यह आपका जीवन है – ध्यान रहे, समाज आप पर कोई दबाव न बना पाए- 13 अगस्त 2013

समाज

लोगों द्वारा बनाई जाने वाली जीवन की योजनाओं के बारे में कल जब मैंने लिखा था तो मेरे मन में एक और बात भी थी, जिसे मैं इन शब्दों में आपके सामने रखना चाहता हूँ: यह कार्ययोजना अक्सर सबके लिए ठीक नहीं होती-भले ही समाज आप पर इस बात पर विश्वास करने का दबाव डाले!

यह ब्लॉग उन महिलाओं के बारे में नहीं है, जो उस आयु में प्रवेश कर चुकी हैं जब वे माँ नहीं बन सकतीं और जो इस बात पर दुखी होती हैं कि अब उन्हें माँ बनने का अनुभव नहीं हो पाएगा। मैं उनका दर्द समझ सकता हूँ, मैं ऐसी बहुत सी महिलाओं से मिला हूँ और उनमें से कई मेरी व्यक्तिगत मित्र भी हैं। नहीं, यह ब्लॉग उन लोगों के बारे में है जो अपने ‘जीवन के लक्ष्य’ प्राप्त करते वक़्त बाहरी दबावों को तरजीह देते हैं, जबकि वे स्वयं अन्तर्मन से ‘जीवन के उन लक्ष्यों’ को उतना महत्वपूर्ण नहीं मानते!

यह ब्लॉग वृहत जनसमुदाय के लिए नहीं है और इसमें मैं बहुसंख्यक लोगों से मुखातिब भी नहीं हूँ बल्कि मैं कुछ थोड़े से लोगों से, अल्पसंख्यकों से, यह बात कह रहा हूँ। लेकिन, जो लोग इन थोड़े से लोगों में शामिल नहीं भी हैं, वे भी एक अलग नज़रिये को जान-समझ सकेंगे और हो सकता है कि ऐसे लोगों के प्रसंग में अपने रुख में परिवर्तन कर सकेंगे जिससे अंततः उन्हें भी आसानी होगी।

सामान्यीकरण करने की आज़ादी दें तो मैं कहना चाहता हूँ कि समाज यह समझता है कि जीवन में हर व्यक्ति को कुछ बातें हर हालत में करनी ही चाहिए या उन सामाजिक लक्ष्यों को हासिल करना ही चाहिए, जिससे लगे कि आपका जन्म सफल हुआ, या आप देश के एक महत्वपूर्ण और कर्तव्यपरायण नागरिक हैं या सिर्फ इसलिए कि समाज की अपेक्षाओं पर आप खरे उतरे। को आपसे अपेक्षा थी उसमें आप सफल हुए। पढ़ाई पूरी करें या कोई प्रशिक्षण प्राप्त करें, नौकरी करें, विवाह करें, बच्चे पैदा करें, अपना मकान बनवा लें। आप यह नोटिस करेंगे कि ये वही लक्ष्य हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए लोग स्वयं अपने आप पर दबाव बनाते हैं। कुछ लोगों के लिए यही दबाव समाज बनाता है।

कुछ बातें बहुत से लोगों की नज़रों में बिल्कुल उचित नहीं होतीं। अलग-अलग देशों के लिए यह अनुचित लगने वाली बात अलग-अलग होती है। पश्चिमी महिलाओं के लिए यह पढ़ाई पूरी होने से पहले या कोई प्रशिक्षण लेने से पहले बच्चे पैदा करना या कोई प्रशिक्षण न लेने का निर्णय लेकर घरेलू महिला का जीवन गुजारना या, और इस पर आश्चर्य है, विवाह न करने का और बच्चे पैदा न करने का निर्णय लेते हुए सारा जीवन अपने पेशे और तरक्की के लिए न्योछावर कर देना हो सकता है। वहीं, भारतीय महिलाओं के लिए विवाह न करना, बच्चे पैदा करने से पहले कोई नौकरी कर लेना और नौकरी में तरक्की के पीछे भागने को अपना लक्ष्य बनाना या बच्चे पैदा न करने का निर्णय लेना ऐसी अनुचित बातें हो सकती हैं। जीवन के कई दूसरे क्षेत्रों के संदर्भ में भी इसके कई उदाहरण दिये जा सकते हैं-मुझे लगता है कि जो इस स्थिति से गुज़र रहे हैं, वे समझ रहे होंगे कि मैं क्या कहना चाहता हूँ।

अगर आप अपने लिए कोई ऐसा लक्ष्य निर्धारित करना चाहते हैं या कोई ऐसा काम करना चाहते हैं जो उस देश का आम रवैया या परंपरा नहीं है तो आपको अपने परिवेश से बहुत सी नकारात्मक प्रतिक्रियाएँ सुनने को मिल सकती हैं। इतना ही नहीं, इस अपारंपरिक लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए बार-बार आपको अपनी सोच और अपने निर्णय पर ही शक पैदा होता रहेगा। लेकिन अगर आपको लगता है कि आप सामान्य परम्पराओं के अनुसार नहीं चल सकते और आपको अपना अलग रास्ता मिल गया है और आप उस रास्ते पर चलते हुए प्रसन्न हैं-हालांकि यह इतना आसान नहीं होगा-अपने निर्णय पर अटल रहिए! ‘बहुमत’ को आपका तिरस्कार करने की इजाज़त मत दीजिए।

वही करें जो आप ठीक समझते हैं। जी हाँ, हो सकता है कि लोगों के तीखे ताने और आलोचनाएँ सुनने और सहने के लिए आपको कुछ अधिक साहस का परिचय देना पड़े। यह कभी-कभी आपको बहुत बेचैन भी कर सकता है लेकिन अपने इरादे और अपनी इच्छा के विपरीत आचरण करना आपके लिए उससे ज़्यादा बेचैन करने वाला हो सकता है।

आपका निर्णय कितना भी मूर्खतापूर्ण और अप्रिय क्यों न दिखाई दे, अपने दिल का कहा मानें। यही एकमात्र सही तरीका है जो आपको सुख और शांति प्रदान कर सकता है!

Leave a Comment