धर्म, सेक्स, ईश्वर और आपके पूर्वजों के बीच क्या संबंध है? 13 अक्टूबर 2015

आज से नवरात्रि की शुरुआत है, जो हिंदुओं का एक पवित्र त्योहार है और कई दिनों तक चलता है। यह बताने के स्थान पर कि इन नौ दिनों में हिन्दू क्या करते हैं, मैं आज आपको बताऊँगा कि वे क्या नहीं करते: सेक्स। जी हाँ, और इसे 15 दिन और खींचकर लंबा कर दिया जाता है, जो दोनों मिलाकर 24 दिन हो जाते हैं और माना जाता है कि अच्छे, आस्थावान हिन्दू इन 24 दिनों में संभोग नहीं करते। गजब!

असल में इस बात का एहसास मुझे हाल ही में एक मित्र के साथ बातचीत के दौरान हुआ। वह उच्च जाति का धार्मिक व्यक्ति है और हिन्दू धर्म के रीति-रिवाजों का सख्ती के साथ पालन करता है। बातचीत के दौरान उसने बताया कि दो हफ्तों से उसने सम्भोग नहीं किया है। अपने जीवन में वार्षिक श्राद्ध के इन दो हफ़्तों के दौरान उसने कभी सेक्स नहीं किया। तभी मुझे आगामी त्योहारों में होने वाले जश्न का खयाल आया और मैंने पूछा, ‘तब तो नवरात्रि के अगले दस दिन भी तुम सम्भोग नहीं करोगे?’ उसने कहा कि नही, बिल्कुल नहीं-नवरात्रि के दिन तो बहुत पवित्र होते हैं, सम्भोग का सवाल ही नहीं उठता!

न जाने कितने हिन्दू यह पढ़कर मुझे भला-बुरा कहेंगे-नवरात्रि का पहला दिन है और इसे चर्चा के लिए यही विषय मिला!

पिछले 15 दिन का समय हर साल वह समय होता है जब हिन्दू अपने पूर्वजों को याद करते हैं। इन दिनों में वे अपने मृत पूर्वजों के लिए कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। वे मानते हैं कि इस समय उनके मृतक रिश्तेदार उनके करीब होते हैं। इन दिनों में वे कोई नया या शुभ कार्य शुरू नहीं करते क्योंकि वे मानते हैं कि यह समय अशुभ है और इसलिए उस काम में व्यवधान उपस्थित होंगे। इस समय आप जो भी करें, उसे अपने पुरखों के विचार के साथ करें। सेक्स करना उनके प्रति असम्मान होगा, उनकी अवज्ञा मानी जाएगी और ऐसा करके आप अपने माता-पिता, दादा-दादी और दूसरे पूर्वजों का अपमान कर रहे होंगे!

लेकिन आज और आने वाले नौ दिनों की बात बिल्कुल दूसरी है। नवरात्रि का समय शुभ समय है और आम हिन्दू इन दिनों में बहुत से समारोह आयोजित करते हैं, नए काम शुरू करते हैं और मानते हैं कि ईश्वर का आशीर्वाद इन कार्यों के साथ होगा और उनका परिणाम अच्छा और शुभ होगा! और वे सेक्स करके उसकी पवित्र, लाभदायक ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहेंगे!

जी नहीं, सेक्स एक पाप की तरह है, वह किसी शुभ काम को खराब कर सकता है, जो भी अच्छा काम आप शुरू करना चाहते हैं, उसमें वह व्यवधान उपस्थित कर सकता है! यहाँ, भारत में सेक्स बहुत खराब और अपवित्र काम माना जाता है! आप सोच सकते हैं कि अगर आपके मन में सेक्स को लेकर ऐसी भावनाएँ हैं तो आप सेक्स करते हुए खुद को कितना अपराधी महसूस करेंगे! धर्म के अनुसार भारत में सिर्फ वंशवृद्धि हेतु सेक्स की मान्यता है और अगर आपका उद्देश्य बच्चे पैदा करना नहीं बल्कि प्रेम के वशीभूत अपनी और अपने साथी की शारीरिक क्षुधा शांत करना है तो निश्चित ही वह सर्वथा अनुचित है!

उसके करीब आना, जिसे आप प्रेम करते हैं, उससे लिपटना, चूमना, आनंद लेना और सबसे बढ़कर, अपनी शारीरिक इच्छाओं को संतुष्ट करना आदि हर तरह से बुरा और अनुचित माना जाता है। यहाँ तक कि वे लोग भी, जो सामान्य रूप से सोचने-समझने वाले हैं और समझते हैं कि सेक्स में कोई बुराई नहीं है, सेक्स को लेकर जड़ जमाए बैठी नकारात्मक भावनाओं के चलते सामान्य दिनों में भी अपने साथी के साथ सोते हुए अपराधी महसूस करते हैं। इन पवित्र दिनों में वे सेक्स के बारे में क्या सोचते होंगे, आप कल्पना कर सकते हैं! और यह इन नौ दिनों की ही बात नहीं है, साल भर में यहाँ त्योहारों के इतने सारे शुभ दिन हैं जब-उन लोगों के लिए, जो सेक्स को पाप मानते हैं-प्रेम का यह समारोह वर्जित है।

लेकिन यह इतना गलत विचार है कि मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मैं अपना विरोध ठीक तरह से कैसे व्यक्त करूँ! इस धरती पर मौजूद सबसे शानदार चीज़, प्रेम के साथ स्वाभाविक रूप से जुड़ा शारीरिक मिलन, दो शरीरों का पिघलकर एक हो जाना, प्रेम के चलते होने वाली वह इंद्रियजन्य अनुभूति, वह भावना आदि, इन सभी को धर्म ने आसुरी करार दे दिया है। इन सीमाओं से हमें बाहर निकलना होगा-अपने व्यवहार के धरातल पर ही नहीं, बल्कि अपने दिलो-दिमाग से भी इन गलत विचारों को निकाल बाहर करना होगा!

प्रेम और उसकी अभिव्यक्ति गलत नहीं है बल्कि बहुत सुंदर है!

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