मैंने एक स्थानीय अखबार में एक घटना का चिन्हांकित (विशेष) समाचार पढ़ा। उच्च जाति और नीची जाति, जिन्हें अछूत कहा जाता है, के दो परिवार एक दूसरे के पड़ोसी थे। उच्च जाति वाले परिवार ने एक कुत्ता पाला था। एक दिन उन्होंने देखा कि उनका कुत्ता नीची जाति के यहाँ की रोटी खा रहा है। बासी होने के कारण नीची जाति वाले ने उसे फेंक दिया था।
उच्च जाति के परिवार वाले बड़े गुस्सा हुए। उनके कुत्ते ने एक अछूत के हाथ की बनी रोटी खा ली थी! वे नीची जाति के परिवार को बुरा-भला कहने लगे और उन पर इल्ज़ाम लगाने लगे कि उन्होंने उनके कुत्ते का धर्म भ्रष्ट कर दिया और उसे भी अछूत बना दिया। उन्होंने कहा कि उनके कुत्ते को अब उस अछूत परिवार को पालना होगा क्योंकि वे उसे अब नहीं रख सकते। उन्होंने उनसे 15000 रुपए (लगभग 300 डॉलर) के हर्जाने की मांग भी की जो उन्होंने कुत्ते को खरीदने पर खर्च किए थे। वे कोई बात सुनना ही नहीं चाहते थे, बस पट्टे से बांधकर कुत्ते को लाए और उस नीची जाति वाले परिवार के घर के सामने बांध दिया और धमकी देने लगे कि अगर 15000 रुपए नहीं अदा किए तो सारे परिवार की हत्या कर दी जाएगी!
घबराकर नीची जाति वाला परिवार कुत्ते को लेकर पुलिस थाने पहुंचा और रपट लिखा दी। पुलिस ने आश्वासन दिया कि वे उस दूसरे परिवार के विरुद्ध कार्यवाही करेंगे।
मैं जान-बूझकर आज के दिन, 2 अक्टूबर को यह लिख रहा हूँ क्योंकि आज ‘राष्ट्रपिता’ महात्मा गांधी का जन्मदिन है। उनका सारा जीवन देश की स्वतंत्रता और समानता की अहिंसक लड़ाई लड़ते हुए बीता। अंग्रेजों के चंगुल से देशवासियों की मुक्ति और देश की जनता के बीच आपसी समानता और भाईचारा। वे सदा ऊंच-नीच के विचार का विरोध किया करते थे और सबसे बड़ी बात कि कोई मनुष्य अछूत हो सकता है, इस विचार की वे घोर निंदा करते थे।
लेकिन, दुर्भाग्य से उनका समानता का स्वप्न आज भी अधूरा ही है, जैसा कि ऊपर वर्णित प्रकरण दर्शाता है। जिस दिन यह घृणास्पद व्यवहार खत्म होगा उसी दिन महात्मा गांधी को हम गर्व के साथ याद कर पाएंगे। जाति प्रथा को समाप्त करने के हमारे प्रयास गांधी जी के चरणों में अर्पित हमारी पुष्पांजलि है।
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