गुजारिश की थी। इसके अलावा यह भी कहा था कि वे अपनी आवश्यकताओं का भी यथार्थपरक अनुमान लगाएँ जिससे वे पैसा कमाने में ज़्यादा समय न लगाएँ और बचा हुआ समय बीबी-बच्चों के साथ बिता सकें। मेरी इस बात पर एक माँ ने मुझसे अपनी परिस्थिति बयान करते हुए कहा, "मैं जानती हूँ कि भारत के गरीब परिवारों की तुलना में मेरे पास बहुत कुछ है और…" उसके इस वाक्य ने मुझे ऐसी तुलनाओं के विषय में सोचने के लिए मजबूर कर दिया और अपने उन विचारों को मैं आज आपके सामने रख रहा हूँ।

मुख्य प्रश्न है: क्या आप भारत जैसे विकासशील देश की तुलना विकसित पश्चिमी देशों से कर सकते हैं? या क्या इन देशों के लोगों की आपस में तुलना करना ज़्यादा उचित होगा?

निश्चय ही एक हद तक आप ऐसा कर सकते हैं और यह अक्सर अच्छा ही होता है। जब आप दोनों देशों में रह रहे होते हैं और आपका उनसे लगातार संपर्क बना रहता है तो यह स्वाभाविक रूप से और अक्सर ही होता रहता है। दोनों देशों के लोगों का रहन-सहन कैसा है, उनके विचार क्या हैं, वे कितना कमाते हैं और उनकी आर्थिक स्थिति कैसी है, उनके जीवन में किस बात का कितना महत्व है और किन चीजों की उन्हें परेशानी होती है और उनकी आदतें क्या हैं? आदि आदि।

पश्चिमी देशों की नज़र से गरीब देशों को देखने का अर्थ है कि वास्तविकता से दो-चार होना। आपको समझ में आता है कि दरअसल आप बहुत सी ऐसी बातों से भी परेशान हो जाते हैं जो दरअसल जीवन में बहुत महत्वपूर्ण नहीं हैं। आपको हमेशा लगता रहा है कि आपके पास पर्याप्त कपड़े नहीं हैं मगर फिर आपको पता चलता है कि दूसरों के पास सिर्फ एक या दो जोड़ी कपड़े ही हैं। यह आपके लिए जीवन-मृत्यु का प्रश्न नहीं है कि आपका व्यापार कुछ मंदा चल रहा है जबकि दूसरे बहुत से लोगों के पास दो वक़्त की रोटी का जुगाड़ भी मुश्किल से हो पाता है और अगर परिवार का मुखिया कुछ दिन बीमार हो जाए तो खाने के लाले पड़ जाते हैं। दुनिया के कई मुल्कों के लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं, उनका धर्म, जाति और लिंग के नाम पर दमन किया जा रहा है और समाज में उनके जीवन की कोई कीमत नहीं रह गई है और हर वक्त मौत का खौफ खाए जाता है।

तो, इस तरह की तुलना से आप अपने जीवन को बेहतर तरीके से और एक मौलिक नज़रिये से समझ पाते हैं। तब आप अपने जीवन से संतुष्ट हो पाते हैं और हो सकता है कि आप अपने आसपास के लोगों के साथ अपने व्यवहार पर भी पुनर्विचार करके उसे बेहतर बनाने के प्रयास करें।

शायद ऐसी तुलना उचित ही है और शायद इनका सकारात्मक असर भी होता होगा मगर दोनों के मध्य के विशाल अंतर को देखते हुए किसी निर्णय पर पहुँचने के लिए यह तुलना निरर्थक ही सिद्ध होती है। ऐसी बहुत सी बाते हैं जो दो देशों या दो संस्कृतियों को देखने के आपके नज़रिये को प्रभावित करती हैं और उन बातों पर अलग से कई लंबे-लंबे लेख लिखे जा सकते हैं।

मैं एक उदाहरण देना चाहता हूँ। आप कहते हैं कि गरीब भारतीय लोगों के पास आपकी तुलना में बहुत कम साधन उपलब्ध है क्योंकि आप एक विकसित देश में रहते हैं। यह बिल्कुल ठीक होगा अगर आप सिर्फ आर्थिक दृष्टिकोण से इसका आकलन कर रहे हों मगर आप निश्चित रूप से यह नहीं कह सकते कि ये गरीब लोग आपसे ज़्यादा परेशान हैं। उनका जीवन पैसे के मामले में तो बहुत कठिन है मगर मानसिक रूप से वे आप लोगों से बहुत कम तनाव में रहते हैं। आपके पीछे कई तरह की जिम्मेदारियाँ और महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं जिन्हें आपको पूरा करना होता है। आपको हर काम अपनी मर्ज़ी से करना होता है और पूरी तरह सही काम करना होता है अन्यथा गलत काम के आप अकेले जिम्मेदार ठहराए जाते हैं, परिवार या समाज का कोई सदस्य आपकी मदद के लिए नहीं आने वाला।

आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि यह बात बहुत से गरीबों के लिए कितना मानसिक सुकून पहुँचाने वाली होती है कि उनके पास खोने के लिए ज़्यादा कुछ नहीं है। जिनके पास थोड़ा-बहुत धन है, वे भी आप लोगों से ज़्यादा मानसिक शांति में जीवन बिताते हैं क्योंकि उन्हें भी भौतिक सुविधाओं और संपत्ति से उतना मोह नहीं होता। इसके अलावा एक विशाल परिवार उनके पीछे खड़ा होता है जो उनके भीतर आपसी सुरक्षा और मानसिक संबल की भावना पैदा करता है।

आप यह न समझें कि मैं आपसे किसी खास दृष्टिकोण से दुनिया को देखने के लिए कह रहा हूँ। आप स्वयं यह निर्णय करें कि आप किस तरह या किस नज़रिये से उसे देखना चाहते हैं। मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूँ कि मेरे पास किसी देश या समाज या संस्कृति को बेहतर और किसी दूसरे को कमतर समझने का कोई कारण नहीं है। पहली बात तो ऐसी तुलना करना बहुत मुश्किल होता है और फिर आपको किसी देश या समाज और उसकी संस्कृति को जानने के लिए वहाँ बहुत समय बिताना पड़ता है तभी आप ऐसी किसी तुलना की शुरुआत करने के काबिल हो सकते हैं।